बचपन में हम सभी ने सर्कस में जानवरों को कलाबाजियां करते हुए देखा है। इन हैरतअंगेज कारनामों को देखने के बाद हर कोई ही हतप्रभ रह जाता था। लेकिन सर्कस में जानवरों का खेल अब हर किसी के लिए एक स्वप्न बनकर रह जायेगा। क्योंकि केंद्र सरकार एक प्रस्ताव पारित करने जा रही है जिसके पास होने के बाद कोई भी जानवर सर्कस में अपनी कलाबाजियों का प्रदर्शन करता नजर नहीं आएगा। 

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शेर और बाघ जैसे जानवर सर्कस से शुरुआती दौर से जुड़े रहे हैं उन पर पहले से प्रतिबन्ध लग चुका है। और इसके बाद घोड़े, गैंडे, हाथी और कुत्ते भी आपको सर्कस में नजर नहीं आएंगे। 

लम्बे समय से पशु कार्यकर्ताओं की मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह विधेयक लाने का फैसला किया है। पशु कार्यकर्ताओं ने इस प्रस्ताव को प्रगति- शील और प्रशंसनीय करार दिया है। 

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पेटा इंडिया के सीईओ मनिलाल वालियते ने कहा, “सर्कस में जानवरों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने से भारत उन देशों की सूची में आ जाएगा जो पहले ही यह निर्णय लेकर दुनिया को बता चुके हैं कि वे प्रगतिशील और संवेदनशील राष्ट्र हैं जो जानवरों पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करते हैं।”

द पीपुल्स फॉर एनिमल्स (पीएफए) की पशु कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने बताया कि उनका संगठन लगातार सर्कस में मनोरंजन के नाम पर जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता और अत्याचार को ख़त्म करने का अनुरोध करता रहा है। 

इस प्रस्ताव के पास होने के बाद जानवरों के साथ दुराचार नहीं होगा। और न ही उन्हें एक छोटी-सी जगह में रहने पर मजबूर होना पड़ेगा। साथ ही जानवरों को सर्कस में दी जानेवाली असहनीय दर्द वाली ट्रेनिंग से भी नहीं गुजरना पड़ेगा। 

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पिछले कुछ सालों में सर्कस के प्रति लोगों की रूचि में कमी आयी है। पशु प्रदर्शन (पंजीकरण) संशोधन नियम, 2018 विधेयक के अनुसार, किसी भी जानवर को सर्कस में मनोरंजन के लिए नहीं रखा जायेगा। 

जानवरों पर लगने वाला प्रतिबंध 30 दिनों बाद तब लागू होगा जब पर्यावरण मंत्रालय को सभी हितधारकों से सुझाव मिल जायेंगे। यह उन जानवरों पर भी लागू होगा जिनका वर्तमान में सर्कस में प्रयोग हो रहा है। 

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