इस दुनिया की कुछ प्रेरणादायक कहानियां ऐसी हैं जिनका कोई परिशिष्ट नहीं हो सकता। यह अद्वितीय कहानियां दृढ़ता, दूरदृष्टि, और विश्वास की भावना में गहराई से जड़ी हुई हैं जो नए साहस के साथ मानवता को ऊपर उठाती है और प्रेरित करती है। जब तक की यह अदभुत वास्तविक जीवन की कहानी सामने नहीं आई, ब्यूटी क्वीन की भूमिका पेजेंट्स, रैंप और मानवतावाद के बारे में हुआ करती थीं। इससे पहले कभी भी एक युवा मिस वर्ल्ड ने एक सत्तावादी शासन को चुनौती देने और लाखों लोगों की आवाज़ बनने की भूमिका नहीं निभाई थी।

इस विशेष साक्षात्कार में, एनटीडी इंडिया अनास्तासिया लिन (Anastasia Lin)—एक चीनी-कनाडाई अभिनेत्री, मिस वर्ल्ड कनाडा 2015 और ख़ास तौर पर विवेक की आजादी के लिए एक मुखर वकीलआज तक की उनकी यात्रा और भारत के लिए उनके विशेष लगाव के बारे में उनसे बात की।

एनटीडी इंडिया: आपने मिस वर्ल्ड कनाडा 2015 जीता लेकिन चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड पेजेंट में उस वर्ष भाग नहीं ले सकीं। वैश्विक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह चीन में होने वाले विभिन्न मानवाधिकार उल्लंघनों पर आपकी मुखरता के कारण हुआ। यह समझना मुश्किल है कि कौन सी समस्या इतनी डरावनी हो सकती है कि कम्युनिस्ट शासन, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, एक सौंदर्य रानी से इतना चुनौतीपूर्ण महसूस करती है। क्या आप इस मुद्दे पर कुछ प्रकाश डाल सकती हैं?

अनास्तासिया लिन: मुझे लगता है कि उन्होंने ज्यादा ही प्रतिक्रिया की। वे एक बहुत ही अलग कार्यनीति चुन सकते थे और शायद उन्हें इस घटना से एक बेहतर नाम मिल गया होता। लेकिन उन्होंने हमेशा की तरह अपनी प्रतिक्रिया करने का फैसला किया, जो है लोगों को अवरुद्ध करना। वे लंबे समय से, कार्यकर्ताओं के साथ, पत्रकारों के साथ ऐसा कर रहे हैं। जो लोग उनके बारे में बात करने की हिम्मत रखते हैं उन्हें आमतौर पर चीन, उसके संसाधनों और यहां तक ​​कि उसके बाजार तक की पहुंच इंकार कर दी जाती है। ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि मैंने चीन में विश्वास के उत्पीड़न के बारे में विभिन्न सरकारों से बात की है और गवाही दी हैइसलिए शायद मेरे मामले में ऐसा हुआ है।

एनटीडी इंडिया: चीन में विवेक के कैदियों से जीवित अंग निकालने के बारे में आप विभिन्न वैश्विक मानवाधिकार मंचों पर बहुत मुखर रही हैं। आप यू.एस. और यू.के. संसद द्वारा पारित दो प्रमुख हालिया प्रस्तावों के परोक्ष में शामिल रही हैं। यह मामला किस ओर बढ़ रहा है?

अनास्तासिया लिन: अक्सर यह माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास चीन में कोई भी बदलाव करवाने की पर्याप्त शक्ति नहीं है, लेकिन यह सच नहीं है। चीन की नीति वास्तव में बाहरी दुनिया पर प्रतिक्रिया करती है।

उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में चीनी सरकार ने स्वीकार किया है कि वे प्रत्यारोपण के लिए अपराधियों, निष्पादित कैदियों के अंगों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे अब यह ख़त्म करने वाले हैं, लेकिन अतीत में उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया है कि वे कैदियों के अंगों का उपयोग कर रहे हैं। वे हमेशा कहते हैं कि वे अज्ञात स्रोतों से हैं। तो हमने उनसे इस तथ्य को स्वीकार करवाया। 2016 और 2017 में, उन्होंने इस “राष्ट्रीय अंग दान प्रणाली कार्यक्रम” को शुरू किया। यह चीन में अतीत में कभी नहीं किया गया है। हालांकि यह “असली कार्यक्रम” नहीं हो सकता है, यह शायद बाहरी दुनिया को दिखावा करने के लिए हो सकता है: “ओह, हम प्रगति कर रहे हैं। हम सुधार करने जा रहे हैं।”

इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अस्पताल और जेल से जुड़ी उनकी आपूर्ति श्रृंखला तोड़ दी गई है, और अभी तक इसे प्रतिबंधित करने का कोई कानून नहीं है, लेकिन कम से कम वे खुद को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। चीनी सरकार को यह परवाह है कि बाहरी दुनिया उनके बारे में क्या सोचती है, चाहे वह कितने भी शक्तिशाली और अविनाशी दिखते हों। वे अंदर से बहुत कमज़ोर हैं।

चीनी प्रत्यारोपण समाज बाहरी दुनिया से उस मान्यता को पाने के लिए बेताब है। हम इन्हें सुधार लाने के लिए इसका लाभ उठाने के रूप में उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसका उपयोग करना या ना करना हम पर निर्भर है।

एनटीडी इंडिया: “मुझे चुप्पी और बेहतर चीन की मेरी आशा के बीच चयन करना पड़ा।” आपने ओस्लो फ्रीडम फोरम (Oslo Freedom Forum) में आगे कहा था कि चुप्पी किसी के काम नहीं आती। लेकिन आपकी मौखिकता के कारण चीन में आपको और आपके परिवार को कई बार धमकी दी गयी है। क्या है जो आपको निर्भीक बनाए रखता है और आगे की ओर बढाता है?

अनास्तासिया लिन: मेरी इस यात्रा के किसी भी हिस्से के दौरान, मैं हार मान सकती थी। बहुत से निर्णय कठिन थेलेकिन वे मेरे निर्णय थे। मुझे एक समय में एक दिन, एक समय में एक अभियान, और एक समय में एक कारण लेकर चलना चाहिए था। मैं 2016 मिस वर्ल्ड के लिए गयी थी, जिसमें मैंने दूसरी बार भाग लिया था। मैं मंच पर जबरन अंग निकालने के बारे में बात करने वाली थी। मैंने सचमुच सोचा था कि यह आखिरी बार होगा कि मैं मानवाधिकारों के लिए वकालत कर पाऊंगी। यह वास्तव में कठिन था, और प्रगति तुरंत ही नहीं हुई थी। मुझे मिलने वाली एकमात्र संतुष्टि यह है कि कभी-कभी मैं लोगों को अपनी बात से सहमत होते देखती हूं, या जब, आकस्मिक तौर पर या कभी कभी, पीड़ित मेरे पास आते हैं और धन्यवाद करते हैं।

मुझे लगता है कि साहसी होना, यह एक जागरूक निर्णय नहीं हैआपको साहस महसूस नहीं होता है, आपको शक्ति महसूस होती है, एक सुरक्षा की भावना। यह ऐसा है कि जब मैं निर्णय लेती हूं, तो मुझे यह स्वीकार करना होगा कि जो परिणाम होगा वह सर्वोत्तम संभव परिणाम
होगाअन्यथा मैं आगे नहीं बढ़ सकती। मुझमें साहस तब आता है जब यह सबसे अप्रत्याशित होता है, जब मैं अपने बारे में नहीं सोच रही होती, और जब मैं दुनिया की ओर देखती हूं और महसूस करती हूं कि पूरा ब्रह्मांड प्रचुरता से भरा है। यह मुझे दंडित करने के लिए यहां नहीं है; यह यहां है, शायद, मेरा मार्गदर्शन करने के लिए, यह खोज करने के लिए कि उसने क्या क्या बनाया है, मुझे भी।

एनटीडी इंडिया: डेविड फीथ (David Feith) द्वारा वॉल स्ट्रीट जर्नल (The Wall Street Journal) का लेख आपको एक ऐसी सौंदर्य रानी के रूप में वर्णित करता है जिन्हें डोनाल्ड ट्रम्प को मिलना चाहिए। यह ध्यान में रखते हुए कि आप एक बार भारत आई हैं, हम जानना चाहते हैं कि वहां कोई विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति है जिसे आप मिलना चाहती हैं और आप उन्हें क्या कहना चाहेंगी?

अनास्तासिया लिन: मैं सच में आमिर खान से मिलना चाहूंगी। मैंने 3 इडियट्स  देखी, यह इतनी वास्तविक और असली है, और वह कितने सच्चे हैं। यह एक कॉमेडी है, और मैंने पहले उनकी कोई फिल्म नहीं देखी थी। वह एक अनुभवी कलाकार है, और मैं उनकी कला से इतना भावुक हुई हूँ। मैंने देखा है कि वे अपने पात्रों पर कितनी मेहनत करते हैं। मुझे वह बहुत ही पसंद है।

एनटीडी इंडिया: आप अक्सर अपनी विभिन्न वार्ता में “सत्य, करुणा, और सहनशीलता” का उद्धृत करती हैं। इन मूल्यों से जीने के दौरान आप अपने जीवन को एक मॉडल, एक अभिनेत्रि और एक मानव अधिकार कार्यकर्ता के रूप में कैसे संतुलित करती हैं?

