एनटीडी इंडिया आपके लिए इथन गुटमन (Ethan Gutmann) के साथ खास बातचीत लाए हैं—जो 2017 नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित एक अमेरिकी जांच पत्रकार, मानवाधिकार रक्षक, जाने-माने चीनी विश्लेषक और लेखक हैं। ये वार्ता आज की दुनिया के सबसे बड़े मुद्दों में से एक पर केन्द्रित हैः चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा धार्मिक-निष्ठा वाले कैदियों के अंगों को जबरन प्रत्यारोपण के लिए निकालना।

गुटमन द्वारा जारी की गई एक प्रमुख जांच रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्यूनिस्ट शासन लाभ के लिए धार्मिक निष्ठा वाले कैदियों से अंगों को निकालने में लगा है। इस रिपोर्ट को उन्होंने एशिया-प्रशांत के लिए पूर्व कनाडाई (Canadian) राज्य सचिव डेविड किल्गोर (David Kilgour) और कनाडाई मानवाधिकार एटाॅर्नी डेविड मटास (David Matas) के साथ मिलकर लिखा है। 700-पृष्ठ की रिपोर्ट, ब्लडी हार्वेस्ट/ द स्लौटर: एन अपडेट (Bloody Harvest/The Slaughter: An Update), इस बात पर प्रकाश डालती है कि चीन की अंग प्रत्यारोपण की मात्रा आधिकारिक चीनी अनुमानों की तुलना में छः से दस गुना अधिक है।

गुटमन को पत्रकारिता की जांच और एक बेहतर चीन के समर्थन के लिए 2017 नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। उनकी पुस्तक, द स्लौटर (The Slaughter), 2014 में प्रकाशित हुई। पुस्तक में अनेक चिकित्सकों और शल्य चिकित्सकों का वर्णन किया गया है; जिन्होंने या तो चीन में जीवित अंग निकालने में भाग लिया था या जिन्होंने फालुन गोंग (Falun Gong) नामक आध्यात्मिक समूह से अंगों का शोषण करने में लगे चीन के अस्पतालों से संपर्क किया था। उन्हें वॉशिंगटन (Washington), लंदन (London) और ब्रसल्ज़ (Brussels) में गवाही देने के लिए भी आमंत्रित किया गया था, जबकि अमरिकी कांग्रेस और यूरोपीय संसद के प्रस्तावों ने स्पष्ट रूप से चीन द्वारा धार्मिक निष्ठा वाले कैदियों के अंगों के जबरन प्रत्यारोपण की निंदा की थी।

एनटीडी इंडिया: चीन सचमुच एक प्रमुख “अंग प्रत्यारोपण केन्द्र” के रूप में उभरा है। हालांकि, हाल की रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से अधिकांश अंग स्वैच्छिक दाताओं से नहीं हैं। इस तथ्य से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने चीनी कम्यूनिस्ट शासन को अपनी अंग प्रत्यारोपण प्रणाली को पारदर्शी और अनुमार्गणीय योग्य बनाने के लिए दबाव डाला है। इस अंग व्यापार को रोकने के लिए चीन के प्रयासों को आप कैसे देखते हैं?

इथन गुटमन: चीनी चिकित्सा संस्थान पश्चिम को सकारात्मक कहानियां बताना पसंद करता हैः हां, हम कैदियों से अंगों को निकालते थे, अब हम केवल स्वैच्छिक दान का उपयोग करते हैं। हां, हम अब केवल प्रतिवर्ष लगभग 10,000 प्रत्यारोपण करते हैं। हां, अगर आपने कभी चीन में अंगों के लिए निर्दोष लोगों की हत्या के बारे में बातें सुनी हैं, तो वह “अवैध तस्करी” होनी चाहिए।

