छः बच्चों की माँ, एन तेरलिंग्स (Ann Teurlings) का जन्म हेल (Halle), बेलजियम (Belgium ) में एक पारंपरिक परिवार में हुआ था।उन्होंने कला और इंटीरियर डिजाइन में अपनी पढ़ाई की। तीस साल पहले, एक बुरी कार दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोट लगी थी जिसके कारण, वे दशकों तक लगातार दर्द से ग्रस्त रहीं । यह उनकी कहानी है कि वे उस परीक्षा से कैसे गुज़री और एक स्वस्थ और प्रगतिशील जीवन जीने के लिए कैसे ठीक हो गईं ।

“‘मेरी माँ दौड़ सकती है! वह भाग सकती है!’ मेरी 11 वर्षीय बेटी इली (Ili) ने चिल्ला कर कहा।”

इली ने मुझे कभी भागते हुए नहीं देखा था। मेरी 28 साल की बेटी ने भी मुझे कभी भागते हुए नहीं देखा था। मैं न केवल दौड़ सकती थी, लेकिन मैं बहुत अच्छी तरह से चल भी नहीं सकती थी। मेरे लिए बच्चों के साथ रहना और खेल के मैदान में उनके साथ खेलना बहुत ही मुश्किल था। मेरे इन सभी दुखों का कारण 30 साल पहले हुई एक भयानक कार दुर्घटना थी।

फिर भी, जुलाई 2016 में, एक जीवन बदलने वाले अनुभव के बाद, मैं बर्लिन के एक परेड में भाग लेने में सक्षम रही और लगभग 9 कि.मी. तक चल पाई, जो इससे पहले बिलकुल असंभव था। दो महीने बाद, मैंने म्यूनिख (Munich) में एक और परेड में हिस्सा लिया। उसके बाद, मैं अचानक चलने में सक्षम रही, और यही कारण है कि इली इतना उत्साहित थी।

कार दुर्घटना और उसके बाद पीछा करता हुआ दुःख

1986 में हुई कार दुर्घटना का दृश्य जिसके बाद एक सप्ताह के लिए एन तेरलिंग्स कोमा में रहीं और दशकों तक लगातार दर्द सहती  रहीं (अख़बार क्लिप से)

24 वर्ष की उम्र में, मैं दो कारों की टक्कर में गंभीरता से घायल हो गई थी और एक सप्ताह के लिए कोमा में रही। मेरे पैर इतनी बुरी तरह घायल हो गये थे कि अस्पताल के डॉक्टरों ने सोचा कि मुझे विच्छेदन की आवश्यकता होगी। लेकिन एक सर्जन का धन्यवाद जिन्होंने मेरी सभी हड्डियों के टुकड़ों को महान कौशल और धैर्य के साथ फिर से जोड़ा। कोमा में रहते हुए, मैं जीवन और मृत्यु के बीच कई बार घूमती रही। एक बार मैंने कुछ सीढ़ियों को भी देखा जो मुझे स्वर्ग की ओर ले जाने वाली लगीं।

जब मैं कोमा से बाहर आ गयी, तब मैंने अधिक थकान और सारे शरीर में दर्द महसूस किया। मुझे एक 70 साल की महिला की तरह लग रहा था। चाहे मैं लेट जाती, बैठ जाती या घूमती फिरती, दर्द हमेशा रहता था। कभी-कभी मैं सिर्फ शौचालय का उपयोग जैसी बुनियादी चीजों को करने के बारे में सोचकर रोती थी। एक पूरे वर्ष के लिए, मैंने बैसाखी का सहारा लिया क्योकि उसके बिना मैं चल ही नहीं सकती थी। हर कदम बहुत मुश्किल लगता था। किसी तरह, मैंने निरंतर दर्द के साथ जीना सीख लिया, अपनी सोच को उच्च स्तर पर रखते हुए इसे पार करने की कोशिश करती रही।

कोमा में रहते हुए मेरे अनुभव और यह तथ्य कि मैंने मेरे दोनों पैर नहीं खोए थे, ने मुझ में इस विश्वास को जागृत किया कि मानव शरीर में स्वयं-चिकित्सा तंत्र ज़रूर होना चाहिए, और अंत में मैं पूरी तरह से ज़रूर ठीक हो जाऊंगी। इस सोच के साथ, मैंने किसी भी प्रकार की दवा लेने से इनकार कर दिया, और इसने मेरे जीवन को बहुत मुश्किल बना दिया।

मेरे आस पास के लोग मुझे समझ नहीं सके और सदा सोचा करते थे कि मैं अजीब हूँ। मैं धीरे-धीरे लोगों पर विश्वास खोने लगी और द्वेषपूर्ण, जिद्दी और अकेला महसूस करने लगी। मैं इतनी हठीली बन गयी थी कि जब एक परिचित ने मुझे “झूआन फालुन” की एक किताब देने की कोशिश की तब मैंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हालांकि बाद में इसीने मेरी जिंदगी बदल दी, मैंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और अपनी बंद दुनिया को पसंद करते हुए, उनसे दूर हो गई।

