प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि “न्यू इंडिया” (नया भारत) का उदय निवेशकों के लिए अनुकूल, दुनिया में कम जोखिम वाली राजनीतिक अर्थव्यवस्थाओं और उसके प्रमुख सुधारों के साथ देश दुनिया भर के निवेशकों को “विशाल अप्रयुक्त संभावना” प्रदान कर रहा है।

 

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मोदी ने एशियाई इंफ्रास्ट्रक्च र इंवेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की तीसरी वार्षिक बैठक में कहा, न्यू इंडिया उभर रहा है। यह एक ऐसा भारत है जो ज्ञान अर्थव्यवस्था, समग्र विकास और डिजिटल आधारभूत संरचना के साथ सभी के लिए आर्थिक अवसर प्रदान करने के स्तंभ पर खड़ा है।

मोदी ने भारत को विकास, मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता, राजनीतिक स्थिरता, बड़े घरेलू बाजार के आकार, कुशल श्रम की उपलब्धता और निवेश के अनुकूल वाले नियामक ढांचे के साथ सबसे अधिक निवेशक के अनुकूल देशों में से एक करार दिया।

उन्होंने कहा, इन मानकों में से हर एक पर भारत ने अच्छी तरह से खुद को स्थापित और बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है .. एक विदेशी निवेशक की ओर से भारत को बहुत कम जोखिम वाली राजनीतिक अर्थव्यवस्था के रूप में गिना जाता है .. हमने व्यवसायों के लिए नियमों और विनियमों को सरल बना दिया है और उसमें प्रमुख सुधार किए हैं।

‘बुनियादी ढांचे के लिए वित्त संगठन: अभिनव व सहयोग’ की थीम वाली बैठक में मोदी ने बोलते हुए निवेश बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सूचीबद्ध किया और साथ ही संसाधन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एआईआईबी से अपनी अकांक्षाओं को जाहिर किया।

मोदी ने कहा, एआईआईबी जैसे संस्थानों के माध्यम से क्षेत्रीय बहु-पाश्र्वी संसाधनों को बढ़ाने में मदद कर प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं.. एक छोटी अवधि में, एआईबीबी ने कुल चार अरब डॉलर से ज्यादा वित्तपोषण के साथ एक दर्जन देशों में 25 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह एक अच्छी शुरुआत है।

उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के फंडों का आसान प्रसंस्करण, शीघ्र मंजूरी, किफायती और निम्न ब्याज दरों की आवश्यकता है। एआईबीबी ने जनवरी 2016 में अपने वित्तपोषण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसमें 87 सदस्य देश शामिल हैं और इसका 100 अरब डॉलर का प्रतिबद्ध पूंजी स्टॉक है।

मोदी ने कहा, भारत के आर्थिक पुनरुत्थान की कहानी एशिया के कई अन्य हिस्सों को बारीकी से प्रतिबिंबित करती है। महाद्वीप खुद को वैश्विक आर्थिक गतिविधि के केंद्र में पाता है और दुनिया का विकास इंजन बन गया है। वास्तव में हम उस दौर में रह रहे हैं, जिसे कई लोग इस सदी को एशिया की सदी बताते हैं।

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