पश्चिम ऐसी कहानियां सुनना चाहता है। इसका मतलब है, हमें कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है। कोई विवाद नहीं। हमेशा की तरह व्यापार। और फिर भी, चीनी चिकित्सा प्रवक्ता यूरोप में हमें एक बात कहते हैं और चीन के आंतरिक मीडिया में कुछ अलग कहते हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने पश्चिम में वचन दिया था कि वे जनवरी 1, 2015 तक कैदियों के अंगों को निकालना बंद कर देंगे—जबकि कथित रूप से वह एक “स्वैछिक” प्रक्रिया थी। चीनी मीडिया में, उसी प्रवक्ता ने कहा कि मृत्यु पंक्ति वाले कैदी अब स्वेच्छा से अपने अंगों का “दान” कर सकते हैं। यह सुधार एक अर्थ-संबंधी चाल से थोड़ा अधिक था।

इसी प्रकार, यदि आप चीनी अस्पतालों और प्रत्यारोपण केन्द्रों की आंतरिक रिपोर्ट देखते हैं, जैसा कि हमने हाल ही में अपडेट में किया है—680 पृष्ठ जिसमें मृख्य-भूमि चीनी स्त्रोतों का सीधे संदर्भ देने वाले 2000 से अधिक फुटनोट हैंतो आप पाएंगे कि चीन प्रतिवर्ष न्यूनतम  60,000 प्रत्यारोपण कर रहा है। वास्तव में, चीन दुनिया का प्रत्यारोपण में अगुआई करता है। यह रिपोर्ट किसी भी व्यक्ति के गंभीर रूप से जांच के लिए endorganpillaging.org पर उपलब्ध है।

वे सभी अंग कहां से आते हैं? एक छोटा सा हिस्साबहुत छोटास्वैच्छिक अंग दान से आता है। अंगों की विशाल संख्या मृत्यु की पंक्ति वाले कैदियों या राजनीतिक और धार्मिक कैदियों से आती है। यह उत्तरवर्ती समूह है जो हमें विशेष रूप से चिंतित करता है क्योंकि धार्मिक निष्ठा वाले कैदी अपराधी नहीं होते हैं। वे निर्दोष लोग हैं जिन्हें कानूनी रूप से मौत की सजा नहीं दी जा सकतीयहाँ तक की चीन की बेतुकी कानूनी प्रणाली के तहत भी। फिर भी उनका अंगों के लिए सैन्य और नागरिक अस्पतालों में वध हो रहा है। चीन के हर प्रांत में एक प्रमुख केन्द्र है। “अवैध तस्करी”? नहीं। यह राज्य संचालित सामूहिक हत्या है।

एनटीडी इंडिया: यह मुद्दा कहां जा रहा है?

इथन गुटमन: हमारा डेटा 2016 तक जाता है और हमने 2015 में प्रत्यारोपण उद्योग के घट जाने का कोई संकेत नहीं देखा है। इसके बजाए हम निरंतर प्रत्यारोपण केन्द्र निर्माण, शल्य चिकित्सकों को किराए पर लेना, देखते हैं। कुछ समय पहले, चीनी चिकित्सा संस्थान ने घोषणा की कि वे 165 केन्द्रों को 300 केन्द्र करके अपनी प्रत्योरोपण क्षमता को दोगुना करना चाहते हैं। यह है वास्तविक “हमेशा की तरह व्यापार।”

वे अंग कहां से आयेंगे? हाल ही में ह्ययूमन राइट्स वाॅच (Human Rights Watch) रिपोर्ट के अनुसार, चीनी पुलिस इस बात पर खुद की प्रशंसा कर रही है कि उन्होंने उत्तर-पश्चिम चीन के लंबे समय से सताए गए अधिकतर मुस्लिम उइघरों (Uyghurs) के व्यक्तिगत डीनए का ख़ाका तैयार कर लिया है। इसका तात्पार्य है कि लाखों लोगपुरूष, महिलाएं और बच्चेअब ऊतक मिलान और अंग निकालने के लिए संभावित रूप से परिपक्व हैं। संक्षेप में, चीनी शायद सामूहिक हत्या के बाद जिसकी और बढ़ रहे हैं, वह है—और मैं हल्के में इस शब्द का उपयोग नहीं कर रहा हूँ—नरसंहार।

एनटीडी इंडिया: रिपोर्ट के अनुसार, इन अंगों के स्त्रोत राजनैतिक कैदी और धार्मिक निष्ठा वाले कैदी हैं जो कि अधिकतर अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों से संबंध रखते हैं। चीनी अंग प्रत्यारोपण उद्योग विशेष रूप से केवल इन समूहों को लक्षित क्यों कर रहा है?