30 साल के पुराने दर्द का उपचार चार महीनों में

एन तेरलिंग्स और उनकी बेटी इली, जो जर्मनी में हुए समर कैंप से शास्त्रीय चीनी नृत्य शिक्षण के पूरा होने का प्रमाण पत्र थामे हुए हैं।  (©Ann Teurlings)

कुछ साल पहले, मेरी बेटी इली स्कूल में लुसिया (Lucia) नाम की एक लड़की से मिली, और ये दोनों अच्छे दोस्त बन गए। लुसिया की मां फालुन गोंग* नामक एक प्राचीन आध्यात्मिक चीनी ध्यान अनुशासन प्रथा का अनुगमन करती हैं । उन्होने इली से मेरी कहानी सुनी और मुझे कॉल किया। वे मुझे फालुन गोंग (जिसे फलुन दाफा भी कहा जाता है) की अदभुत चिकित्सा शक्ति के बारे में बताना चाहतीं थीं, लेकिन मैं उनसे नहीं मिलना चाहती थी। हालांकि, लुसिया की माँ बहुत धैर्यवान थीं। तीन साल की अवधि में, उन्होने कई बार फ़लुन गोंग को मेरे सामने पेश करने की कोशिश की, लेकिन मैंने हर बार उन्हें मना कर दिया।

एक दोपहर, इली और मैं न्यूयॉर्क से आए एक शास्त्रीय चीनी नृत्य प्रदर्शन, शेन यून परफॉर्मिंग आर्ट्स (Shen Yun Performing Arts) देखने गए। इली इतनी मोहित हो गई थी कि उसने चीनी शास्त्रीय नृत्य सीखने का फैसला किया, इसलिए वह एक ग्रीष्मकालीन शिविर में शामिल हो गई जहां यह सिखाया जा रहा था। मैं उसके साथ कैंप में गई और कुछ दिलचस्प चीजें होते हुए देखीं।

यह शायद ही संभव लगा था, लेकिन कुछ ही समय में, इली एक असली चीनी नर्तक की तरह नाच रही थी, और वह चीनी कला से चित्र बनाना भी सीख रही थी। इससे मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। मैंने वहां के शिक्षक के साथ बात की, जो एक फालुन गोंग समर्थक थे और उन्होने मुझे समझाया कि फालुन गोंग की मुख्य पुस्तक, जो सत्य, करुणा और सहनशीलता पर आधारित है, झूआन फालुन (Zhuan Falun), बहुत ही गहरी है।

एन तेरलिंग्स उनकी कुछ कलाकृतियां दिखाती हैं (©Ann Teurlings)

इस बात ने मुझे आकर्षित किया, इसलिए मैंने एक दिन लूसिया के घर का दौरा किया और उसकी माँ ने मुझे झुआन फालुन की एक कॉपी दी। मैंने इसे तुरंत ही पढ़ना शुरू कर दिया और मुझे एहसास हुआ कि यह बिलकुल वही था जो मुझे चाहिए था। मैं बस पढ़ते गई। मैंने उसे बार-बार पढ़ना जारी रखा क्योंकि लुसिया की मां ने मुझे बताया कि सभी गहन सिद्धांतों को समझने के लिए इसे एक बार से ज्यादा बार पढ़ना आवश्यक है। मैंने पहले ही इसे कई बार पढ़ लिया था।

यह सिर्फ शुरुआत थी।

चार महीने बाद, मेरा सब दर्द गायब हो गया था। मैं बिलकुल विश्वास नहीं कर पा रही थी। मुझे इतनी हैरानी हुई कि सिर्फ एक किताब पढ़ने से 30 साल का दर्द गायब हो गया था। इस बात ने मुझे फालुन गोंग के प्रति अधिक उत्सुक बनाया, इसलिए मैंने ध्यान अभ्यास भी करना शुरू कर दिया। मैं खुश थी कि मैं बिना अधिक प्रयास के पांच अभ्यासों को सीख सकी थी, ऐसे जैसे कि मैंने पहले भी यह अभ्यास किया हो।

एक और आश्चर्यजनक बात यह थी कि कोमा में रहते हुए स्वर्ग की सीढ़ियों को देखकर के जो मैंने समझा था, उसी का उल्लेख झुआन फालुन  में भी था!

अब में भाग सकती हूँ!

