हेदर क्लार्क ( Heather Clark) के 7 महीने के बेटे, लुकास (Lukas) की दुखद मृत्यु होने के तीन साल बाद, वह एक बार फिर जॉर्डन गोंजालेज नाम की छोटी-सी लड़की में उसके दान किये हुए दिल की धड़कन को सुन सकीं।

जनवरी 2016 में, उस ख़ास दिन को, जब क्लार्क को एरिज़ोना में फीनिक्स चिल्ड्रन हॉस्पिटल में छोटी-सी जॉर्डन से मिलना था, तब उन्हें घबराहट से ज्यादा चिंता हो रही थी। और जैसे ही जॉर्डन और क्लार्क की एक दूसरे से आँखें मिलीं वैसे ही वे एक-दूसरे की ओर दौड़ीं और आपस में गले लग गईं  मानो वर्षों से वे एक ही परिवार का हिस्सा रहीं हों।

वह सुनहरा पल जिसने वास्तव में हेदर के जीवन को बदल दिया, वह था फिर से अपने बेटे की दिल की धड़कन सुनना—उस भावना ने उन्हें निशब्द कर  दिया। स्टेथोस्कोप को 4 साल की जॉर्डन की छाती पर लगाकर, क्लार्क इस भावनात्मक मुलाकात के दौरान रो पड़ीं।

Source: Donate Life Arizona

2013 में यह एक महान निर्णय था जब क्लार्क ने अपने नन्हें से बेटे की मृत्यु के बाद उसके अंग दान करने का साहसी फैसला किया था। उसके बाद, वह अंग प्राप्तकर्ताओं से जुड़ना चाहती थीं, इसलिए वे अंगों के माध्यम से जीवन बचाने के लिए समर्पित एक संगठन “वन लेगसी” (One Legacy) के साथ जुड़ीं।इस बीच, सफल प्रत्यारोपण ऑपरेशन के बाद, जॉर्डन की मां, एस्थर गोंज़ालेज़ (Esther Gonzalez) ने फेसबुक पर क्लार्क के लिए एक संदेश भेजा था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह उनके इनबॉक्स फ़ोल्डर में कहीं दबकर रह गया, जिसके कारण दो साल से अधिक समय तक वह इस बात से अनजान रहीं।

गोंज़ालेज़ ने कहा कि यह दान एक अनमोल उपहार था। गोंज़ालेज़ ने टुडे (TODAY) से कहा, “जब उन्होंने कहा कि दिल अच्छी स्थिति में है, तो मेरी तुरंत यह प्रतिक्रिया थी कि मेरी बेटी को जीने का एक दूसरा मौका मिलेगा।”लेकिन कुछ ही क्षण में मुझे यह एहसास हुआ कि हमारी खुशी के दौरान, एक और माँ दुखी भी तो थी।”

यह घटना दोनों परिवारों को एक साथ ले आई और अब वे जीवन भर के लिए जुड़ गये हैं। इस प्रकार दोनों परिवार हमेशा के लिए ज़िन्दगी के दोनों पहलु यानी ख़ुशी और गम से बंधे रहेंगे। उस मुलाकात के बाद से, उन्होंने अंग दान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने को अपना मिशन बना लिया है।यह निश्चित रूप से एक बहुत ही मार्मिक और विचित्र कहानी है।

लेकिन इसके विपरीत, चीन का कुख्यात अंग प्रत्यारोपण उद्योग लंबे समय से समस्त विश्व में हेडलाइन बना हुआ है। अब तक भी, चीन के अस्पतालों  की वेबसाइटों में अंग प्रत्यारोपण के लिए कम से कम प्रतीक्षा-समय का विज्ञापन दिया जाता है। चीन में बिक्री के लिए उपलब्ध अंगों की वृद्धि के कारण, ही कई विदेशियों का प्रत्यारोपण के लिए आवागमन होता रहता है। आप एक सप्ताह के समय के भीतर ही यहाँ एक अंग खरीद सकते हो जबकि अन्य देशों में प्रतीक्षा-अवधि महीनों या वर्षों से अधिक हो सकती है। यह बताया गया है कि हर साल चीन में 10,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपित होते हैं, जब कि चीन में कोई प्रभावी राष्ट्रीय अंग दान प्रणाली नहीं है। तो फिर यह अंग कहाँ से आते हैं? खैर, इस सवाल का जवाब परेशान कर देने वाला है।

1999 से, फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) के 70 मिलियन से अधिक अभ्यास करने वाले लोग इसके शिकार बन गए हैं और एक सतत अवैध अंग प्रत्यारोपण उद्योग की आपूर्ति की मांग के लिए वे मारे भी जा रहे हैं। फालुन दाफा एक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक ध्यान प्रणाली है। “सत्य, करुणा, सहनशीलता” इसकी मुख्य शिक्षा है, जो पारिवारिक जीवन में, काम करने की जगह पर और दैनिक गतिविधियों में आने वाली परिस्थितियों का सामना करने के लिए शांत और संतुलित रहने पर जोर देती है। फालुन दाफा तेज़ी से दुनिया भर में 140 से अधिक देशों में फैल गया है और वर्तमान में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जाता है। हालांकि, उसके मूल देश—चीन में ही इस अभ्यास पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

 

प्रति जांच रिपोर्टों के अनुसार यह पाया गया है कि चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों को कैदकर उनपर अत्याचार करके उनके अंगों को निकालकर उन्हें मार डाला जाता है। उनके शरीर का अक्सर दाह-संस्कार किया जाता है ताकि कोई सबूत न रहे।

इस उत्पीड़न को रोकने में मदद के लिए, कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें: https://endtransplantabuse.org/2018-petition-india/

शायद आप एक जान बचा लें!


सुरेन राव रचनात्मक क्षेत्र में एक विज्ञापन पेशेवर हैं, जो मुंबई में रहते थे लेकिन अब कोलकाता में रहते हैं और स्वतंत्र लेखन करते हैं। वह ध्यान अनुशासन फालुन दाफा को बढ़ावा देने और अभ्यास करने और चीन में इसके निर्दोष अभ्यासियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है। आप यहां उन तक पहुंच सकते हैं: [email protected]

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