वित्त मामलों पर बनी संसद की स्थाई समिति ने सोमवार को बैंकों से कहा कि वे गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (फंसे हुए कर्जो या एनपीए) से निपटने के लिए एक कार्ययोजना तैयार करें तथा फंसे कर्जों को पुनर्परिभाषित करें और उसका वर्गीकरण करें।

संसदीय समिति के सदस्यों ने यहां एक बैठक में बैंक अधिकारियों और इंडियन बैंक एसोशिएसन के शीर्ष अधिकारियों से ‘बैंक घोटालों’ पर जवाब मांगा, जिसमें आभूषण कारोबारी नीरव मोदी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक में किया गया अरबों रूपये का घोटाला भी है।

इस बैठक के एक हफ्ते बाद भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जिट पटेल को भी बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने के लिए समिति के समक्ष पेश होना है, जिसमें एनपीए या तनावग्रस्त परिसंपत्तियों का मामला भी शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि संसदीय समिति के सदस्यों ने बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों से धोखाधड़ी रोकने के लिए क्या बदलाव करने चाहिए इस बारे में पूछा तथा उनके सामने आनेवाली चुनौतियों के बारे में पूछा।

इस बैठक में शामिल होनेवालों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अध्यक्ष रजनीश कुमार और पंजाब नेशनल बैंक के अध्यक्ष सुनील मेहता भी थे।

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