इरादे मज़बूत हो तो कठिन से कठिन डगर भी आसान हो जाती है और इंसान अपनी राह स्वयं ही बना लेता है। कुछ ऐसी ही प्रबल इच्छा शक्ति के साथ केरल के इस शख्स ने ज़िंदगी की चुनौतियों को स्वीकार किया और अपने जीवन की राह को सुगम और सरल बना लिया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) के समीप कझाकूटम (Kazhakootam) के रहने वाले दिव्यांग ने छतरी को अपनी रोज़ी-रोटी का जरिया बनाया।

एएनआई के मुताबिक, उन्होंने बताया कि “एक एक्सिडेंट की वजह से वे दिव्यांग हो गए और उन्हें खाने के भी लाले पड़ गए। दिव्यांग ने कहा कि ‘मैने छतरी बनाना एक चर्च के पादरी से सीखा। अपनी छतरियों को बेचने के लिए वे सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं।'”

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