निर्दोष लोगों को बड़े पैमाने पर उनके अंगों के लिए मारना इतना घृणित है कि कई लोगों को विश्वास करना मुश्किल, यहाँ तक कि असंभव लगता है।

नेशनल हेल्थ एथिक्स वीक (National Health Ethics Week) में यूनिवर्सिटी ऑफ़ अल्बर्टा (University of Alberta) के जॉन डॉसेटर हेल्थ एथिक्स सेंटर (John Dossetor Health Ethics Centre) के निदेशक, प्रोफेसर गैरी गोल्डसैंड (Gary Goldsand) ने अप्रैल 5 को यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओटावा (University of Ottawa) में एक कार्यक्रम में कहा, “बड़े पैमाने पर अत्याचारों को पहचानने के बाद, जिन्हें समझना मुश्किल है, हमें ‘अब कभी नहीं’ के निरंतर ऐतिहासिक सबक की याद दिलाई जाती है।  ।

गोल्डसैंड चीन में विवेक के फालुन गोंग कैदियों के राज्य-आयोजित जबरन अंगों के प्रत्यारोपण का जिक्र कर रहे थे, जिसमें दमदार सबूतों ने अमेरिका और यूरोपीय संसद के प्रस्तावों सहित कई अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाइयों को लागू किया गया है और प्रत्यारोपण के लिए चीन की यात्रा करने वाले नागरिकों के लिए कई देशों के कानूनों में बदलाव लाया गया है।

गोल्डसैंड ने कहा, “यह बिना कहे समझने की बात है कि एक पूर्ण पारदर्शी रेखा होनी चाहिए। चीन में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए, जो इस व्यवसाय में शामिल है, उन सभी के लिए यह उन सिद्धांतों का मौलिक उल्लंघन है जो हम सब को प्रिय हैं।”

गोल्डसैंड वृत्तचित्र “हार्ड टू बिलिव” की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के बाद एक चर्चा में वीडियो लिंक के माध्यम से बोलने वाले एक पैनलिस्ट थे।

यह बहु-पुरस्कार विजेता फिल्म यह समझाती है कि चीन में कैसे प्रत्यारोपण सर्जन मूल रूप से हत्या कर रहे हैं जबकि अस्पतालों और चीनी कम्युनिस्ट शासन को भारी लाभ हो रहा है और जिसको दुनिया ने काफी हद तक अनदेखा कर रखा है।

वृत्तचित्र व्यक्तिगत कहानियों के माध्यम से मानवाधिकार अत्याचार को एक मानव चेहरा नियत करती है जिसमें एक सर्जन का इकबालिया बयान शामिल है।

(बाएँ से दाएं) डेविड मटास (David Matas) और इथन गटमन (Ethan Gutmann) के साथ डेविड किल्गोर ( David Kilgour), “ब्लडी हार्वेस्ट / द स्लॉटर: एन अपडेट” (Bloody Harvest/The Slaughter: An Update) के सह-लेखक, जून 2016 में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट चीन के लाभप्रद अंग प्रत्यारोपण उद्योग पर दो पिछली जांच के अपडेट प्रदान करते हैं। (Simon Gross/The Epoch Times)

प्रत्यारोपण उद्योग की तेजी से वृद्धि

एक और पैनलिस्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ़ मनीतोबा ( University of Manitoba) में मानव अधिकार अनुसंधान केंद्र (Centre for Human Rights Research) के साथ एक सहयोगी प्रोफेसर और शोध सहबद्ध मारिया चेंग (Maria Cheung) ने 2000 से चीन में अंग प्रत्यारोपण की तीव्र वृद्धि को दर्शाने वाले आंकड़ों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने अपनी प्रस्तुति में कहा, “चीन में अंग प्रत्यारोपण की मात्रा और पैमाने आधिकारिक आंकड़ों को कई गुना पार करती है।” उन्होंने आगे कहा कि “यह पूरे राज्य तंत्र, सैन्य और नागरिक चिकित्सा प्रतिष्ठानों द्वारा किया जाता है।”

चीन का आधिकारिक आंकड़ा प्रति वर्ष 10,000 प्रत्यारोपण है। इसके विपरीत, एक जून 2016 की जांच रिपोर्ट ने अनुमान लगाया कि 2000 से 2015 तक चीन में एक वर्ष में 60,000 से 100,000 प्रत्यारोपण हुए थे, और इनका स्रोत मुख्य रूप से बिना सहमती देने वाले फालुन गोंग के विवेक के कैदी थे।

चीन ने 1960 के दशक में मानव अंग प्रत्यारोपण में अनुसंधान और नैदानिक प्रयोगों का संचालन करना शुरू किया, लेकिन 2000 के बाद ही इस उद्योग में भारी वृद्धि हुई।

