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नियमों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण के माध्यम से बच्चों की तस्करी जारी है

वैश्विक दत्तक-ग्रहण एक बड़ा व्यवसाय है, जो कमजोर नियमों और लाभ अर्जित करने की प्रेरणा से युक्त है, जिससे की यह अपहरणकर्ताओं, मानव तस्करों और  बालकामुकों का निशाना बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण नियमों के बावजूद और कुछ देशों के साथ विदेशी दत्तक-ग्रहण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बाद भी यह समस्या जारी है। अपहरणकर्ताओं ने इस व्यापार को और दत्तक-ग्रहण संस्थाएं ने क़ानूनों को दरकिनार करना जारी रखा है।

“जिससे मेरा सामना हुआ वह बहुत ही भयानक था” गैर-सरकारी जांचकर्ता और “द ओपरमैन रिपोर्ट” (The Opperman report) रेडियो कार्यक्रम के मेजबान एड ओपरमैन (Ed Opperman) ने कहा।

ओपरमैन ने ऐसे माता-पिता और बच्चों के मामलों की जांच शुरू की जो अपने वास्तविक बच्चों और वास्तविक माता-पिता को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ देशों में, “ज़रा भी जांच पड़ताल नहीं की जाती है,” उन्होंने कहा। “वहां दत्तक-ग्रहण के इस व्यवसाय से पैसे बनाए जाते है।”

पीटर ग्लैसन (Peter Gleason), वकील और पूर्व एनवाईपीडी ( NYPD) पुलिस अधिकारी
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“आप थाइलैंड (Thailand) और अफ्रीका (Africa) जैसे देशों में जा सकते हैं और वहां से कोई भी एक बच्चा लेकर बिना किसी काग़जी कार्रवाई के वापस अमेरिका (America) आ सकते हैं,” उन्होंने कहा। यहां तक की रूस (Russia), जिसने अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण के लिए कड़े कदम उठाए हैं, उनकी भी न्यूनतम कानूनी प्रक्रिया है, जिसमे परीक्षण, पृष्ठभूमि की जांच और प्रतीक्षा समयावधि सम्मिलित हैं।

जुलाई 2014, में संयुक्त राज्य का एक नया कानून प्रभावी हुआ, जिसमें सभी संयुक्त राज्य की दत्तक-ग्रहण संस्थाओं का संघीय पुनरीक्षण और प्रमाणन अनिवार्य किया गया था। द इंटरकंट्री एडोपशन यूनिवर्सल अक्रेडटैशन एक्ट (The intercountry Adoption Universal Accreditation Act ) 2012 में पारित किया गया जब व्यापक प्रतिवेदन थे कि अपहरणकर्ता बच्चों को विदेशी अनाथालय में बेच रहे हैं, कभी-कभी तो वैध मानवीय समूहों के सहयोग से।

ग्वातेमाला (Guatemala) ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण पर प्रतिबंध लगाया था, उस समय जब देश में जन्मे 100 बच्चों में से तकरीबन एक को विदेशी माता-पिता द्वारा गोद लिया गया था। 2011 में खोज़ी पत्रकार और लेखक एरिन सेगल मैकेनटायर (Erin Siegal McIntyre) ने अमेरिका दूतावास से स्मृति-पत्र हासिल [1] किये, जो दर्शाता है कि उद्योग के लिए बच्चों का अपहरण किया गया था, और अपने बच्चे की तलाश करने की कोशिश करने पर माताओं को जान से  मारने की धमकी दी जाती थी।

