बात जब ताल-तलैयों की आती है, तो लोगों के जेहन मे सबसे पहला नाम तालों के शहर “नैनीताल” का आता है। सुर्ख मौसम में शीतलता प्राप्त  करने के लिए लोग अक्सर इस शहर की तरफ रुख कर लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं? नैनीताल के अलावा उत्तर प्रदेश में भी कई ऐसे शहर हैं, जहां स्थित ताल अपनी सुंदरता और सुहावने वातावरण से हर शाम लोगों को अपने तट पर खींच लाते हैं।

अतीत की कहानियों को अपनी गहराइयों में सहेजे ये ताल, शहर की सुंदरता तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही चिलचिलाती धूप वाले मौसम में शहरवासियों को राहत भी पहुंचाते हैं। तो चलिए हम इस लेख के माध्यम से इन तालों की शीतलता को महसूस करते हैं और उसकी गहराइयों में जाकर अतीत की कहानियों को भी टटोलते हैं…

1. रामगढ़ ताल (गोरखपुर, पूर्वी उत्तर प्रदेश)!

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शहर की सुंदरता में चार चांद लगाने वाला यह ताल मात्र एक ताल नहीं है, बल्कि अपनी गहराइयों में कई कहानियों को छुपाए एक इतिहास है। करीब 1700 एकड़ में फैले इस ताल के बारे में कहा जाता है कि किसी जमाने में यही गोरखपुर शहर हुआ करता था। आज के दौर में इस ताल के आस-पास आपको गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए कई स्थान मिल जाएंगे। यूं तो इसके तट पर आपको हमेशा मन को तरोताज़ा कर देने वाली शीतल हवाएं बहती मिल जाएंगी, लेकिन यदि आप शीतलता के साथ रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं, तो ताल के पश्चिम में स्थित नीर निकुंज वाटर पार्क में भी जा सकते हैं। इसके अलावा चंपा देवी पार्क, बौद्ध संग्रहालय, तारा मंडल आदि जैसी चीज़ें हैं, जहां आपका दिन आसानी से कट सकता है।

क्या है दंत कथाएं?

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बात यदि इस ताल के अतीत की करें तो इस संबंध में कई प्रकार की दंत कथाएं प्रचलित है, जिनमें से एक के अनुसार किसी जमाने में रामगढ़ और रुद्रपुर के राजाओं के बीच कभी काफी घनिष्ठता थी। लेकिन, पास के ही जंगल में नवनिर्मित शिव मंदिर में दोनों के बीच विवाद हो गया, जिससे आक्रोशित रामगढ़ के राजा ने मंदिर को ध्वस्त करा दिया। कहते हैं कि यह सब करने के बाद रामगढ़ के राजा जब अपने राज्य पहुंचे तो उनका पूरा राज्य जलमग्न हो चुका था, जिसे आज का रामगढ़ ताल कहते हैं।

कैसे  पहुंचे?

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रामगढ़ ताल गोरखपुर रेलवे और रेलवे बस स्टैंड से करीब 3 किमी की दूरी पर स्थित है, यहां के लिए आपको मोहद्दीपुर, यूनिवर्सिटी चौक, रेलवे स्टेशन से भी आसानी से ऑटो मिल जाएंगे।

2. मोती झील (कानपुर, उत्तर प्रदेश)

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उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कानपुर की यह झील कानपुर वासियों के लिए सच में किसी मोती से कम नहीं है। शहर की व्यस्तम दिनचर्या और गर्मी से राहत पाने के लिए लोग यहां जरुर आते हैं, जहां आप शांतचित होकर स्थिर जल से आती शीतल हवाओं के साथ अपने मन को भी स्थिर कर सकते हैं। वैसे हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने कानपुर में तितली पार्क का भी शुभारंभ किया है, जहां आप अपने मन के साथ-साथ बचपन की भूली बिसरी यादों को भी तरोताज़ा कर सकते हैं। इस झील में प्रवासी पक्षियों का भी आना जाना लगा रहता है।

अंग्रेज़ों ने बनवाई थी ये झील!

यह खूबसूरत झील ब्रिटिश शासनकाल में बनाई गई थी। कहते हैं कि अंग्रेज़ों ने इस झील का निर्माण पीने के पानी के स्त्रोत के रूप में किया गया था। बाद में इसके पास बच्चों का पार्क और कलात्मक रूप से उद्यान बनाया गया, जिस कारण यह पार्क शहर के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक बन गया।

कैसे पहुंचे?

मोतीझील पहुंचने के लिए आपको कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन, घंटा घर आदि स्थानों से भी ऑटो मिल जाएंगे। इसके अलावा सिटी बस के माध्यमस से भी आप मोती झील तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

3. शुक्रताल (मुज़्ज़फरनगर, उत्तर प्रदेश)!

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गंगा तट पर बसा शुक्रताल प्राचीन पवित्र स्थल है, जिसका संबंध महाभारत काल से है। अपनी धार्मिक महत्ता की वजह से यह स्थान पर्यटन का मुख्य केंद्र भी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने के लिए यहां का शीतल वातावरण बेहद उपयुक्त है। गंगा और शुक्रताल के शीतल जल को छूकर आती ठंडी हवाएं, शररीर को तो राहत पहुंचाती ही हैं, यहां स्थित धार्मिक स्थान मन को भी शांति प्रदान करते हैं।

क्या है मान्यता?

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मान्यता है कि “राजा परीक्षित” को श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए “श्री शुक मुनि” ने “अक्षय वट” के नीचे बैठकर 88 हज़ार ऋषि-मुनियों के साथ मिलकर श्रीमदभागवत कथा सुनाई थी। पौराणिक मान्यता है कि इस वट के पत्ते पतझड़ के दौरान भी सूखकर नहीं गिरते। करीब छः हज़ार साल पुराना यह वृक्ष आज भी अपनी युवावस्था में है। इस वट के नीचे एक सुखदेव मंदिर बनाया गया है।

कैसे पहुंचे?

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शुक्रताल आप सड़क और रेल दोनों मार्गों से पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी रेलवे और बस स्टेशन मुज़्जफरनगर है। जहां से आपको शुक्रताल जाने के लिए संसाधन मिल जाएंगे।

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