चीन के वैज्ञानिकों ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण स्थल के नष्ट होने की पुष्टि की

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पैदल यात्री सितंबर 3, 2017 को टोक्यो, जापान में उत्तरी कोरिया के परमाणु परीक्षण पर एक समाचार कार्यक्रम प्रसारित करने वाली एक टेलीविजन स्क्रीन से आगे से गुज़रते हैं। (Toshifumi Kitamura/AFP/Getty Images)

इस समाचार से रेडियो सक्रिय पदार्थे के रिसाव एवं चीन के उत्तरी-पूर्वी भाग में, जहाँ कि उत्तर कोरिया की सीमा के समीप लाखों लोग रहते हैं, प्रभाव की संभावना प्रकट होती है।

उत्तर कोरिया सरकार द्वारा हाल ही में परीक्षण को  निलंबित करने एवं पुंगये-रि (Punggye-ri) स्थित परीक्षण स्थल को बंद करने की उदघोषणा की है, जिसके कारण यह प्रश्न भी उठता है कि क्या सरकार ने ऐसा निश्चय परीक्षण स्थल के अनुपयोगी हो जाने के बाद लिया है।

अप्रैल 23 को, चीन के युनिवर्सिटि ऑफ साइंस ऐण्ड टेक्नॉलजी (University of Science and Technology) के एक भूभौतिकविद वेन लिआंजिंग (Wen Lianxing) के नेतृतव में गठित एक रिसर्च टीम ने विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। उन लोगों नें ऐतिहासिक भूकम्पीय आँकड़ों का विश्लेषण किया और यह निर्धारित किया कि पुंगये-रि के पारीक्षण स्थल मनताप माउंटेन (Mantap Mountain), जिसका प्रयोग उत्तर कोरिया 2009 से करता आ रहा है, नष्ट हो चुका है। बम के लगातार परीक्षणों ने इसे अस्थिर कर दिया था।

सितम्बर 3 को, उत्तर कोरिया ने अपने छँठे एवं सार्वाधिक शक्तिशाली बम का परीक्षण किया। इस परीक्षण में हुए बम विस्फोट के कारण विस्फोट के बाद, 6.3 मैग्निट्युड का भूकम्प आया ।

जापान के मौसमविज्ञान संबंधी अभिकर के अधिकारी तोशियुकि मात्सूमोरि (Toshiyuki Matsumori) सितम्बर 3, 2017 को अभिकरण के टोकियो, जापान स्थित मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के बाद हुए भूकम्पीय घटनाओं को दर्शानेवाले एक चार्ट का प्रदर्शन करते हुए।.(Kazuhiro Nogi/AFP/Getty Images)

इसके बाद सितम्बर 23 एवं अक्टूबर 12 को वहाँ कई भूकम्पीय घटनाएँ घटी। उस समय विशेषज्ञों, जिनमें जॉन हॉप्किंस (John Hopkins) विश्वविद्यालय में स्थित संयुक्त राज्य-कोरिया इंस्टिट्युट भी शामिल हैं, ने चेतावनी दी थी कि शायद,सितम्बर 3 के परीक्षण ने इस स्थान को अत्यधिक स्थायी नुकसान पहुँचाया है, लेकिन भूकम्पीय घटनाओं के स्वरुप को सुनिश्चित नहीं कर पाए थे।

वेन एवं उनके शोधार्थियों ने यह निश्चित किया कि सितम्बर 3 को हुए बम विस्फोट ने विस्फोट के स्थान के उत्तर-पश्चिम में 440 मीटर (लगभग 1443 फीट) दूर तक एक गड्ढे का निर्माण किया जिससे क्रमिक भूकम्प हुए।

शोधकर्ताओं की घोषणा के अनुसार, “हमें इस विनाश के कारण होनेवाले रेडियो सक्रिय पदार्थों के रिसाव की संभावना का निरीक्षण ज़ारी रखना होगा।”

वैज्ञानिकों ने अप्रैल 25 को साउथ चीन मॉर्निंग पोस्ट (South China Morning Post) को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि सितम्बर 3 के बम विस्फोट ने आसपास के चचट्टानों को वाष्पीकृत कर दिया है एवं लगभग 200 मीटर (लगभग 656 फीट) व्यास वाला एक स्थान खुला कर दिया है। पर्वतों में हुए ऐसे दरारों से रेडियो सक्रिय पदार्थ का रिसाव हो सकता है।

नेशनल अर्थक्वेक एवं वोलकानो सेंटर के निदेशक ली मि-सेओन (Lee Mi-Seon) दक्षिण कोरिया के Korea Meteorological Administration, सोल (Seoul), दक्षिण कोरिया में सितम्बर 3, 2017 को उत्तर कोरियाई स्थानों का मानचित्र दिखाते हुए।. (Jung Yeon-Je/AFP/Getty Images)

एकेडमिक जरनल “जिओफिजिकल रिसर्च लेटर्स” (Geophysical Research Letters) में पिछले महीने प्रकाशित एक शोध पत्र में भी यही निष्कर्ष दिया गया है। पत्र के अनुसार, “विस्फोट ने एक गड्ढे एवं उसके ऊपर क्षतिग्रस्त पत्थरों के  ‘चिमनी’ का निर्माण किया है।” ऐसा पहली बार हुआ है जब परीक्षण स्थल पर किसी चट्टान के क्षतिग्रस्त होने की बात लिखी गई है।

वेन एवं उनके शोधार्थियों द्वारा प्राप्त परिणामों को “जिओफिजिकल रिसर्च लेटर्स” की आगामी अंक में प्रकाशित किया जाएगा।

पिछले वर्ष जब विशेषज्ञों को पुंगये-रि स्थल के आसपास के भूमिगत सुरंगों ढल जाने की चिंता हुई वे इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि नाभिकीय रिसाव की संभावना हो सकती है ।

टेलिग्राफ के एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पर्माणु कार्यक्रम में काम कर चुके एक विशेषज्ञ, वेइ शिज़ी (Wei Shijie) ने कहा कि उस समय नाभिकीय रिसाव “अनिवार्य था”  चाहे विनाश हुआ हो या नहीं ।

मनटाप माउंटेन के नष्ट होने की खबर की हाल में हुई पुष्टि सिर्फ इस संभावना को बढ़ाती है।

इपोक टाइम्स (Epoch Times) की अनुमति से प्रकाशित

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