भले ही शंकर चंद्रशेखर देख पाने में असमर्थ हों, लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी इस कमी को जीवन की राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उन्होंने जीवन की समस्याओं को तकनीकी के माध्यम से दूर किया। आप चकित होंगे कि आखिर एक नेत्रहीन इंसान कैसे तकनीक का उपयोग कर सकता है तो चलिए बताते हैं आपको।

Credit: The Hindu

The Hindu के अनुसार 28 वर्षीय शंकर नई दिल्ली की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में टेस्टर हैं। अपनी शारीरिक कमियों के बावजूद शंकर बिना किसी की सहायता के अपना जीवन आसानी से जी रहे हैं। आज वे अपने मोबाइल से ही गाड़ी बुक करके कहीं भी आ-जा सकते हैं। अगर कभी उन्हें किसी रेस्तरां में खाना खाने का मन करता है तो वे गूगल मैप्स की सहायता से वहां भी बिना किसी कठिनाई के पहुँच जाते हैं। वे इन्टरनेट की मदद से ही अपने बिल भी चुकाते हैं और यहाँ तक कि अपने घर के लिए राशन भी खरीदते हैं।

शंकर का मानना है कि दिव्यांग लोगों के लिए तकनीक का ज्ञान उनके जीवन को और आसान बना सकता है। नेत्रहीन होने और अपनी बाहों में कम शक्ति होने के कारण उनका जीवन उतना आसान नहीं था, लेकिन प्रौद्योगिकी और इन्टरनेट के ज्ञान ने उनके जीवन की मुश्किलों को काफी हद तक कम कर दिया।

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लेकिन यह सब रातों-रात नहीं हुआ। जब शंकर 3 वर्ष के थे तो उन्होंने बेल्लारी में अपना घर-परिवार छोड़कर बेंगलुरु के “श्री रमना महर्षि अकैडमी फ़ॉर द ब्लाइंड” में दाखिला ले लिया। उन्होंने वहां पर 10वीं तक की पढ़ाई की। बेल्लारी में नेत्रहीनों की पढ़ाई के लिए कोई भी संस्था ना होने के कारण शंकर को बेंगलुरु आना पड़ा था। शंकर के पिता ने उन्हें इस दिशा में बदलाव लाने की सलाह दी, इसलिए उन्होंने नेत्रहीनों को पढ़ाने के लिए 2 साल का डिप्लोमा भी किया।

एनेबल इंडिया (Enable India) से कंप्यूटर का ज्ञान लेने के बाद वे बेल्लारी लौट गए। नई-नई तकनीकों को सीखने में उनकी दिलचस्पी को देखकर उनके एक मित्र ने उन्हें लैपटॉप दे दिया। शंकर ने इन्टरनेट कनेक्शन लेने के बाद इस पर कई कंप्यूटर की भाषाएँ जैसे कि Java, C++ और HTML भी सीख लीं।

शंकर जानते थे कि यदि इन्टरनेट का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह ज्ञान का एक बेहतरीन स्त्रोत बन सकता है। 2012 में शंकर ने अपना एक व्हट्सएप्प (Whatsapp) ग्रुप बनाया। वे बताते हैं, “मैंने यह ग्रुप केवल सीखने के लिए बनाया था, लेकिन फिर यह एक मंच बन गया जहाँ पर मैं उनके साथ ज्ञान बांटता हूँ और मुझे भी उन सब से कुछ नया सीखने को मिला।” अब उनके उस ग्रुप में 180 सदस्य हैं।

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2016 के दिसम्बर में शंकर ने टेक एक्सेसिबिलिटी टुटोरिअलस (Tech Accessibilty Tutorials) नामक एक यू-टयूब चैनल शुरू किया जहाँ वे नेत्रहीनों के बारे में बारीकी से समझाते हैं। वे इस ट्यूटोरियल का विषय-वस्तु तैयार करते हैं और उनकी मित्र वैष्णवी उनके लिए वीडियो तैयार करती हैं।

जब भी प्लेस्टोर (Playstore) पर कोई नया एप्प आता है तो शंकर एप्प निर्माताओं से संपर्क करके पूछते हैं कि क्या वे नेत्रहीनों के लिए ट्यूटोरियल बनाने के लिए उन्हें वेतन देंगे। आज उनके बनाए गए ट्यूटोरियलस को 1100 लोगों ने सब्सक्राइव किया है।

शंकर ने अपना जीवन अपने हाथ में लेकर अपने जीवन को आसान बनाने के तरीके खोज लिए। उन्होंने यह दिखा दिया कि शारीरिक कमी सामान्य जीवन जीने के रास्ते में कभी रूकावट नहीं बन सकती। उन्होंने अपने ज्ञान को अपने और दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया। शंकर ने हमेशा अपने जीवन को बेहतर ढंग से जीने की कोशिश की है।

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