शोधकर्ताओं, जिनमें सबसे उल्लेखनीय कनाडाई डेविड किल्गोर और डेविड मटास, पूर्व कैबिनेट मंत्री और एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार वकील, क्रमशः, और अमेरिकी जांच पत्रकार और चीन के विश्लेषक ईथन गटमन ने इसे फालुन गोंग, जो एक आध्यात्मिक अभ्यास है, जिसे फालुन दाफा भी कहा जाता है, के खिलाफ उत्पीड़न के दूरगामी अभियान से जोड़ा है। ।

1999 में कम्युनिस्ट शासन द्वारा शुरू किया गया, फालुन गोंग को बदनाम करने के लिए उत्पीड़न और घृणित प्रचार अभियान के साथ बड़ी संख्या में अनुयायी, देश की विशाल जेलों और जबरन श्रमिक शिविर प्रणाली में पहुँचा दिए गए।

फालुन गोंग के वैंकूवर (Vancouver) के अभ्यासी अप्रैल 6, 2018 को चीनी दूतावास के बाहर एक रैली में कनाडाई सरकार को कनाडा के नागरिक और वैंकूवर स्थित अभ्यासी सुन चिआन (Sun Qian) की तत्काल रिहाई की मांग करने के लिए कहते हैं, जिन्हें फालुन गोंग में उनकी आस्था के लिए एक साल से अधिक समय तक चीन में हिरासत में रखा गया है। (Tang Feng/The Epoch Times)

स्पष्ट सब्दों में कहे गए, कनाडा के कुछ ‘फर्स्ट’

फालुन दाफा एसोसिएशन ऑफ कनाडा के अध्यक्ष, पैनलिस्ट झुन ली (Xun Li) ने जब यह समझ लिया कि “यह जानकारी बहुत जबरदस्त है,” तब उन्होंने कहा, “किसी भी अन्य देश से पहले, उत्पीड़न की निंदा करने के लिए कनाडा ने दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाई है।”

ली ने कहा कि द ग्लोब और मेल (The Globe and Mail) की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 1999 में फालुन गोंग के अनुयायियों की गिरफ्तारी और हिरासत के बाद कनाडा ने चीनी विदेश मंत्रालय में आधिकारिक विरोध दायर किया।

मार्च 2014 में मानवाधिकार परिषद की बैठक में ऐसा करते हुए उन्होंने कहा, “कनाडा संयुक्त राष्ट्र में भी अंग प्रत्यारोपण की चिंता को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने वाला पहला देश था।”

ली ने कहा कि उन्हें आशा है कि फरवरी 2017 से फालुन गोंग में उनके विश्वास के लिए चीन में कैद किये गए एक कनाडाई नागरिक सून चियान की रिहाई करवाने के लिए कनाडाई सरकार भी सार्वजनिक रूप से बात करेगी।

ली ने कहा कि सून को उनके विश्वास को त्यागने पर मजबूर करने के लिए उन्होंने दुर्व्यवहार, यातना और हालिया गहन प्रयासों का सामना किया है। उनके वकीलों पर एक के बाद एक उनका केस छोड़ देने के लिए दबाव डाला गया। और अब वह अप्रैल 9 को निर्धारित एक मुकदमे का सामना कर रही है, जिसके लिए उनके नए वकील को तैयारी करने के लिए बहुत कम समय दिया गया है।

“सून चियान के मामले के लिए, मुझे उम्मीद है कि कनाडाई सरकार सार्वजनिक रूप से बात करेगी, जिससे चीन सबसे ज्यादा डरता है। अंग प्रत्यारोपण के साथ भी वही बात है। जब आप सार्वजनिक रूप से बेनकाब हो जाते हैं, तो यह सबसे शक्तिशाली होता है। “

दिसंबर 12, 2017 को ओटावा में एक पार्लियामेंट हिल प्रेस कॉन्फ्रेंस (Parliament Hill press conference) में  सेनेटर सल्मा अताउल्लाजन (Sen. Salma Ataullahjan) अपने नए अंग तस्करी बिल के बारे में बताती हैं, जबकि एमपी गार्नेट जीनिअस (MP Garnett Genuis) उनके साथ खड़े हुए नज़र आते हैं (Limin Zhou/The Epoch Times)

जबरन अंग प्रत्यारोपण के विरुद्ध जंग

श्रोताओं से एक आम सवाल यह था कि अत्याचार रोकने में मदद करने के लिए कनाडाई क्या कर सकते हैं। ली ने कहा कि वे एमपी गार्नेट जीनिअस (MP Garnett Genuis) के निजी सदस्य के बिल, Bill C-350 का समर्थन करने के लिए याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिसका उद्देश्य जबरन अंग प्रत्यारोपण से लड़ना है।