इथन गुटमन: फालुन गोंग, उइघर, तिब्बती, हाउस क्रिश्चियन (House Christians)चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इन सभी समूहों को राज्य का दुश्मन मानती है। फालुन गोंग अंग विशेष रूप से मूल्यवान होते हैं क्योंकि वे मदिरा नहीं पीते या धूम्रपान नहीं करते।

एनटीडी इंडिया: आपकी राय में, कितने लोग शिकार हुए हैं ?

इथन गुटमन: सबसे बड़ा समूह फालुन गोंग है, और मेरी 2014 की पुस्तक, द स्लौटर, के लिए साक्षात्कारों ने किसी भी समय पर कैद किये हुए फालुन गोंग की एक अनुमानित सीमा को स्थापित किया है: 4,50,000 से 10,00,000 लोग। 2017 में, मैं उस सीमा के निचले हिस्से के साथ जाऊँगा, शायद 250,000 जितना कम। अब उइघर सामने आ रहे हैं: वे 10 से 15 मिलियन तक हैं, और यदि अब चीनी पुलिस के पास उस आबादी के आधे हिस्से का डीनए का नमूना है—तो आप गणना करें। इनमें से प्रत्येक के कम से कम दो या तीन अंग निकाले जा सकते हैं, जैसे कि जिगर, दिल और एक किडनी। यह केवल जल्दी से किया जाना होता है, ऊतक-मिलान प्राप्तकर्ताओं के साथ, उसी स्थान पर।

एनटीडी इंडिया: किसी भी सरकार के लिए यह कैसे संभव है, सिर्फ चीन ही नहीं, कि वे जीवित कैदियों से अंगों को निकाल सकें?

इथन गुटमैन: उनकी हत्या कर दी जाती है, आदेशानुसार, जब वह अभी भी जीवित होते हैं। बहते पानी में ताजे फूलों को तोड़ने की तरह, एक ताज़े अंग के अपने नए मेजबान द्वारा अस्वीकृत होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। सबसे पहला प्रयोगात्मक जीवित-अंग प्रत्यारोपण उत्तर पश्चिम चीन में 1994 में किया गया था। आज, चीन भर में प्रत्यारोपण केन्द्रों में कैदी के अंगों को नियमित रूप से निकाला जाता है, जबकि पीड़ित का दिल अभी भी धड़क रहा होता है और तुरंत प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। तथाकथित “दाता” निश्चित रूप से, इस शल्यक्रिया के बाद बच नहीं पाता।

एनटीडी इंडिया: आप इन मानवाधिकारों के भयानक दुरूपयोगों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किए गए कार्यों को कैसे देखते हैं?

इथन गुटमन: 2016 के प्रारंभ से सभी प्रमुख पश्चिमी प्रेस केन्द्रों ने चीनी अंग निष्कासन का गंभीर कवरेज शुरू किया था, चीनी चिकित्सा संस्थान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में इस मुद्दे को छिपाने के तीन प्रयासों को उलटते हुए। साथ ही, यू. एस. हाउस आॅफ रिप्रेज़ेंटेटिव (U.S. House of Representatives) और यूरोपीय संसद (European Parliament) ने “धार्मिक निष्ठा वाले कैदियों की गैर सहमति से व्यवस्थित, राज्य-स्वीकृत जबरन अंग प्रत्यारोपण की सतत और विश्वसनीय रिपोर्ट्स” पर चिंता व्यक्त कर लगभग समान प्रस्तावों को पारित किया। चार देशों ने प्रभावी रूप से चीन में अंग पर्यटन पर प्रतिबंध लगा दिया है: इज़राइल (Israel), ताइवान (Taiwan), इटली (Italy) और निश्चित रूप से स्पेन (Spain)। और जब मैंने इस वर्ष की शुरूआत में स्पेन का दौरा किया, तो मुझे ऐसे देश में रहने में खुशी हुई जिसके हाथ इस अपराध से मैले नहीं हैं।

