स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने देश में “फीलपांव” या “हाथीपांव” के नाम से मशहूर बीमारी लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (Lymphatic Phyleriasis) के उन्मूलन पर विमर्श और रणनीति बनाने के उद्देश्य से बुधवार को नई दिल्ली में ग्लोबल अलाइएंस टू एलीमिनेट लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (GAELF) के 10वें सम्मेलन का उद्घाटन किया।

उन्होंने कहा कि भारत ने लिम्फैटिक फाइलेरियासिस के जल्द उन्मूलन के लिए नई रणनीति अपनाई है। इस मौके पर नड्डा ने भारत में फाइलेरियासिस के उन्मूलन के आगे की रणनीति एक्सीलेरेटिड प्लॉन फॉर एलीमिनेशन ऑफ लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (एपीईएलएफ) को लांच किया।

भारत में फाइलेरियासिस के उन्मूलन कार्यक्रम को बढ़ावा देने की जरूरत पर जेपी नड्डा ने कहा, ट्रिपल ड्रग थेरेपी या आईडीए ( आइवरमीक्टिन, डाईइथाइलकारबामैजीन और एलबेनडाजोल), एमडीए को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए समुदाय की सहभागिता और डीईसी-औषधीय साल्ट, जो कि सभी एपीईएलएफ का हिस्सा है, जैसी रणनीतियों को देश में इस बीमारी के उन्मूलन प्रयासों को मजबूत करने के लिए प्रसारित किया जाएगा।

जीएईएलएफ के 10वें सम्मेलन में देश के विभिन्न कार्यक्रमों, दवाइयां उपलब्ध कराने वाली तीनों फार्मास्यूटिकल कंपनियों ( जीएसके, ईसाई और एमएसडी), गैर सरकारी संस्थाओं, रिसर्च संस्थाओं, डोनर सरकारी संस्थाओं और वल्र्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) को एक साथ लाया गया।

इस साल जीएईएलएफ की थीम ‘सेलिब्रेटिंग प्रोगरेस टूवर्डस एलीमिनेशन: वॉयसस फ्रॉम द फील्ड ऑन ओवरकमिंग प्रोग्राम चैलेंज’ है। सभी एलएफ स्थायिक देशों के कार्यक्रम से जुड़े मैनेजर और सीनियर मंत्री सम्मेलन में अपने अनुभवों, चुनौतियों और वर्तमान जरूरतों के बारे में चर्चा करेंगे। इसमें 11 देशों को बुधवार को फाइलेरियासिस के उन्मूलन के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें कम्बोडिया, कुक आइलैंड, मिस्र, मालदीव, मार्शल आइलैंड, नियू, श्रीलंका, थाइलैंड, टोगो और टोनगो, वानुअतु शामिल हैं।

गुयाना के लोक स्वास्थ्य मंत्रालय के मंत्री डॉ. करेन क्यूमिंग्स ने कहा कि गुयाना क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर वेक्टर नियंत्रण और एलएफ उन्मूलन के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) की स्वीकार्यता पर काम करेगा।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने एमडीए में उपचार का अनुपालन करने की सबसे बड़ी चुनौती को प्रमुखता से संबोधित करने की आवश्यकता को दोहराया। उन्होंने कहा कि एमडीए के दौरान समुदाय को इस निवारक दवाइयों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना बहुत महत्वपूर्ण है। जीएईएलएफ के चेयर प्रोफेसर चार्ल्स मैकनेजी ने कहा कि समुदाय की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी, प्रोग्राम डिलवरी में सुधार और इलाज का सीधा अवलोकन करने जैसे बिंदुओं को चिन्हांकित किया।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डॉयरेक्टर जनरल डॉ. बलराम भार्गव ने आईसीएमआर द्वारा की गई आईडीए के स्टडी ट्रायल के परिणामों की बात की, जिसमें आईडीए की प्रभावकिता और सुरक्षा के प्रमाण है और इसे जल्द ही वाराणसी (उत्तर प्रदेश), नागपुर (महाराष्ट्र), अरवल (बिहार) और सिमडेगा (झारखंड) में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

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