दिवाली के मौके पर प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया था जिसका लोगों ने काफी विरोध किया था। इसके बाद भी शहर में काफी पटाखे चले थे और प्रदूषण का स्तर अधिक रहा था। इस बार कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ पटाखों से बैन हटा दिया है। ऐसे में दिवाली पर एक बार फिर प्रदूषण बढ़ने की संभावना है। प्रदूषण से निपटने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने मैनुअल तरीके से प्रदूषण जांचने की योजना बनाई है।

प्रदूषण बढ़ने की रहेगीं संभावनाएं: पिछले साल पटाखों की बिक्री बंद होने के बाद भी शहर में काफी पटाखे चले थे, जिससे अगले दिन प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा गया था। पिछले साल दिवाली के अगले दिन फरीदाबाद में पीएम 2.5 का स्तर 327 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। हालांकि यह साल 2016 की तुलना में कम था, लेकिन पीएम 2.5 की यह मात्रा भी सामान्य से लगभग 5 गुणा अधिक है। साल 2016 में दिवाली पर पटाखों पर पाबंदी नहीं थी और उस दिन पीएम 2.5 की मात्रा 405 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। इस बार पटाखों की बिक्री होगी तो पटाखे अधिक चलेंगे, जिससे प्रदूषण बढ़ने की संभावनाएं बनी रहेंगी।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर विजय चौधरी ने बताया कि अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की कॉपी हमारे पास नहीं आई है। आदेशों के अनुसार कुछ शर्तों के साथ ही पटाखों की बिक्री हो सकेगी। उन्होंने बताया कि शहर में प्रदूषण का स्तर जांचने के लिए सेक्टर- 16 स्थित विभाग के कार्यालय पर ही मशीन लगी हुई है। दिवाली के जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में आतिशबाजी होती है, जिससे मशीन पूरे शहर में प्रदूषण का सही आंकड़ा नहीं निकाल पाती। ऐसे में हम दिवाली के दिन मैनुअल तरीके से प्रदूषण की जांच करेंगे।

पटाखा विक्रेता शाकमी हुसैन के अनुसार पाबंदी से पहले सेक्टर 37 में पटाखों के स्टॉल लगते थे। पिछले साल उन्होंने पटाखे नहीं बेचे। अब सुनने में आया है कि कोर्ट ने बिक्री से बैन हटा दिया है तो नियमों की जानकारी लेने के बाद वे लाइसेंस के लिए अप्लाई करेंगे।

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