समस्या, मेरे परिप्रेक्ष्य में, पश्चिमी चिकित्सा नेतृत्व के कुछ तत्वों में है, विशेष रूप से द ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी (The Transplantation Society)। हालांकि उनके मन शायद सही जगह पर हो सकते हैंमुझे लगता है कि वे चाहते हैं कि चीनी सभी श्रेणियों के कैदियों का जबरन अंग प्रत्यारोपण समाप्त करें, जैसा कि हम चाहते हैंउनके पास चीनी पृष्ठभूमि की समझ नहीं है और मानव अधिकारों के कार्य की और भी कम समझ है। पश्चिमी शल्य चिकित्सक अपने चीनी मेजबानों को खुश करने के लिए और एक महान राष्ट्र के साथ संबंधों के निर्माण के लिए स्पष्ट रूप से उत्सुक हैं। इसलिए चीनी, एक पुरानी माक्र्सवादी अभिव्यक्ति की भांति, उनका “उपयोगी बेवकूफों” (useful idiots) की तरह आंतरिक और बाहरी अधिप्रचार के लिए शोषण करते हैं। फिर भी हमने और कई पश्चिमी चिकित्सकों ने जो खोजा है वह मानवता के खिलाफ एक सतत अपराध है।

चीन का धन और शक्ति कितनी भी प्रलोभी हो, विश्व को इसका सामना करना होगा। यदि अब नहीं, तो मुझे पूरा भरोसा है कि हालिया प्रेस कवरेज ने सुनिश्चित किया है कि चीनऔर पश्चिम की प्रतिक्रिया इतिहासकारों द्वारा जांचे जाएँगे।

एनटीडी इंडिया: 1951 से वेटिकन (Vatican) और पीपल्स रिपब्लिक आॅफ चाइना (People’s Republic of China) में कोई राजनयिक संबंध नहीं रहे हैं। हाल ही में पोप फ्रांसिस (Pope Francis) चीन के साथ संबंध बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं; यह काफी व्यंग्यात्मक बात है क्यों कि साम्यवादी देश अभी भी कैथोलिकों पर अत्याचार कर रहे हैं। इस विषय में आपकी क्या राय है?

इथन गुटमन: वेटिकन की दशकों से चीन के साथ समझौतों पर नज़र रही है। वर्तमान पोपचूंकि वे पूर्व यूरोप से नहीं बल्कि दक्षिण अमेरिका से हैं, जहां चर्च और साम्यवादी सरकारों में व्यवस्थाएं काफी आम हैविशेष रूप से समझौते में दिलचस्पी रखते हैं। चीनी अंग प्रत्यारोपण का वास्तविक इतिहास इस समझौते को बनाने में भारी बाधा है। यही कारण है कि वेटिकन से कुछ लोग न सिर्फ इतिहास को छिपाने के लिए, बल्कि सक्रिय रूप से सच्चाई को दबाने के लिए भी तत्पर हैं। वेटिकन में अन्य लोग कुछ अलग महसूस करते हैंउदाहरण के लिए हांगकांग (Hong Kong) में कई सक्रिय कैथोलिक। मैं प्रार्थना करने वाला व्यक्ति नहीं हूँ, लेकिन अगर मैं होता तो मैं प्रार्थना करता कि वे इस साक्षात्कार को पढ़ें।

एनटीडी इंडियाः 2017 में, वेटिकन की पोंटिफिकल एकेडमी आॅफ साइंस (Pontifical Academy of Sciences) एक चीनी शल्यचिकित्सक को ‘अंग तस्करी और प्रत्यारोपण पर्यटन सम्मेलन’ (Summit on Organ Trafficking and Transplant Tourism) में आमंत्रित करने के पश्चात मुख्य ख़बरों में चर्चा का विषय रही। यह आधिकारिक संकेत कितना उचित था?

