जीवन फूलों की सेज कभी नहीं होता है। चाहे आप की सामाजिक स्थिति या शैक्षणिक स्तर कैसा भी हो, मनुष्य को हमेशा अपने जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कोलकाता, भारत के इस प्लास्टिक सर्जन ने चिकित्सा पेशे में अपना सपना पूरा किया और वर्तमान में शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक में प्लास्टिक सर्जरी विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन वे खुद अपने स्वास्थ्य और आंतरिक शांति से वंचित थे। सौभाग्य से, जब वे फालुन दाफा की एक प्राचीन आध्यात्मिक प्रणाली से परिचित हुए तो उनके जीवन ने एक उल्लेखनीय यू-टर्न लिया।

33 सालों से, विभिन्न प्रकार की असहनीय बीमारियों ने डॉ. उत्पल कुमार बिट के जीवन को दुखी बना दिया था। उन्होंने वैकल्पिक उपचार और योग सहित कई इलाजों की कोशिश की, लेकिन किसी से भी मदद नहीं मिली। हालाँकि, उनकी ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल गयी जब एक दिन, एक जूनियर डॉक्टर ने उन्हें शरीर और मन के लिए एक प्राचीन ध्यान प्रणाली के साथ परिचित करवाया।

कोलकाता के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. उत्पल कुमार बिट (Credit: Dr. Bit)

एनटीडी इंडिया से बात करते हुए, डॉ. बिट ने पूर्ण नैदानिक ​​विवरण के साथ अपनी शारीरिक स्थिति के बारे में साझा किया। “मैं लगभग 33 वर्षों से पुरानी ब्रोन्कियल अस्थमा जैसी कई पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित था। मुझे धूल, परागकण, कपास, विभिन्न खाद्य पदार्थ, ठंडी हवा आदि जैसी अलग अलग प्रकार की चीजों से एलर्जी थी। अपनी एलर्जी के कारण मुझे अक्सर गले में संक्रमण, सांस लेने की समस्याएं, त्वचा की समस्याएं आदि होती थीं,” डॉ. बिट ने कहा।

यह बताते हुए कि उनकी दयनीय स्थिति ने उनके पारिवारिक जीवन को कैसे प्रभावित किया था, डॉ. बिट को यह साझा करने में खुशी हुई कि उन्हें चमत्कारिक रूप से ठीक कैसे किया गया। “यह आश्चर्यजनक है! मैं इसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। यह एक चमत्कार है,” डॉ. बिट ने निष्कपटता से मुस्कुराते हुए कहा।

2011 में, एक साथी डॉक्टर ने डॉ. बिट को फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) से परिचित कराया, जो शरीर और मन के लिए एक प्राचीन प्रथा है जिसमें पांच सौम्य अभ्यास और सत्य, करुणा और सहनशीलता के तीन सार्वभौमिक सिद्धांत शामिल हैं।

अभ्यास की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन के बंगाली अनुवाद को पढ़ते हुए डॉ उत्पल कुमार बिट। (Credit: Venus Upadhayaya/NTD India)

“तब तक मैं 15 साल से उच्च रक्तचाप और दोनों घुटने में दर्द होता थाजो अस्थमा के इलाज के लिए स्टेरॉयड के उपयोग के कारण संभवतः ऑस्टियोआर्थराइटिस से हुआ थाजब मैं चलता और सीढ़ियों का उपयोग करता। मुझे टेस्टिकुलर दर्द, दन्त संवेदनशीलता, डैंड्रफ़ इत्यादि भी थे।” उन्होने कहा।

एलर्जी और अस्थमा ने उन्हें अक्षम कर दिया था। “जीवन वास्तव में असहनीय था, और सामान्य रूप से काम करना लगभग असंभव था। मैं इनहेलर्स, एंटीबायोटिक दवाओं के लगातार उपयोग, और सांस लेने के अभ्यास पर निर्भर था।”

वर्षों तक कष्ट झेलने के बाद अपनी बीमारियों को ठीक करने में असमर्थ होने के कारण, डॉ. बिट 2005 से आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित हो गए थे, और जब उन्हें फालुन दाफा मिला, तो उन्होंने बिना किसी देरी के इसका अभ्यास करना शुरू कर दिया।

