सूखे से त्रस्त बीते कुछ सालों तक, चीन की राजधानी बीजिंग में पीने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को करीब 1,432 की दूरी से लाया जाता है। इकॉनमिस्ट की खबर अनुसार, इसकी यात्रा मध्य चीन के सुदूर और पहाड़ी क्षेत्र  (Danjiangkou) जलाशय से शुरु होती है, जिसके नीचे डूबा हुआ शहर जुनझोऊ (Junzhou) है, जो ताओइस्म (Taoism) के जन्म स्थान के लिए प्रसिद्ध है।

Credit: Economist

पाइपलाइन और नहर के माध्यम से पानी उत्तर की तरफ बढ़ा, येलो नदी को एक सुरंग के माध्यम से पार करते हुए करीब 18 दिनों में बीजिंग स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंचता है । शहर के दो तिहाई नलों और यहां होने वाली आपूर्ति का एक तिहाई हिस्सा दानजियांगकोऊ से आता है।

इकॉनमिस्ट की खबर अनुसार, इस सर्दी और बसंत ऋृतु में यह जलाशय ही राजधानी के जल का मुख्य संसाधन था। बीजिंग में अक्टूबर 23 से मार्च 17 तक बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई थी—जो रिकॉर्डानुसार अबतक का सबसे लंबा सूखा था। फिर भी पश्चिमी प्रांत के शांझी (Shanxi) की तरह शहर में पानी पहुंचने में कोई रुकावट नहीं आई, जहां स्थानीय सरकारों ने पानी का आदान-प्रदान किया।

दक्षिण से उत्तर की तरफ पानी को मोड़ने की परियोजना दुनिया की सबसे कीमती इंफ्रास्ट्रक्चर उद्यम(expensive infrastructure enterprise) है। दो नदियों की घाटियों में पानी स्थानंतरण की यह परियोजना इतिहास की सबसे अधिक पानी स्थानंतरण योजना है, और चीन का मुख्य मकसद वातावरण की समस्या से लड़ना है, जो कि पानी की किल्लत है।

China south-north water project
Credit: thegurdian

देश का चार बटा पांच पानी का हिस्सा देश के दक्षिण में है, जहां आधी आबादी रहती है। लेकिन उत्तर में 11 प्रांत ऐसे हैं, जहां प्रति व्यक्ति 100 क्यूबिक मीटर से भी कम पानी है, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पानी की किल्लत के रुप में दर्ज किया गया। इनमें से आठ के पास तो मात्र आधा हिस्सा ही है। सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में चीन के पांच सर्वाधिक खेती वाले क्षेत्र हैं। देश की 45 प्रतिशत जीडीपी में उनका योगदान है और देश की आधी ऊर्जा यहीं से उत्पन्न होती है।

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