ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील पुल एशिया का दूसरा सबसे लम्बा रेल-सड़क पुल है। जिसे मंगलवार 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यातायात के लिए खोला जायेगा। इसे करीब 5900 करोड़ की लागत से बनाया गया है। यह पुल अरुणाचल सीमा से सटे होने के कारण सामरिक दृष्टि से भारतीय सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस पुल के शुरू होने से भारतीय सेना के जवानों को आवागमन में बड़ी मदद मिलेगी। 

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इस पुल को बनाने के लिए पहली बार यूरोपीय कोड और वेल्डिंग मानकों का पालन किया गया है। जिसके कारण इसके रखरखाव की लागत कम होगी। यह पुल असम से अरुणाचल प्रदेश तक की यात्रा को चार घंटे से भी कम समय में पूरा करेगा। साथ ही यह पुल दिल्ली से डिब्रूगढ़ 37 घंटे की ट्रेन यात्रा को 34 घंटे में पूरा करेगा।  

4.9 किलोमीटर लम्बा यह पुल भारत का एकमात्र पूर्ण वेल्डेड ब्रिज है। और इस पुल के निर्माण में जो सामग्री इस्तेमाल की गई है वो जंगरोधी है। उन्होंने बताया इस पुल में 42 डबल डी वेल फाउंडेशन के खंभे हैं, इन खंभों की वजह से पुल की मजबूती बहुत ज्यादा है। इस वजह से भयानक बाढ़ और बड़े भूकंप के झटकों को भी ये पुल आसानी से सहन कर सकता है। 

इस पुल का निर्माण विदेश की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके किया गया है। इस डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज की खासियत यह है कि इसमें नीचे की तरफ दो रेल लाइनें और उसके ऊपर थ्री लेन की सड़कें बनाई गई हैं। इसकी सेवा अवधि लगभग 120 वर्ष है।

बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण तट को अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती धेमाजी जिले में सिलापाथर को जोड़ेगा। जिसका लाभ धेमाजी के लोगों को होगा क्योंकि मुख्य अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ में हैं। 

ऐसे में सामरिक दृष्टिकोण से यह ब्रिज काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इस पुल के बन जाने से ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे और उत्तरी किनारे पर मौजूद रेलवे लाइन आपस में जुड़ जाएंगी। ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मौजूद चल खोवा और मोरान हॉट रेलवे स्टेशन भी  तैयार हो चुके हैं। 

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