जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीनी वस्तुओं पर US$ 50 बिलियन का प्रशुल्क लगाने का प्रस्ताव पारित किया तब कुछ लोग भयभीत हो गए कि ट्रम्प के इस कदम की परणिति बिजिंग के साथ व्यापर युद्ध होगा।

चीन द्वारा प्रतिक्रियास्वरुप अमेरिकी वस्तुओं पर प्रशुल्क लगाने की घोषणा से यह भय आंशिक रुप से सुनिश्चित हो गया था लेकिन “जैसे को तैसा” वाली स्थिति ट्रम्प के समझौता की रणनीति का हिस्सा मात्र है। हेरिटज फाउंडेशन (Heritage Foundation) के एक विशिष्ट परिभ्रामी विद्वान एवं सीएनएन (CNN) के आर्थिक विश्लेषक स्टेफेन मूर (Stephen Moore) के अनुसार यह स्पष्ट है कि दीर्घकालिक व्यापार युद्ध से चीन को अधिक क्षति होगी क्योंकि वो अमेरिका के व्यापक बाज़ार पर निर्भर करता है।

मूर ने एपोक टाइम्स (Epoch Times) को बताया कि “आपको इस बात को समझना होगा कि डॉनल्ड ट्रम्प के सार्वाधिक बिकने वाली पुस्तक का नाम “द आर्ट ऑफ द डिल” (The Art of the Deal) है और वे एक व्यापारी है। इसलिए वे संयुक्त राज्य के लिए चीन से एक श्रेष्ठ व्यापारिक समझौता करना चाहते हैं।”

मूर ट्रम्प की स्थिति को दो प्रकार से देख रहे हैं। एक दृष्टिकोण से, प्रशुल्क व्यापारिक समझौते का एक उपाय है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति अभी तक पीछे नहीं हटे हैं और इस जानकारी के साथ कि यदि दोनों देश प्रशुल्क विवाद को बनाए रखते हैं तो चीन को अधिक हानि उठानी पड़ेगी, वे अपने स्थान पर बने हुए हैं।

अब तक, ट्रम्प प्रशासन ने सिर्फ प्रशुल्क का एक अनुमान प्रस्तावित किया है और यह अभी भी टिप्पणियों के दौर से गुजर रहा है। चीन ने प्रतिक्रिया स्वरुप प्रशुल्क के दो अनुमान बताए हैं और दोनों अभी प्रस्ताव के चरण पर है।

मूर ने कहा, “तब ट्रम्प कहेंगे कि अमेरिका चीन पर और प्रशुल्क लगाने जा रहा है। ‘जैसे को तैसा’ वाला व्यवहार दोनों देशों के लिए ठीक नहीं है, लेकिन यह चीन के लिए अधिक नुकसानदायक है क्योंकि इसके बाद चीन वास्तव में अपने विकास के लिए अमेरिका के बाज़ार का प्रयोग नहीं कर पाएगा।”

मूर ने कहा कि दोनों देशों के लिए एक आदर्श स्थिति यह होगी कि दोनों साथ बैठकर व्यापरिक समझौता करें। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि बहुत सारे अमेरिकी, जो ट्रम्प की चीन के साथ समझौता करने की नीति का समर्थन कर रहे हैं, वो एक अल्पकालिक आर्थिक झटका लेने के लिए तैयार हैं।

मूर ने कहा, “मैं सोचता हूँ कि मैं स्वयं एवं अन्य अमेरिकी डॉनल्ड ट्रम्प जो कर रहे हैं उसके समर्थन में हैं। मैं सोचता हूँ कि बिजिंग शायद चीन के साथ एक श्रेष्ठ समझौता करने के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता को कम आँक रहा है। और इसलिए मैं यह आशा करता हूँ कि चीन में विशेषज्ञ एवं व्यापार प्रतिनिधि इस बात को समझें कि अमेरिकी वस्तुओं पर अधिक प्रशुल्क स्थिति चीन के पक्ष को और विषम करेगा, न कि मजबूत।”

ट्रम्प ने चीन के साथ व्यापर युद्ध की व्याख्या एक ऐसी घटना के रुप में की है जो अमेरिका के साथ दशकों से होता आ रहा है और जिसमें अमेरिका ने बहुत क्षति उठाई है। राष्ट्रपति बढ़ते हुए व्यापार घाटे एवं उन प्रतिबंधों जिनका सामना, अमेरिकी व्यापार अपने वस्तुओं को चीन  के बाज़ार में लाने में करेगा, के प्रति चिंतित है। शुल्कों को लागू करने में, ट्रम्प ने चीनी कंपनियों द्वारा बौद्धिक संपदा चोरी का भी उल्लेख किया।

” ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि हम लोग उस स्थिति के साथ नहीं जी सकते हैं जहाँ अमेरिका को बौद्धिक सम्पदा के लिए पूरी क्षतिपूर्ति न मिल रही हो। यह भी एक बड़ा मुद्दा है कि चीन अमेरिकी वस्तुओं को अपने बाज़ार से दूर रखने के लिए गैर-प्रशुल्क प्रतिबंधों का प्रयोग कर रहा है। मूर ने कहा, “इसलिए यह समान स्तर का युद्ध नहीं है। और मैं सोचता हूँ कि ट्रम्प का यह भी मनना है कि चीन का अमेरिका से अधिक नुकसान होगा। चीन अपनी वस्तुओं एवं सेवाओं को बेचने के लिए सच में, अमेरिका के US$10 ट्रिलियन के बाज़ार पर निर्भर करता है।”

Published with permission from The Epoch Times.

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