भुने मसाले और गर्म तेल की सोंधी महक, अगर आप दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित पराठे वाली गली से होकर गुजरते हैं तो आपकी भूख को बढ़ाने के लिए ये सारी चीजें काफी है। “ऐ पराठे-पराठे, आलू के पराठे, मूली के पराठे, गोभी के पराठे” जैसे न जाने कितने पराठों के नाम आपको उन गलियों से गुजरते हुए सुनाई पड़ेंगे। तो चलिए, आज दिल्ली के उसी पराठे वाली गली का एक चक्कर लगाते हैं और कुछ सोंधी सी खूशबू अपनी साँसों में बसाते हैं।

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Credit: Facebook/Ruturaj Fand

पुरानी शहर की एक सबसे खास बात होती है वो यह कि वहाँ भोजन की परंपरा आज भी व्यवस्थित रहती हैं। यहाँ न सिर्फ खाना बल्कि इनकी अपनी अन्य परंपरा, बातचीत का तरीका, आते-जाते बटोहियों के मदद करने का तरीका आज भी ज़िंदा है। दिल्ली में स्थित इस परांठे वाली गली का यह नाम कैसे पड़ा इसकी कहानी बड़ी रोचक है।

दरीबा खुर्द के नाम से मशहूर यह गली में कुछ ब्राहम्ण परिवार की सोने व चाँदी की दुकान थी जिसके साथ वहाँ कुछ पराठे की दुकाने भी थीं जो उन्हीं परिवारों के द्वारा चलाई जाती थीं।

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Credit: Facebook/ Sujata Sengupta

पराठे वाली इस गली में कुल 35 अलग-अलग तरह के पराठे खाने को मिलते हैं जिनका स्वाद ऐसा कि मुँह से “आहाहा” निकले बिना न रह सके। देसी घी से बने इन पराठों को आलू की सब्जी, केले की चटनी और पाँच अन्य प्रकार के सलाद और अचार के साथ परोसा जाता है। यहाँ कि कुछ दुकानें ऐसी हैं जिन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी के लोग चलाते आ रहे हैं और इनमें से कुछ तो लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।

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Credit: Facebook/ Vishal Goyel

पराठे वाली गली न सिर्फ विदेशी पर्यटक के लिए बल्कि बॉलीवुड अभिनेता और नेताओं के बीच भी खासी प्रसिद्ध है। बिग बी से लेकर अक्षय कुमार और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू यहाँ खाने आ चुके हैं। तो अगर आप भी कभी दिल्ली जाएँ तो एक चक्कर चाँदनी चौक स्थित इस पराठे वाली गली का अवश्य लगाएँ।

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