ग्वातेमाला में विदेशी दत्तक-ग्रहण उद्योग के बंद होने के बाद और हेग अपहरण सम्मेलन (Hague Abduction Convention) के अंतर्गत ग्वातेमाला ने इसके बाद विदेशी दत्तक-ग्रहण के अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया तो अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण उद्योग वहां से कहीं और स्थापित हो गया और स्थानीय अपराधियों ने कमाई के दूसरे जरिए तलाशने शुरू कर दिए। हालांकि, गोद लेने का दुरुपयोग समाप्त नहीं हुआ। इनसाइट क्राइम (InSight Crime [2]) ने 2013 मे प्रतिवेदित किया की ग्वातेमाला में, “नियमों के बावजूद गैरकानूनी दत्तक-ग्रहण जारी है,” और यह कि “चुराए गए अधिकतर शिशुओं को अनियमित दत्तक-ग्रहण या उनके अंगों के लिए बेच दिया गया।”

मोसुल की एक 15 वर्षीय विस्थापित ईराकी लड़की ने अप्रैल 30, 2017 को उत्तरी इराक में अपने अनाथालय के एक कर्मचारी से बात की। (SAFIN HAMED/AFP/GETTY IMAGES)

जबकि 2014 में संयुक्त राज्य के कानून ने अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण के व्यवसाय की “वाइल्ड वेस्ट” (wild west) स्थिति को संयुक्त राज्य में समाप्त कर दिया था, जो अधिकतर संघीय नियमों और पुनरीक्षण से अछूता था, इस कानून से  समस्या का कोई भी समाधान नहीं हुआ।

2016 में युगांडा (Uganda) ने अपने विदेशी दत्तक-ग्रहण कानून को कड़ा किया, रेयटर्स (Reuters [3]) के अनुसार “फास्ट ट्रैक विदेशी दत्तक-ग्रहण” को प्रतिबंधित करने के लिए, जिसमें जीवित माता-पिता के साथ रहने वाले बच्चों का कुछ ही दिनों में  गोद लेने की आड़ में अपहरण किया जा सकता था। रेयटर्स ने बताया है कि यूगांडा से हजारों बच्चों को मुख्य रूप से संयुक्त राज्य लें जाया गया है।

भारत में, गोद लिए जानें वाले बच्चों को “निर्मित अनाथ” के तौर पर देखा जाता है। भारत के फर्स्टपोस्ट (Firstpost) [4] न्यूज आउटलेट ने 2016 में बताया कि “गोद लेने के लिए अपहरण” करने वाले रैकेट का खुलासा कोलकाता में हुआ था, जहां एक दत्तक-ग्रहण संस्था को ग़रीब-अविवाहित माताएं, बलात्कार पीड़ितों और अधिकारहीन परिवारों” से नवजात शिशु चुराने के आरोप में दोषी पाया गया था।”

यह बताया गया है कि, “कई मामलों में, स्वस्थ शिशुओं को मरे हुए शिशुओं के साथ बदल दिया जाता था और उनकी माताओं को कहा जाता था कि उनका शिशु मर चुका है। कभी-कभार, गरीब माता-पिता से ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए जाते थे, जिन्हें वह समझ नहीं पाते थे। उन्हें लगता था कि वह अपने बच्चे को निशुल्क आवासीय विद्यालय में भेजने की स्वीकृति दे रहे हैं लेकिन वास्तव में वह उसपर अपने सभी अधिकार खो देते थे।”

2017 में, भारत में पुलिस ने दत्तक-ग्रहण केन्द्र के मुखिया को गिरफ्तार [5] किया, जो विदेशी दंपतियों को US$12,000 और US$23,000 के बीच बच्चे बेचते थे।

यहां तक की यह समस्या संयुक्त राज्य में भी जारी है। 2017 में एफबीआई (FBI) ने ओहायो (Ohio) में यूरोपियन एडॉप्शन कंसल्टेंट्स (European Adoption Consultants) की संस्था पर छापा मारा, जहां न्यूज आउटलेट वीकेवाईसी (WKYC [6]) ने आरोप लगाया की कार्यकर्ता पर्याप्त रूप से “बच्चों की बिक्री, अपहरण,‌ शोषण, या तस्करी रोकने में असफल रहे हैं।” यूरोपियन एडॉप्शन कंसल्टेंट्स “रिश्वत के अनुरोध” को रोकने में असफल हुए और धोखे से जन्म देने वाले माता-पिता की स्वीकृति प्राप्त की।