अनास्तासिया लिन: सत्य, करुणा, और सहनशीलता चीनी पारंपरिक शिक्षण से आती है। यदि हम चीनी पारंपरिक संस्कृति को देखेंजो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा लगभग नष्ट कर दी गयी थी— तो बौद्ध धर्म, ताओवाद और कन्फ्यूशियसवाद, यह तीन बड़ी शिक्षण की विचारधाराएँ है। बौद्ध धर्म करुणा में विश्वास करता है, ताओवादी सच्चाई में विश्वास करते हैं, और कन्फ्यूशियनिज्म सहिष्णुता में विश्वास करता है। “सत्य, करुणा, सहनशीलता” पूरी चीनी पारंपरिक संस्कृति का सारांश करती है। शायद यही कारण है कि 1990 के दशक में चीनी लोगों ने वास्तव में एक ऐसे अभ्यास को झपटकर पकड़ लिया जो इन सिद्धांतों की सीख देता है और उन्हें इन सिद्धान्तों के साथ जीने के लिए प्रोत्साहित करता है और यही कारण है कि यह इतना लोकप्रिय, इतना तेज़ी से हो गया।

मैं इन सिद्धांतों के बारे में बात करना पसंद करती हूँ क्योंकि यह चीनी पारंपरिक संस्कृति को इतना अधिक सम्मिलित करता है। मैं समकालीन, व्यस्त आधुनिक दुनिया के लिए सहानुभूति रखती हूं, यह प्राचीन ज्ञान बहुत उपयोगी है।

एनटीडी इंडिया: आप 20 से अधिक फिल्मों और टेलीविजन प्रस्तुतियों में शामिल हुइ हैं, और चीन में मानवाधिकारों के उत्पीडन के विषयों पर आधारित कई फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई है। उन भूमिकाओं में से कौन सी आपकी व्यक्तिगत पसंदीदा है और क्यों?

अनास्तासिया लिन: मेरा अभी तक का कोई पसंदीदा नहीं है। इन भूमिकाओं के लिए बहुत से पीड़ितों ने उनके अनुभवों को दुबारा जीकर मुझसे बात कीऔर यह वास्तव में कठिन है क्योंकि उन्होंने जो भी सहा है वह भयावह है। चीन में अभी भी लाखों लोग हैं जो अभी भी इसके माध्यम से गुज़रते हैं, और उन्होंने जो अंधकार वर्णन किया है वह मुझमें बस गया है। मुझे लगता है कि इन भूमिकाओं को चित्रित करने के बाद, मेरे वजूद का कुछ हिस्सा उन लोगों के साथ फंस गया था, उन जेलों में, और यह एक बहुत भारी बोझ की अनुभूति होती है।

इसलिए, मैं नहीं कह सकती कि मेरा कोई पसंदीदा है क्योंकि उनमें से कोई भी मेरे दिल को हल्का नहीं महसूस कराता। यह मुझे एक तरह से मानवीय साहस का एहसास दिलाता हैजो मानव का दृढ़ संकल्प संभवतः कर सकता है, बाहरी परिस्थितियों को अनदेखा करते हुए, उनका भीतरी हिस्सा, उनके दिल, बेहद मजबूत है।

और मैं इस व्यक्ति को जानती हूँ जिनका दुर्भाग्य से निधन हो गया है। उन्हें मसंजिया श्रम शिविर (Masanjia Labour Camp) में कैद किया गया था, जो (चीन में) सबसे कुख्यात श्रम शिविर है, फिर भी उन उत्पादों के माध्यम से वे एसओएस पत्र भेजने में कामयाब रहे, जिन्हें उन्हें मजबूरन बनाना पड़ता था। अब उनकी कहानी के बारे में लेटर्स फ्रॉम मसंजिया (Letters from Masanjia) नामक एक नई वृत्तचित्र है। मैंने कभी उनसे बात नहीं की, लेकिन जब वे वृत्तचित्र तैयार कर रहे थे, मैंने उनसे किये गए कुछ साक्षात्कार देखे।

उन्होंने ऐसी शारीरिक यातना के प्रकार को सहन किया जो अन्य लोग आमतौर पर 10 मिनट तक भी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं, उन्होंने इसे एक साल तक सहन किया। मुझे लगता है कि वह जीवन में अपने विश्वास के कारण इतना सहन कर पाए; बाहरी दुनिया को जीतने के लिए उनके साहस को कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं थी।

