अलीगढ़ (Aligarh) में लगभग दो वर्ष पहले एक बच्ची का जन्म हाथी की सूंढ़ के साथ हुआ। कल्पना करना मुश्किल है कि इसके बावजूद यह बच्ची एक सेलेब्रिटी बन गई थी। लेकिन उसकी इस विकृति का कारण कुपोषण और प्रदूषण था। कहा गया कि भारी प्रदूषण के कारण उसकी जीन में परिवर्तन आ गई और उसने विकृति का रूप ले लिया।

भारत के गाँव और छोटे शहर पहले हरे-भरे थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। गाँवों में पानी के कई स्रोत अब दूषित हो चुके हैं। कुछ क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन की कमी और उपनगरों में उद्योगों में आई तेजी के कारण भूजल और वायु प्रदूषित हो चुकी है। जीन में इस तरह का परिवर्तन आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह घटना उस वक़्त संज्ञान में आया जब इस बच्ची के जन्म के बाद लोगों ने इसे भगवान मान लिया और जिसको लेकर उसके घर पर लोगों का ताँता लग गया। कुछ ही देर में वो प्रसिद्ध हो गई। लेकिन क्या यह वास्तव में हमारे बच्चों पर प्रदूषण के प्रभाव का गंभीर मुद्दा है?

Credit: Youtube screenshot

डॉक्टरों को इस बच्ची के ज़िन्दा रहने पर आशंका हो रही थी, क्योंकि इन मामलों में मृत्यु दर अधिक है। जीवन अस्पताल (Jeevan Hospital) के डॉ. जयंत शर्मा (Jayant Sharma) ने Times of India से कहा कि, “कुछ दिनों पहले एक बच्चे का जन्म सूंढ़ के साथ हुआ था। दुर्भाग्यवश वो ज़िन्दा नहीं बच सका। लेकिन यदि यह बच्ची बच जाती है तो फिर परिवार वालों को इसे ठीक करने के लिए इसकी सर्जरी करवानी होगी।”

घर पर लोगों की बढ़ रही भीड़ को काबू करने के लिए घर वालों ने लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (Local Intelligence Unit) की मदद ली। एलआईयू (LIU) के एक अॉफिसर ने कहा, “घर छोटा था और नवजात बच्चे के कमरे में जाने के लिए सिर्फ एक सीढ़ी थी। हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि लोग एक ही समय में वहां भीड़ न लगाएं।”

हमारे पास बच्चे की वर्तमान स्थिती की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हमें आशा है कि यह कहानी हमें सामूहिक रूप से प्रदूषण मुक्ति की ओर अग्रसर करेगी। आखिरकार, यह हमारे बच्चे और पर्यावरण का सवाल है।

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