उद्योग बुल्गारिया (Bulgaria), चीन (China), कोलम्बिया (Columbia), कोगों लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic of the Congo), होंडुरास (Honduras), पनामा (Panama), हैती (Haiti), भारत (India), पोलैंड (Poland), तंजानिया (Tanzania), युगांडा (Uganda) और यूक्रेन (Ukraine) में संचालित है।

न्यूयॉर्क (NewYork) पुलिस विभाग में एक वकील और पूर्व पुलिस अधिकारी, पीटर ग्लैसन (Peter Gleason) के अनुसार दत्तक-ग्रहण संस्थाओं के माध्यम से बच्चों की तस्करी एक जानी-मानी समस्या है। “यह वहां हैं,’ उन्होंने कहा। “उन्हें बाल-श्रम, यौन-उत्पीड़न, आप जो कहें वह, के लिए प्रताड़ित किया जाता है।”

आपदा का लाभ उठाना

मानव तस्कर प्राकृतिक आपदाओं का भी फायदा उठाते हैं। आस्ट्रेलिया (Australia) की एबीसी न्यूज (ABC News) के मुताबिक [7]  2010 में हैती में भूकंप के बाद, “तस्करों का गिरोह आपदा के फौरन बाद हरकत में आ गया और बच्चों को चुराने के लिए स्थानीय अधिकारियों और राहत कर्त्ताओ” की कमज़ोरी का फायदा उठाया।

 इस दत्तक ग्रहण व्यवसाय से पैसे बनाये जा सकते है
एड ओपरमैन (Ed Opperman), निजी अन्वेषक और रेडियो शो के मेज़बान

सिल्सबी ने शुरुआत में दावा किया कि बच्चे अनाथ थे या उन्हें त्याग दिया गया था, लेकिन हैती सरकार और दानी संस्था एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजिस (SOS Children’s Villages ) ने पता लगाया कि यह सच नहीं है; उनमें से कोई भी बच्चा अनाथ नहीं था, क्योंकि लगभग सभी के माता-पिता में से कोई एक जीवित था। सिल्सबी के कानूनी सलाहकार जॉर्ज पूएलो (Jorge Puello [8]) को भी कथित मानव तस्करी के मामले में केंद्रीय अमेरिका और हैती से महिलाओं और बच्चों को लाने के आरोप में गिरफ़्त किया गया।

पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन (Bill Clinton), जो हैती में राहत प्रयासों का समन्वय कर रहे थे, सिल्सबी को छोड़कर सभी आरोपियों पर जारी किए गए मामले में उन्होंने हस्तक्षेप [9] किया और उन्हें छुड़ा लिया। फिर भी अभियोजन पक्ष ने उसके आरोपों को साज़िश और बाल अपहरण की कोशिश से घटा कर  “ग़ैरक़ानूनी यात्रा की व्यवस्था” करार दिया।

बच्चों को ‘पुर्नस्थापित’ करना

अन्य चलते मुद्दों के साथ ही ओपरमैन के अनुसार, “पुनर्स्थापना” है, जिसमें लोग बच्चे को गोद लेते हैं और फिर उसे लगभग बिना नियम कानून के नए माता-पिता को दे देते हैं।

“ऐसा एक पूरा संघ हैं, जिसमें संदेश भेजे जाते हैं, इन लोगों के याहू (yahoo) पर समूह हैं, जिनके पास यह बच्चे होते हैं। उन्हें इनकी अब और अधिक आवश्यकता नहीं होती और फिर वह इन्हें दुसरे घरों में पुर्नस्थापित कर देते हैं,” ओपरमैन ने कहा।