“आश्चर्यजनक रूप से, पहले दिन से ही, जब मैंने फालुन दाफा का अध्ययन करना शुरू किया और अभ्यास कर रहा था, तो मेरा अस्थमा जादू की तरह गायब हो गया और मेरे एलर्जी के लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार हुए। मैंने इनहेलर्स का उपयोग करना और सांस लेने का अभ्यास करना बंद कर दिया। मुझे जीवन की एक नई परिभाषा मिली,” उन्होंने उत्साहपूर्वक कहा।

डॉ. उत्पल कुमार बिट फालुन दाफा के पांचवें व्यायाम का अभ्यास करते हैं। (Credit: Venus Upadhayaya/NTD India)

चमत्कारी स्वास्थ्य लाभों को याद करते हुए डॉ. बिट ने कहा: “मेरे सहयोगी मेरे स्वास्थ्य सुधार से चकित थे, लेकिन उन्हें इस बारे में थोड़ा सा संदेह था कि कैसे एक आध्यात्मिक प्रणाली इतनी तेजी से उस चीज़ को ठीक कर सकती है जिसके विरुद्ध आधुनिक दवा जूझ रही थी। मैंने उनसे कहा कि बेलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन, ह्यूस्टन (Baylor College of Medicine, Houston) ने 2005 में अध्ययनों का एक सेट शुरू किया था—जिनके नतीजे बताते हैं कि फालुन दाफा अभ्यासिओं की कोशिकाओं ने चयापचय में अधिक कमी दर्शाई है, जो दीर्घकालिकता की एक प्रमुख विशेषता है और सेलुलर स्तर पर बढ़े हुए एंटी-बैक्टीरिया कृत्य को प्रदर्शित किया है। ऐसे बहुत से शोध डेटा हैं जिनका वे संदर्भ कर सकते हैं, मैंने उनसे कहा।”

पश्चिम बंगाल में दूसरों के साथ अपनी चमत्कारी यात्रा साझा करना चाहते हुए, डॉ बिट ने फालुन दाफा की दो पुस्तकें, ज़ुआन फालुन और फालुन गोंग  का बंगाली भाषा में अनुवाद किया। यही नहीं, इस अभ्यास के सिद्धांतों को बेहतर ढंग से समझने के लिए डॉ. बिट ने एक कदम आगे बढ़कर चीनी भाषा भी सीखी।

डॉ. बिट ने अपने साथी नागरिकों को इस अभ्यास के बारे में जानने और उनके जीवन की खोई हुई शांति और सद्भावना को पुनः प्राप्त करने में मदद करने के लिए शहर में विभिन्न पुस्तक मेलों में फालुन दाफा की किताबें पेश कीं। उन्होंने कहा, “हम लोगों को फालुन गोंग की अच्छाई का अनुभव करते देख सकते हैं।”

डॉ. उत्पाल कुमार बिट फालुन दाफा का पांचवां व्यायाम, ध्यान अभ्यास करते हुए। (Credit: Venus Upadhayaya/NTD India)

कोलकाता शहर में झील के पास रबींद्र सरोबर पार्क में घूमते हुए, अपने जीवन के बारे में बात करते हुए डॉ. बिट ने तालाब में कमल के फूलों की सराहना की, विशेष रूप से बड़े गोल पत्तों पर बारिश की चमकदार बूंदों की सराहना की। उन्होंने एनटीडी इंडिया के साथ चल रहे वार्तालाप को एक शांत आचरण के साथ सुनते हुए अपना पूरा पूरा ध्यान दिया।

डॉ. बिट ने कहा, “मैं 60 साल का हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं 40 वर्ष का हूं। जबसे मैंने फालुन दाफा अभ्यास शुरू किया है, तबसे मैंने कोई दवा नहीं ली है। मैं थकान महसूस किए बिना लंबे समय तक चल सकता हूं। मेरे गंजे सर पर बहुत से नए बाल उग आए हैं।”

“ये अदभुत है। मैं अब वास्तव में स्वस्थ और खुश हूँ। मैं मास्टर (श्री ली होंगज़ी, प्रैक्टिस के संस्थापक) के प्रति मेरा आभार व्यक्त नहीं कर पा रहा हूं, मुझे यह दिखाने के लिए कि मेरे घर और मेरे काम में सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों को लागू करना मेरे जीवन को बदल देगा,” उन्होंने कहा।


संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार की ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए सार्वजनिक किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, अभ्यास संगीत, अन्य सामग्री और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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