केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच अलग-अलग मुद्दों पर चल रहा टकराव अब खुलकर सामने आ रहा है। 83 साल के इतिहास में सरकार ने पहली बार धारा 7 का इस्तेमाल किया है, जिसके तहत सरकार रिज़र्व बैंक को आदेश दे सकती है। एनपीए, नगदी संकट और बिजली कंपनियों को छूट जैसे मुद्दों पर विचार करने के लिए सरकार ने धारा 7 के तहत आरबीआई को 3 पत्र लिखे हैं। 

 
 
 
 
 
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NATIONAL | RBI gov to quit, clash with NDA Govt. Details: The rift between India’s central bank and the government has widened and could lead to the Reserve Bank of India (RBI) governor considering resignation, CNBC TV18 reported on Wednesday, citing sources. There has been an irreversible breakdown between the RBI Governor Urjit Patel and the government, the media said, adding that all options were on the table. The RBI was not immediately available for comment. Former Union Minister P Chidambaram took to Twitter earlier today saying there could be more bad news today. Chidambaram ✔ @PChidambaram_IN If, as reported, Government has invoked Section 7 of the RBI Act and issued unprecedented ‘directions’ to the RBI, I am afraid there will be more bad news today Finance Minister Arun Jaitley on Tuesday accused the RBI for bad loan crisis and said that the central bank was not doing enough. He said that after the 2008 global financial crisis, banks continued lending indiscriminately to keep the economy going “artificially”. Jaitley suggested that the practice of indiscriminate lending ended only in 2014. #indianews #RBI #NDA #ArunJaitley #PChidambaram #pratidintime

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दैनिक भास्कर के अनुसार ये तीनों पत्र एक महीने के दरम्यान लिखे गए हैं। इसके बाद रिज़र्व बैंक के डिप्टी-गवर्नर विरल आचार्य ने पिछले शुक्रवार को आरबीआई की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया था। धारा 7 के इस्तेमाल की खबरों के बाद वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया था। इस बीच सूत्रों ने दावा किया है कि अगर सरकार ने आरबीआई को कोई फैसला लेने का निर्देश दिया तो गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। 

क्या है मामला 

दरअसल न्यूज़ 18 के मुताबिक, केंद्र सरकार आरबीआई से कुछ बैंकों को कर्ज देने के नियमों में छूट चाहती थी। साथ ही सरकार कथित रूप से आरबीआई पर इस बात के लिए भी दबाव डाल रही थी कि वह अपने 3.6 ट्रिलियन के सरप्‍लस धन में कुछ हिस्‍सा सरकार को दे, जिससे राजकोषीय घाटा कम किया जा सके। इसके अलावा सरकार आरबीआई की नियामक ताकतों में भी कटौती करने की कोशिश कर रही है। 

 
 
 
 
 
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ஆர்பிஐ ஆளுநர் உர்ஜித் படேல் பதவி விலக வாய்ப்பு? #rbivsgovt #rbi #urjitpatel

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 आखिर सरकार ने किन मुद्दों पर आरबीआई को चिट्ठी लिखी 

 1. बिजली कंपनियों को छूट : रिज़र्व बैंक ने फरवरी महीने में अपने नियम बदले। नए नियम के अनुसार अगर कोई कंपनी ऋण चुकाने में एक दिन भी  देर करती है तो बैंक उसके खिलाफ कार्यवाही करेगी। लेकिन सरकार बिजली कंपनियों के लिए छूट चाहती थी। 

2. बैंको को क़र्ज़ देने पर रोक : रिज़र्व बैंक ने 12 बैंकों को तत्काल सुधार की श्रेणी में रखा हैं। इसलिए इन बैंकों को नया क़र्ज़ नहीं मिल सकता। लेकिन सरकार चाहती है कि नियम आसान हों ताकि छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए क़र्ज़ बढ़ाया जा सके।  

3. कम नगदी की समस्या : सरकार कहती है कि हाल ही के महीनो में नगदी की समस्या आयी है। इसलिए आरबीआई को अपने रिज़र्व का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं आरबीआई का कहना हैं कि चुनिंदा सेक्टर को छोड़कर कहीं भी नगदी की समस्या नहीं है। 

हालाँकि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि चर्चा के लिए पत्र भेजने का मतलब यह नहीं है कि सरकार आरबीआई को निर्देश देगी और सरकार की तरफ से अभी तक आरबीआई के लिए कोई निर्देश भी जारी नहीं किया गया है। 

 

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