सरकारी कार्यालय हमेशा अपने काम को पूरा करवाने में व्यस्त लोगों से भरे रहते हैं. कोइल, अलीगढ़ में तहसील कार्यालय भी ऐसा ही है, लेकिन इसमें वो अलग बात है वह है सुबह सुबह इसकी चारदीवारी के भीतर होने वाला काम. यह आपको जरूर हैरान कर देगा!

Source: Facebook| UPSC [union Public Service Commission]

ये सरकारी अधिकारी जल्दी आते हैं और शिक्षक बन जाते हैं तथा 250 से अधिक छात्रों को मुफ्त कोचिंग और आवास प्रदान करते हैं. इस कार्यालय का मीटिंग हॉल शिक्षा के  जीवंत कक्ष में बदल जाता है, जो क्षेत्र के विभिन्न जिलों के सिविल सेवा छात्रों की इच्छाओं और सपनों को प्रोत्साहित करता है.

कोइल के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा, ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) को बताया :

“इस पहल के पीछे का विचार कमजोर वर्गों के छात्रों को कोचिंग प्रदान करना है, क्योंकि वे निजी कोचिंग संस्थानों का खर्चा नहीं उठा सकते हैं.”

बिहार के Bihar’s Super 30 कार्यक्रम (जहां गरीब लेकिन गुणी छात्रों को यूपी एस सी (UPSC) परीक्षा पास करने के लिए मुफ्त कोचिंग और आवास व्यवस्था प्रदान की जाती है) से प्रेरित होकर सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट का मानना है कि कार्यालय के संयुक्त प्रयास हर छात्र को अपने सपनों को हासिल करने में मदद कर सकते हैं. आर्थिक कारण किसी भी छात्र की शिक्षा को रोकने की वजह नहीं होना चाहिए.

अधिकारी इस बात पर इतना विश्वास करते हैं कि उन्होंने सरकारी अतिथिगृह को भी बाहरी छात्रों और स्थानीय अधिकारियों के लिए छात्रावास में रूपांतरित कर दिया. सभी शीर्ष अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं कि उनके छात्र अपनी गति से सीखें ताकि वे पाठ्यक्रम के सार को अपने में अवशोषित कर सकें; ना कि रटकर.

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एस डी एम (सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट) पंकज वर्मा ने कहा, “हम मात्र पिछले शैक्षणिक परिणामों को ही नहीं देखते हैं, क्योंकि सिविल सेवाओं की परीक्षा में सफलता के लिए समर्पण और प्रतिबद्धता की अधिक आवश्यकता होती है.”

प्रारंभिक परीक्षा 18 जून को हुई थी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनका काम खत्म हो गया है. अपने 250 इच्छुक छात्रों के लिए पूरा कार्यालय लगा हुआ है, और छात्र उत्सुकता से परिणाम का इंतजार कर रहे हैं. साथ ही वो कोई समय बर्बाद नहीं करके इंटरव्यू की गंभीर श्रृंखला की तैयारी कर रहे हैं.

विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ाने वाले राजकुमार गुप्ता, जो एक नायब तहसीलदार हैं, ने कहा, “जब मैं पढ़ रहा था, मुझे बहुत सी समस्याएं आई और मेरी मदद करने के लिए कोई भी नहीं था. हम यहाँ उन्हें उचित मार्गदर्शन देते हैं.”

उचित मार्गदर्शन इसलिए है क्योंकि छात्र भी उस भाव से सहमत हैं. बुलंदशहर के एक छात्र रमेश कुमार गौतम (23 वर्ष) ने कहा, “किसी निजी कोचिंग सेंटर के पास ऐसे साबित ट्रैक रिकॉर्ड वाले काबिल शिक्षक नहीं हैं.”

अपने रोज़गार की कठिनाइयों के बावजूद, सभी अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं और इसने यह साबित कर दिया है कि प्रयास वास्तव में पुरस्कार देते हैं. पटना के सुपर 30 (Patna’s Super 30) को याद करें जहाँ हर एक छात्र सफल हुआ.

हाँ, यह प्रेरणादायक है.

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