उन्होंने कहा कि बाल विज्ञापनों में पूर्व-किशोरों के “यौन संबंधी उत्तेजक” होने, नशीले पदार्थों का सेवन करने या “आनंद पहुंचाने के लिए उत्तसुक” होने जैसे कथनों को शामिल किया जाता है।

 “कोई कागज़ी कार्यवाही नहीं होती है। वह आपको अधिकार पत्र देते हैं, जैसे कि ‘आप मेरे बच्चे को स्कूल में दाखिल करा सकते हैं, आप उसे चिकित्सक के पास ले जा सकते हैं’ और बस इतना ही। बच्चा आपके हाथ से गया,” उन्होंने कहा। “और ऐसे कुछ दस्तावेज किये गए मामले हैं जहां यह बच्चे बालकामुकों के पास पहुँच जाते हैं।”

जब वह संयुक्त राज्य में आते हैं और दत्तक-ग्रहण के कम विनियमित अभिरुप को सौंपे जाते हैं, तो बच्चे के शोषित होने की संभावना अधिक होती है।

संयुक्त राज्य इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन ट्रैफिकिंग (U.S. Institute Against Human Trafficking) के मुख्य कार्य अधिकारी जेफ्री रोजर्स (Geoffrey Rogers) ने कहा कि “लगभग 60-70 प्रतिशत बच्चे जिनकी संयुक्त राज्य में तस्करी हुई थी, वह फोस्टर देखभाल प्रणाली के माध्यम से पाए जाते हैं।”

अर्कांसस जर्नल ऑफ सोशिअल चेंज एंड पब्लिक सर्विस (Arkansas Journal of Social Change and Public Service) की 2015 की रिपोर्ट [10] के अनुसार, “पुर्नवासन नियमित नहीं है, इससे गुजरने का कोई कानूनी ढाँचा तैयार नहीं है”, और “अधिकतर यह गुप्तता का मामला है।”

रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश बच्चे जो पुर्नस्थापना का शिकार होते हैं, उन्हें विदेश से गोद लिया जाता है। इसके अनुसार लगभग 73% को विदेशों से गोद लिया हुआ प्रचारित किया गया है और केवल सात प्रतिशत को विदेशों से गोद नहीं लिया हुआ प्रचारित किया गया है। 10-20 प्रतिशत दत्तक-ग्रहण असफल हो गए हैं।

घरेलू दत्तक-ग्रहण के साथ, जन्म देने वाली मां के अधिकार, भविष्य में गोद लेने वाले माता-पिता के अधिकार, और बच्चे के कल्याण के लिए अधिकारों की कुछ प्रक्रिया होती है। यह रिपोर्ट बताती है कि “संरक्षण की कमी होती है, जब माता-पिता बच्चे को विदेशों से गोद लेते हैं।”

“इसका कारण यह है कि बच्चे संयुक्त राज्य की अस्पतालों या संयुक्त राज्य के नागरिक द्वारा जन्मे होते हैं, उन्हें विश्वसनीय दस्तावेज़ों का लाभ मिलता है, जो की अक्सर अंतरराष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण में अनुपस्थित होते है, जो घरेलू दत्तक-ग्रहण की तुलना में अनैतिक आचरण का अधिक जोख़िम पैदा करता है,” रिपोर्ट के अनुसार।

ओपरमैन ने कहा कि विदेशों से बच्चों के दत्तक-ग्रहण की स्थिति, हर राज्य में बहुत ही भिन्न होती है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में से सबसे कमजोर नियम, यूटा (Utah) में है और उन्होंने यह भी देखा है कि कुछ दत्तक-ग्रहण संस्थाएं कमजोर निरीक्षण वाले राज्यों में अपने कार्यालयों को स्थापित करते हैं। “ऐसे कुछ राज्य हैं जहां यह सभी के लिए बहुत ही आसान है—आप जो चाहें कर सकते हैं। यहां तक की अगर दत्तक-ग्रहण फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क से भी होता है, तो वह कागज़ी कार्यवाही यूटा में करेंगे।”