स्वतंत्रता सेनानी कृष्णाममल जगन्नाथन, जो अब 90 के दशक की उम्र में है, अभी भी लोगों को अपनी खुदकी जमीन प्राप्त करने में मदद कर रही है! लोहे जैसी मज़बूत इच्छा शक्ति रखने वाली इस महिला ने सत्याग्रह के साथ अपनी जीवन यात्रा शुरू की थी, और 21 वीं शताब्दी में भी “लैंड फॉर टिलर्स फ्रीडम (LAFTI)” जैसी गतिविधियों के साथ एक सक्रिय भूमिका निभा रही है.

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1926 में तमिलनाडु में एक निचले सामाजिक स्तर पर पैदा हुए, उन्होंने अपनी मां को गर्भावस्था के एक आखिरी महीनों के दौरान भी काम करते हुए देखा था. समाज की कठोर वास्तविकताएं कृष्णाममल से छिपी नहीं थीं. परिवार के कठिन आर्थिक स्थिति के बावजूद, उन्होंने अपनी विश्वविद्यालय की डिग्री प्राप्त की. यह कॉलेज में था कि वह गांधीवादी सर्वोदय आंदोलन से प्रेरित हुई जहां वह श्री शंकरलिंगम से मिली. दोनों काफी अलग-अलग परिवार की पृष्ठभूमि से आए थे. इन सब के बावजूद वे प्यार में पड़ गए. लेकिन इस जोड़े ने स्वतंत्र भारत में ही शादी करने का फैसला किया.

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1950 में, उनका विवाह हुआ, लेकिन देश के लिए कुछ करने का विचार अभी भी उन पर छाया था. दोनों ने विनोदा भावे के साथ हाथ मिला लिया और जमींदारों से अपनी जमीन का 1/6 हिस्सा गरीबों को देने का अनुरोध किया. 1953 और 1967 के बीच 16 मिलियन एकड़ जमीन का वितरण हुआ.

कृष्णाममल अब शंकरलिंगम के निधन के बाद LAFTI स्वयं ही चलती हैं. वह 13,000 एकड़ जमीन 13,000 परिवारों को स्थानांतरित करने में सक्षम रही है.

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बड़े शहरों के दरिया किनारे पर झींगे की खेती को रोकने के लिए वह बड़े कंपनियों के खिलाफ खड़ी हो गईं थी. खेती के कारण पानी दूषित हो गया था और मिट्टी को बंजर बना दिया था. इस विरोध के परिणामस्वरूप LAFTI स्वयंसेवकों को कंपनियों के नियुक्त किये गए गुंडों द्वारा पीटा गया. हालांकि, कृष्णाममल झुकनेवालों में से नहीं थी. वह इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले गयी.

उन्होंने ग्रामीण भारत के विकास के अपने लक्ष्य के प्रति सच्चा धैर्य और जुनून दिखाया है. हम देश की भलाई के लिए उनके प्रयासों को सलाम करते हैं!

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