इथन गुटमन: आप हुआंग जिफू (Huang Jiefu), एक यकृत प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सक, का जिक्र कर रहे हैं जो चीनी प्रत्यारोपण दुनिया के समारोह-मास्टर के रूप में कार्य करते हैं। उन्हें वेटिकन सम्मेलन में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया थाजबकि मेरे सहयोगी डेविड किल्गोर (David Kilgour) और डेविड मटास (David Matas) को रोका गया था। फिर भी इन सबके परे वेटिकन जानता है कि हुआंग जिफू के हाथ खून से रंगे हैं। एक सम्मानित न्यूयाॅर्क टाइम्स (New York Times) संवाददाता दीदी कस्टर्न टैटलो (Didi Kirsten Tatlow) का केवल एक लेख बहुत था, यह पूछने के लिए कि आखिर पोप की पहले से निर्धारित उपस्थिति को रद्द कर चीनियों को इस सम्मेलन में आमंत्रित क्यों किया गया? यह चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के लिए एक अपमानजनक असफलता थी—और वेटिकन के उन लोगों के लिए जो उनका समर्थन करते हैं।

एनटीडी इंडिया: आप कैथोलिक पैट्रिओटिक एसोसिएशन (Catholic Patriotic Association), चीनी शासन द्वारा 1957 में स्थापित क्या गया एक संगठन, और पीड़ित कैथोलिक  ईसाईयों  के संबंध को कैसे देखते हैं?

इथन गुटमन: कोई भी चीनी कैथेलिक जो राज्य-संचालित चर्च के साथ कार्य नहीं करता उसे विरोधी, एक “हाउस क्रिश्चियन”, माना जाता है। मैंने अपनी पुस्तक में उल्लेखित किया है कि चीनी सैन्य चिकित्सकों ने श्रमिक शिविरों में हाउस क्रिश्चियन के शारीरिक परीक्षण किये हैं जो विशेष रूप से उनके बिक्री करने लायक अंगों की जांच करते हैं: गुर्दे, यकृत, दिल, फेफड़े और काॅर्निया। यह खोज प्रकाशित है, पूर्व-समीक्षित है और साक्षात्कार टेप वेटिकन के लिए उपलब्ध हैं। यह छुपाने से कि ऐसा नहीं हुआ से कुछ अच्छा नहीं होगा। ऐसा हुआ है। और यह खोज चीन के साथ किसी भी प्रस्तावित समझौते में वेटिकन की चिंता का सबसे पेहला मुद्दा होना चाहिए।

एनटीडी इंडिया: आपने अभूतपूर्व रिपोर्ट और अपनी पुस्तक “द स्लौटर” में बहुत समय और प्रयास निवेशित किया है। जांच के आप पर हुए प्रभाव और समग्र शोध अनुभव को आप कैसे सारांश करेंगे?

इथन गुटमन: कोई भी मृतकों का साक्षात्कार नहीं कर सकता। लेकिन जीवित बचे हुए लोगों के साथ मेरे साक्षात्कार ने यह सथापित किया कि चीन के श्रमिक शिविरों और सैन्य अस्पतालों में गायब होने वाले और फिर कभी नहीं दिखने वाले प्रियजनों के खो जाने से संपूर्ण परिवार बिखर जाते हैं। मेरी यहूदी पृष्ठभूमि है। चिकित्सकों को सामूहिक हत्या के माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर इतिहास को दोहराते हुये देखने का दर्द? मैं इसे पचा नहीं सकता।

मैंने उत्तरजीवियों से वादा किया है कि मैं उनकी कहानी दुनिया को बताऊँगा; यही कारण है कि मैंने एक दशक से इस मुद्दे पर कार्य किया है। पिछले वर्ष से, पहली बार—आपके साथ आज इस साक्षात्कार में दुवारा भी—मुझे लगता है कि मैं आखिरकार वह वादा निभा पा रहा हूँ।

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