मानव तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर गैर लाभकारी संस्था सेव द चिल्ड्रन ने डिजिटल एवं सोशल मीडिया एजेंसी वॉटकंसल्ट और स्नैपडील के साथ साझेदारी कर ‘किड्सनॉटफॉरसेल’ अभियान शुरू किया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर घंटे सात बच्चे खोते हैं इनमें से आधे कभी घर नहीं लौट पाते हैं। 2016 और 2017 के बीच, लगभग एक लाख बच्चे गुमशुदा हुए। मानव तस्करी दुनिया में तीसरा सर्वाधिक फैला हुआ अपराध है। “किड्स नॉट फॉर सेल” (Kids not for sale) अभियान का मकसद भारत में बाल तस्करी की समस्या पर जागरूकता बढ़ाना है।

सेव द चिल्ड्रन की हेड ऑफ कैंपस प्रज्ञा वत्स ने इस बारे में कहा, बच्चे सबसे आसान निशाना होते हैं। इसलिए उनकी तस्करी कर उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, उनका शोषण किया जाता है और उनसे वेश्यावृत्ति, मजदूरी या घरेलू काम कराया जाता है। सर्वाधिक अमानवीय अपराध, ‘मानव तस्करी’ के कारण बच्चे सदैव के लिए अपना बचपन खो देते हैं। हमें इस अमानवीयता को रोकना होगा। इसलिए हमने ‘किड्सनॉटफॉरसेल’ अभियान शुरू किया है।

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प्रतिकात्मक तस्वीर

स्नैपडील के प्रवक्ता ने कहा, बच्चों की तस्करी एक गंभीर समस्या है। इस साल ग्राहकों द्वारा दिए गए डोनेशन के माध्यम से सरकार से बच्चों की सुरक्षा के लिए कठोर कार्रवाई करने का निवेदन किया गया है।

केंद्र सरकार ने रविवार को संसद में भारत के पहले ट्रैफिकिंग ऑफ र्पसस (प्रिवेंशन, प्रोटेक्शन एवं रिहैबिलिटेशन) विधेयक, 2018 का प्रारूप पेश कर इस दिशा में कदम उठाया है।

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