भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी के बावजूद लैंगिक असमानता, विशेषकर वरिष्ठ पदों पर, अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। 

एक सर्वेक्षण के मुताबिक 16% संगठनों के निदेशक मंडल में कोई महिला नहीं है। वहीं 47% में शीर्ष पदों पर महिलाओं की संख्या 5% से अधिक नहीं है।

भारतीय उद्योग परिसंघ ( सीआईआई ) के भारतीय महिला नेटवर्क ( आईडब्ल्यूएन ) और ईवाई ने इस संबंध में एक देशव्यापी सर्वेक्षण किया।

सर्वेक्षण के मुताबिक बेइरादतन पक्षपात, नीतियों के निष्प्रभावी अनुपालन, महिलाओं के लिए पदों की संख्या कम होना, लैंगिक विविधता के फायदों से अनभिज्ञता इत्यादि लैंगिक विविधता की प्रगति के रास्ते में प्रमुख चुनौतियां हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 42% महिलाओं ने कहा कि उन्हें प्रबंधकीय पक्षपात से गुजरना पड़ा है। यह पक्षपात वरिष्ठ स्तर पर दिखता है जो कार्यस्थल पर महिलाओं की तरक्की को प्रभावित करता है।

वहीं 33% महिलाओं का मानना है कि कार्यस्थल पर एक ही काम के लिए महिला और पुरुषों के काम एवं प्रदर्शन के लिए अलग मानक हैं और उनसे उम्मीद भी अलग – अलग तरह की जाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 69% संगठन लैंगिक विविधता के वित्तीय फायदों को समझने में असमर्थ हैं।

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