क्या आप पराठे के शौकीन हैं? हाँ! तो आपने मुरथल के पराठे जरूर खाए होंगे? क्या नहीं खाए? तो आपके पराठे खाने की यात्रा अभी अधूरी है। चलिए, आज आपको बतातें हैं कि आखिर आपको मुरथल के पराठे क्यों खाने चाहिए। आखिर क्या अलग है वहाँ के पराठों में।

दिल्ली से पंजाब जाने के रास्ते पर मुरथल हाइवे से गुजरने वाले यात्रियों के लिए मुरथल स्थित ढाबे से गुजरने का मतलब है विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पराठे की खुशबू का उनके नाकों तक पहुँचना और उसके बाद यात्रा की थकान और भूख का बढ़ जाना। फिर मजबूर होकर लोग वहाँ रूकते हैं क्योंकि वहाँ कि खुशबू जो उन्हें खींच लाती है।

पहलवान ढाबा, गुलशन ढाबा, मन्नत ढाबा, अन्नपूर्णा ढाबा, झिलमिल ढाबा, रॉयल मुरथल ढाबा हो या कोई और ढाबा, ये सारे के सारे ढाबे यहाँ वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए हैं। न सिर्फ यहाँ से गुजरने वाले मुसाफिर बल्कि कई बॉलीवुड स्टार भी यहाँ के पराठे का मजा ले चुके है।

सन 1958 में जीटी रोड पर समाज सेवी प्रकाश सिंह ने वाहन चालकों के लिए सबसे पहले ढाबे की शुरूआत की। अपने किफायती दामों के कारण यह ढाबा आज अमरीक सुखदेव के नाम से मशहूर ढाबे के रूप में एक ब्रांड के नाम से जाना जाता है। यहाँ स्थित मन्नत ढाबे का दाम आम आदमी के बजट के अनुसार तय किया गया है।  यहाँ आपको मात्र 110 रूपए में दाल, पुलाव, सलाद, पापड़, रोटी, रायता, लच्छा, पराठा, तंदूरी रोटी, रसगुल्ला आदि की एक थाली मिल सकती है। हालाँकि, यह शुरूआती दाम है।

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मुरथल स्थित ढाबों का सबसे मशहूर और सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाला पराठा है दाल का बना पराठा। ये पराठे दाल के बने होते हैं और इसको एक खास जायकेदार चटनी के साथ परोसा जाता है। अगर आप एक बार यहाँ के पराठे खा लें तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि आप उसकी तारीफ न करें। राजधानी दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश आदि से गुजरने वाले यात्री के रास्ते में ये ढाबे स्थित हैं।

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