कुछ समय बाद, जब इली के साथ जर्मनी के एक और ग्रीष्मकालीन शिविर में थी तो मुझे पूछा गया कि क्या मैं बर्लिन (Berlin) में एक परेड में शामिल होना चाहती हूं। मुझे नहीं पता था कि परेड क्या था—मैंने सोचा था कि यह बच्चों के लिए कुछ है, इसलिए मैंने हाँ कह दी।

बहुत से लोगों ने परेड में भाग लिया, और मुझे पता चला कि इसका उद्देश्य चीन में फालुन गोंग अनुयायियों के खिलाफ चल रहे क्रूर उत्पीड़न** के बारे में जागरूकता बढ़ाने और अभ्यास के सौंदर्य को दिखाने के लिए था। इसने मुझे बुराई के विरुद्द चीन के निर्दोष लोगों के न्याय के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित किया।

मैंने परेड के अंत में रहने की कोशिश की, ताकि अगर आगे तक नहीं चल पाऊँ तो मैं किसी को परेशान नहीं करूँगी। क्योंकि पता चला था कि यह एक लंबी परेड थी। मैं उन लोगों के पीछे चलती रही जो मेरे सामने थे, अपने संतुलन को फिर से महसूस करते हुए और इससे पहले कि मुझे एहसास हो, कुछ घंटे बीत चुके थे। मुझे आश्चर्य हुआ कि मैं उतनी दूर तक चल पाई थी।

एन तेरलिंग्स (दाहिने दूर की ओर) और उनकी बेटी इली (सामने) स्थानीय समूह के साथ फालुन गोंग का खड़े रहकर करने वाला अभ्यास कर रहे हैं। (©Ann Teurlings)

फिर एक आदमी आया और उसने कहा कि मैं बहुत धीरे-धीरे चल रही हूँ और मुझे तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है अन्यथा मैं पीछे रह जाऊंगी। ठीक तभी मुझे लगा कि मैं अपना संतुलन खो रही थी और हर एक अगला कदम ज्यादा मुश्किल लग रहा था। मेरी दोस्त ने मुझे अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया। वह आदमी फिर से आया और मुझे और भी तेजी से चलने के लिए कहा। मुझे अचानक थकान महसूस हुई और ऐसा लगा कि मुझे आराम करने की जरूरत है । मैंने परेड को और आगे, मुझसे दूर बढ़ते देखा।

तब मैंने अचानक झुआन फालुन की शिक्षा के बारे में सोचा और खुद को परेड का उद्देश्य याद दिलाया। इस विचार से, मेरी ऊर्जा वापस लौटने लगी, और मैंने फिर से चलना शुरू कर दिया और थोड़ा-थोड़ा करके, मेरे और परेड के बीच की दूरी कम हो गई और अंत में मैं उनके साथ चलने में सक्षम हो गई।

तब वह आदमी तीसरी बार आया और मुझे तेजी से आगे बढ़ने के लिए कहा! लेकिन अभी भी 500 मीटर की दूरी बाक़ी थी और हर कदम इतना भारी हो गया कि मैं समाप्त करने के लिए संघर्ष करने लगी और अंतिम कुछ मीटर के लिए मुझे मदद की ज़रूरत थी।

हालांकि, यह पूरा अनुभव मुझे एक गहरे स्तर पर लाभकारी लग रहा था। परेड से पहले, हालांकि दर्द समाप्त हो गया था, हमेशा कुछ दबाव सा महसूस होता था। परेड के बाद, वह दबाव पूरी तरह से चला गया था।

इसके तुरंत बाद, इली और मैंने म्यूनिख में एक और परेड में भाग लिया। उस परेड में, मुझे सहजता-सी महसूस हई। और बिना किसी समस्या के मैं अंत तक चली। इली मेरे साथ-साथ चल रही थी, और वह हैरान थी कि मैं इतनी जल्दी चल सकती थी।

परेड के बाद वापस होटल के रास्ते पर, हमें उस समूह के साथ जुड़ना जरूरी था जिसके साथ हम थे। वे हमसे बहुत दूर थे, इसलिए मैंने सोचे बिना दौड़ना शुरू कर दिया।

तब इली चिल्लाई, “मेरी माँ भाग सकती है! वह दौड़ सकती है!” वह बेहद खुश थी।

मुझमें बदलाव देखकर, इली ने भी फालुन गोंग का अभ्यास करना शुरू कर दिया। वह झूआन फालुन की शिक्षाओं को बहुत अच्छी तरह समझती है और अपने दैनिक जीवन में सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों के आधार पर स्वयं को चलाती है।

मैं अपने जीवन-नवीनीकरण के अनुभव के प्रति कृतज्ञता से भर गई हूं और मेरी बेटी भी स्वस्थ रूप से आगे बढ़ रही है। मैं अपनी कहानी उन लोगों के साथ साझा करना चाहती हूं जो ” मुझ बूढ़ी” की तरह हैं और आशा करती हूँ कि अधिक लोगों को इस अदभुत स्व-साधना के अभ्यास से लाभ होगा।


Editor’s Note:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार ध्यान प्रणाली है। यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए पेश की गयी थी। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org

झुआन फालुन पुस्तक इस वेबसाइट falundafa.org पर हिंदी में डाउनलोड (download) करने के लिए उपलब्ध है।

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