उस भावनात्मक गहराई के स्तर में खुद गोता लगाना मुश्किल हैलेकिन यह कहीं गहराई तक पहुंचता है। लोग कहते हैं कि केवल दर्द के साथ आप बढ़ते है; मैं इसपर पूरी तरह से विश्वास नहीं करती, क्योंकि खुशी भी बहुत सी शांति और विकास ला सकती है।

एनटीडी इंडिया: आपकी आने वाली परियोजनाएं क्या हैं? क्या आप मुख्यधारा फिल्में करने की योजना बना रही है? भारतीयों के लिए अपनी फिल्मों में से एक की सिफारिश करें।

अनास्तासिया लिन: मेरी आगामी परियोजना एक कनाडाई नागरिक के बारे में है जो चीन में अब डेढ़ साल से कैद हैं। वह एक कनाडाई महिला है, वे फालुन गोंग का अभ्यास करने के लिए कैद कर ली गई थीं। और कनाडाई सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। मैं उनके मामले के लिए वकालत करने की कोशिश कर रही हूँ। मैं उनके लिए वकालत करने, चीनी सरकार को फोन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council) में गयी थी। मैंने एक याचिका शुरू की जहां 38,000 लोगों ने हस्ताक्षर किए। कुछ नहीं बदला। वह अभी भी वहां कैद है और यातना भी सहन की है, और यह सही नहीं है।

तो मैं एक “लोटस चैलेंज” शुरू करना चाहती हूँ। यह मूल रूप से अपने आप को एक डबल कमल की स्थिति में डालना है, अपने आप का एक वीडियो लेना है, अपने तीन दोस्तों को चुनौती देना और इसे अपलोड कर लेना है। और यदि आपके पास दो मिनट अधिक समय है, तो change.org पर Let’s Bring Sun Qian Home नामक मेरी याचिका पर हस्ताक्षर करें। यदि हर कोई थोडा सा योगदान दें और इसमें उनके मित्र और परिवार भी शामिल हो जाएं, तो जल्द ही हमें दस लाख हस्ताक्षर मिल जाएंगेउम्मीद है कि हम राज्यों के मुखिया और राजनयिकों को वास्तव में कुछ करने के लिए कह सकेंगे, ताकि वे अपने हिस्से का काम करें, इस कनाडाई लड़की को जेल से बाहर निकालने का।

लेकिन यदि हम नहीं करते हैं और हमने उसे वहां छोड़ दिया, तो हम सभी सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि आज चीनी सरकार ने एक कनाडाई को कैद कर लिया है, कल यह एक भारतीय को कैद कर सकते हैं, यह एक अमेरिकी नागरिक भी हो सकता है। वे बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के उन्हें वहां रख सकते हैं। इसलिए मेरा मानना ​​है कि यह बेहतर होगा कि मदद करने के लिए हम अपनी आवाज़ उठाएं और हमारी स्वतंत्रता का उपयोग करें जब तक हमें यह प्राप्त है।

एनटीडी इंडिया: भारत की अपनी समृद्ध विरासत और भव्य इतिहास है। आप भारत के बारे में सबसे ज्यादा क्या पसंद करते हैं?

अनास्तासिया लिन: मैं महाभारत पुस्तक से मोहित हूँमैं वास्तव में इसे पूरा पढ़ना चाहती हूँ। मुझे इस तरह के महाकाव्य पसंद हैं। उनमें कितना सारा ज्ञान होता है। मैं वास्तव में इसे पढ़ना चाहती हूँ। मैंने यह टीवी श्रृंखला देखी। मुझे यह भी पता है कि आमिर खान की आगामी बॉलीवुड परियोजना महाभारत है। मैं इसके लिए बहुत उत्सुक हूँ। इसके अलावा, बुद्ध शाक्यमुनी (गौतम सिद्धार्थ) भारत से हैं।

एनटीडी इंडिया: क्या भारतीय पाठकों के लिए कोई विशेष संदेश है जिसे आप एनटीडी इंडिया के माध्यम से पहुँचाना चाहती हैं?

अनास्तासिया लिन: मुझे भारत के बारे में और बहुत कुछ जानना है, लेकिन मेरी एक धारणा थी कि लोग बहुत स्मार्ट हैं, कुछ हद तक संस्कृति के इतिहास की वजह सेयह बहुत मूल्यवान है। यह सबसे प्राचीन में से एक है जो नष्ट नहीं हुआ है, यह एक खज़ाना है। चीनी लोगों के विपरीतहमने अपनी पारंपरिक संस्कृति का कुछ हिस्सा खो दिया है। तो हाँ, हमारी क्षति से सीख ले लीजिये और जो आपके पास है उसे संजो कर रखिये ।

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