शुक्रवार आधी रात राजधानी दिल्ली के एक शरणार्थी तम्बू आश्रय में शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग में एक युवक की मौत हो गई। शरणार्थियों के साथ काम करने वाले एक कार्यकर्ता ने राज्य में बेघर लोगों के लिए और अधिक स्थायी आश्रयों के निर्माण की मांग की।

हाउज़िंग एण्ड लैंड राइट नेटवर्क (Housing and Land Rights Network (H.L.R.N.)) के अनुसार दिल्ली में डेढ़ से दो लाख बेघर लोग हैं और निष्ठुर ठंड में बेघर लोगों को छत मुहैया कराने के लिए सरकार शरणार्थी आवास का निर्माण कराती है। एनडीटीवी (NDTV) के अनुसार, दिल्ली अर्बन शेल्टर बोर्ड (Delhi Urban Shelter Board) के अधीन 261 रात्री आवास (night shelters) हैं जो कि अनुबंध के आधार पर एनजीओ के माध्यम से चलते है।

The tent shelter gutted in the fire.

ठंड से बचाने के लिए मूलभूत सुविधाओं के साथ इनमें से 2,61,115 पोर्टा केबिन आश्रय, 83 स्थायी घर, और 66 टेंट शरणार्थी घर हैं। आग ऐसे ही एक टेंट आश्रय गृह में लगी।

बेघरों के लिए काम करने वाले सुनील कुमार अलेडिया (Sunil Kumar Aledia) ने एनडीटीवी इंडिया से कहा, “यमुना बाज़ार (Yamuna Bazar) के डान्डी पार्क (Dandhi Park) के एक टेंट आश्रय गृह में शॉर्ट सर्किट की वजह से रात करीब 1 बजे आग लग गई। 10-12 लोग अन्दर थे। लोगों ने सो रहे केयर टेकर की जान बचाई, लेकिन इस भगदड़ में एक युवक फंस गया और उसने अपनी जान गंवा दी।

जले हुए युवक का शरीर जिसने आग में अपनी जान गँवा दी।

सुनिल के अनुसार, इन आश्रय गृह में आग की बात कोई नई नहीं है और उसी आश्रय गृह में फरवरी 27 को भी आग लगी थी लेकिन उस पर काबू पा लिया गया था और जान माल की कोई हानि नहीं हुई थी। “साल 2011 में जामा मस्जिद टेंट आश्रय घर में भी आग लगी थी और साल 2010 में बंगला साहिब टेंट आश्रय घर में भी। दोनों ही दुर्घटनाओं में एक-एक बच्चे ने अपनी जान गंवाई,” सुनील ने कहा।

टेंट आश्रय गृह कोई समाधान नहीं है। सरकार को नेशनल अरबन लाइवलीहुड मिशनल शेल्टर फॉर अरबन होमलेस (National Urban Livelihood Mission-Shelter for Urban Homeless (NULM-SUH)) के मानक अनुसार स्थायी आवास का निर्माण करना चाहिए।

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