“किसी व्यक्ति के लिए, यह जानते हुए कि बिना किसी सहमति के प्राप्त अंग को वह स्वीकार कर रहे हैं, तो यह उनके द्वारा किया गया एक अपराध बन जाता है। यह कनाडा में जबरन अंगों के प्रत्यारोपण में शामिल लोगों को भी अस्वीकार्य करता है,” जीनिअस ने अप्रैल 2017 में समझाया जब उन्होंने अपना बिल पेश किया।

जीनिअस के बिल को तेजी से आगे बढ़ाने की उम्मीद में, सीनेटर सल्मा अताउल्लाजन (Senator Salma Ataullahjan) ने बाद में उसी वर्ष, सीनेट में लगभग समान बिल Bill S-240 पेश किया।

ली ने कहा कि उन बिलों को सफल बनाने के लिए एकजुट प्रयास की जरूरत है, ऐसे देशों के नक्शों कदम पर चलते हुए जो इस तरह के कानून पारित कर चुके हैं, जिसमें इज़राइल, इटली, स्पेन और ताइवान शामिल हैं।

अप्रैल 5, 2018 को यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओटावा में “हार्ड टू बिलिव” फिल्म स्क्रीनिंग पर मानव तस्करी रोकने के लिए ओटावा समूह के साथ काम कर रहे एक स्वयंसेवक कैथरीन लेमे (Katherine Lemay)। (Jian Ren/The Epoch Times)

‘आशा का बीज’

चेंग (Cheung) ने दर्शकों को सुझाव दिया, “अपने चीनी मित्रों से बात करें [इस मुद्दे पर], खासतौर पर मुख्य भूमि चीन के लोगों के साथ।” वे शायद यह कहें कि वे चीन में रहते थे लेकिन इसके बारे में उन्होंने कभी नहीं सुना,” उसी तरह जैसे कि “लोगों को पता नहीं था कि 1989 में तियाननमेन स्क्वायर (Tiananmen Square) में छात्रों की हत्या कर दी गई थी।”

ऐसा इसलिए है क्योंकि कम्युनिस्ट शासन अपने द्वारा की गई हिंसा को जल्दी से छिपा देते है, विशेष रूप से इसलिए “क्योंकि यह अधिनियम, यह बुराई, चीन के समाज पर ज़ाहिर होने पर, [चीनी कम्युनिस्ट] पार्टी टिक नहीं सकेगी। यही कारण है कि वे इसे इतना छिपाते हैं,” ली ने कहा।

गोल्डसैंड ने दुनिया भर में प्रत्यारोपण पेशेवरों को चीन में अपने समकक्षों से अपील करने की सलाह दी, जबरन अंग प्रत्यारोपण के अपराध का मुकाबला करने के लिए एक अतिरिक्त तरीके के रूप में।

उन्होंने कहा, “चीनी सरकार को राजनीतिक स्तर पर बदलना बहुत मुश्किल है।” “निश्चित रूप से हमें अपनी आवाज उठाना जारी रखना चाहिए और इस अत्याचार को अच्छी तरह से ज़ाहिर करना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि सरकारों को अपील करने से ज्यादा प्रभावी यह होगा कि जो पेशेवर इसमें शामिल है उनसे अपील की जाए।”

कैथरीन लेमे (Katherine Lemay), जो मानव तस्करी खत्म करने के लिए काम कर रहे ओटावा समूह के लिए स्वयंसेवक हैं, जिस समूह का अंग निकालने और प्रत्यारोपण करने के उद्देश्य से की गई मानव तस्करी समाप्त करने के लिए समर्पित एक समिति है, ने कहा, “यह चौंकाने वाला है।”।

उन्होंने कहा, “यह वृत्तचित्र बहुत सारा प्रकाश डालता है, लेकिन हमें और अधिक प्रकाश, अधिक जागरूकता की आवश्यकता है… इसमें और डेटा संग्रहण में अधिक शोध करने की ज़रुरत है, साथ ही साथ नीतियों को तदनुसार बदलने की।”

यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओटावा में कानून के डॉक्टरेट उम्मीदवार श्रोताओं के सदस्य एडम ह्यूस्टन (Adam Houston) ने कहा, “जो भी इसके बारे में सुनता है वह उससे गहराई से प्रभावित होता है।” “जितना अधिक वे इसके बारे में सुनते हैं, … मुझे उम्मीद है कि इससे वास्तव में परिवर्तन को लागू करने और इस मुद्दे पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।”

ली ने दर्शकों से कहा, “हमारी भूमिका यह है कि हम अधिक लोगों को यह बताएं। आज आप इस मुद्दे को समाज के सामने लाने के लिए आशा के बीज हैं।”

चेंग ने कहा, “अगर हम चुप रहें, तो हम भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।”

द एपोक टाइम्स (The Epoch Times.की अनुमति के साथ प्रकाशित।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds