ले थी थान थाई (Le Thi Thanh Thai) 13 वर्ष की थीं जब उन्हें पता चला कि वे हृदय रोगी हैं। अपनी बीमारी को बेहतर समझने के लिए और उसी स्थिति में दूसरों की मदद करने के लिए, उन्होंने एक कार्डियोलॉजिस्ट (cardiologist) के रूप में अपना कैरियर बनाया और चो रे अस्पताल (Cho Ray Hospital) में हृदयविज्ञान विभाग की प्रमुख बन गईं, जो वियतनाम (Vietnam) के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक था।

उन्होंने वियतनामी सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (Vietnamese Society of Cardiology) की भी स्थापना की और वे एशियन-पैसिफिक सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (Asian-Pacific Society of Cardiology) की सदस्य हैं। अपने 50 वर्षीय कैरियर में उन्होंने हृदय रोग विशेषज्ञों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया है और अपने विषय पर कई विद्वत्तापूर्ण लेख लिखे हैं।

डॉ. ले थी थान थाई, चो रे अस्पताल, वियतनाम में सबसे बड़े अस्पतालों में से एक की कार्डियोलॉजी विभाग की पूर्व प्रमुख।

लेकिन उनके चिकित्सा ज्ञान और उनकी कई उपलब्धियों के बावजूद, जैसे साल बीतते गए, थान थाई के हृदय रोग की प्रगति हुई, और आखिरकार उनकी सर्जरी हुई। दुर्भाग्य से, यह ठीक से नहीं हुई। उनका निदान सख्त था, और वह मृत्यु का इंतजार करने अपने घर चलीं गईं।

यह कम नहीं था कि, उनके प्रिय पति लगभग इसी समय अचानक मर गए, और थान थाई पूरी तरह से टूट गईं। वह दोनों, शारीरिक और भावनात्मक दर्द से गुज़र रही थीं, और वह केवल बिस्तर पर लेटे रेहती थी, दूसरे जगत में उनके साथ पुनर्मिलन का इंतजार करते हुए।

चो रे अस्पताल, जहां डॉ. ले थी थान थाई ने वर्षों से काम किया, हमेशा रोगियों के साथ व्यस्त रहता है

लेकिन जब ऐसा लग रहा था कि कोई उम्मीद नहीं थी, तो एक आशा प्रकट हुई। थान थाई ने अपना जीवन बचाने का एक तरीका पाया—और यह मेडिकल हस्तक्षेप के माध्यम से नहीं था।

जीने का एक दूसरा मौका

डॉ. थान थाई की दोस्त और सहयोगी, डॉ. थू (Dr. Thu), चिकित्सा विज्ञान में वर्षों के अनुभव के साथ एक विशेष सलाहकार, कंबोडिया शाही परिवार और सरकारी अधिकारियों के लिए चिकित्सा सेवाओं की प्रभारी थीं, और 22 साल के लिए उन्होंने कंबोडिया और वियतनाम के बीच काम किया।

एक दिन, डॉ. थू ने डॉ. थान थाई को चीन से एक पारंपरिक आत्म सुधार अभ्यास के बारे में बताया जिसे फालुन दाफा या फालुन गोंग कहते हैं। उन्होने कहा कि इस अभ्यास ने चमत्कारिक रूप से उनकी स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक किया था।

20 से अधिक वर्षों तक, थू एक स्नायविक (neurological) रोग से पीड़ित थीं। उसके ऊपर उन्हें रुमेटाइड गठिया था, जो असुविधाजनक घुटने के दर्द का कारण बना और उन्हें अपने पैर मोड़ने या बहुत लंबे समय तक खड़े रहने से पीड़ा होती थी।

हालांकि, फालुन दाफा का अभ्यास करने, और अभ्यास करने की मुख्य पुस्तक झुआन फालुन  का अध्ययन करने के दो महीने बाद, थू ठीक हो गई थीं। वे फालुन दाफा के सभी पांचों अध्ययन को बिना किसी समस्या के साथ अभ्यास कर पाती थी, चाहे वह खड़े होकर करने वाले हो या फिर पैर मोड़कर कमल की अवस्था में ध्यान करना हो।

डॉ. ले थी थान थाई अपनी छोटी उम्र में

थू ने कहा कि इस अभ्यास ने उनका अपना जीवन बदल दिया था है और अब वह खुद थान थाई को ये अनुभव दिलवाना चाहती थी।

थान थाई ने कहा, “वह इतनी प्रसन्न थी कि उन्होने एक ही बार में किताबें, कैसेट और किताब ज़ुआन फालुन मुझे ला कर दीं। उन्होने मुझसे कहा: ‘इस अध्यात्मिक अभ्यास का धन्यवाद जिसने मुझे पूरी तरह से ठीक किया है। आप बस देख रहे हैं कि मैं अभी कैसे स्वस्थ और जवान हूँ। मैंने एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी और रुमेटाइड गठिया पर काबू पा लिया है। यदि आप चाहें, तो मैं आपको अभी दिखा सकती हूं कि मैं कैसे इसका अभ्यास करती हूँ। दरअसल, कोई बात नहीं, बस पुस्तक को पहले पढ़ें।”’

जब थान थाई ने ज़ुआन फालुन  पढ़ना शुरू किया, तब अचानक उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने फालुन दाफा के बारे में पहले भी सुना था। बारह साल पहले, एक और सहयोगी, डॉ. थोई थू ताई, (Dr. Thoi Thu Tai,) ने उन्हें इस अभ्यास के बारे में बताया था।

©TianTi Books

“उन्होने मुझे कहा था, ‘थाई, मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं और मुझे कोई दवा लेने की ज़रूरत नहीं है। अब मुझे मसूड़ों से रक्तस्राव, साइनासाइटिस और रुमेटाइड गठिया नहीं रहा है। आपको इस पुस्तक को पढ़ना चाहिए”,थान थाई ने याद करते हुए कहा।

हालांकि, उस समय, उनके वैज्ञानिक, सबूत-आधारित पृष्ठभूमि के कारण थान थाई ने फैसला किया था कि फालुन दाफा उनके लिए नहीं था। उन्होंने उसपर बिलकुल ध्यान नहीं दिया था।

इस बार, थान थाई ने यह निर्धारित किया था कि यह जादुई प्रतीत होते अभ्यास को उन्हें फिर से अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने तुरन्त फालुन दाफा को गले लगाया, नियमित रूप से पांच व्यायाम किये, शिक्षाओं का अध्ययन किया, और सत्य -करुणा-सहनशीलता के मार्गदर्शक सिद्धांत के साथ जतन से जीने का प्रयास किया।

कुछ समय बाद वह ठीक होने लगीं। उनका स्वास्थ्य, ताकत और जीवन शक्ति फिर से हासिल हो गई। अब, वह बिना किसी समस्या के साथ तीन या चार सीढ़ियों पर चढ़ सकती है—जो उनकी हालत के साथ पहले असंभव था। वे अभी अधिक हँसमुख और संतुष्ट हो गईं हैं।

जिस समय वह 70 साल की हुई थी, थान थाई ने वियतनाम में फालुन दाफा सम्मेलन में अपनी बात बताई थी। सैकड़ों दर्शकों के सामने उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि इस प्राचीन चीनी अभ्यास ने उन्हें कई तरीकों से कैसे फायदा पहुंचाया था।

उन्होंने फालुन दाफा के संस्थापक और टीचर श्री ली होंगज़ी से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपना भाषण समाप्त किया था: “मैं पूरी तरह से टीचर ली की कृपा के लिए आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे जीवन में दूसरा मौका दिया है,” उन्होने कहा।


संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार की ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए सार्वजनिक किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, अभ्यास संगीत, अन्य सामग्री और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

Share

वीडियो

Ad will display in 10 seconds