एक शांत संगीत हर सुबह 6.30 बजे बैंगलोर के कब्बन पार्क (Cubbon Park) के विशाल पेड़ों के नीचे बजता है जहां एक महिला रोज़ ध्यान करती हैउनके चेहरे पर की शांती वास्तव में आकर्षक लगती है। जाॅगर्स उनके पास से गुज़रते हैं; कुछ एक पर्चा उठाने के लिए रुक जाते हैं, जबकि कुछ, सामंजस्यपूर्ण क्षण में पूरी तरह से खो जाते हैं, उनके आंख खोलने की प्रतीक्षा करते हैं और उनसे पूछते हैं कि वह क्या कर रही है। यह एक 59 वर्षीय महिला की कहानी है जिनकी जिंदगी फालुन दाफा के शांतिपूर्ण ध्यान अभ्यास को अपनाने के बाद बेहतर हुई।

Credit: Veeresh/ NTD India

चित्रा देवनानी कई अन्य महिलाओं की तरह एक गृहिणी है, लेकिन जो सामने दिखता है उसकी तुलना में वे और बहुत कुछ हैं—और वह इसे “सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों के साथ अपना जीवन जीने का निर्णय” बतलाती हैं। 1947 के विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आए एक सिंधी परिवार में उनका जन्म हुआ और वे पुणे में पली बढीं। चित्रा ने बेंगलुरु के एक सिंधी परिवार में शादी की। एनटीडी इंडिया (NTD India) से बात करते हुए, चित्रा ने कहा कि 35 साल पहले जब उनका विवाह हुआ तो जीवन बहुत अलग था।

उन्होने कहा, “शादी के एक साल बाद मैंने अपने बेटे को जन्म दिया और जल्द ही उसके बाद, गर्भावस्था के कारण गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित हो गई।” “यह 15 साल तक चलता रहा और इस दौरान मैंने अपनी बेटी को जन्म दिया। जीवन आनन्द और दर्द का अजीब मिश्रण था।”

Credit: Chitra Devnani

कष्टकारी पीठ दर्द से रोजाना पीड़ित चित्रा ने कई वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे सुजोक (sujok), एक्यूपंक्चर (acupuncture), एक्यूप्रेशर (acupressure) भी आजमायीं, और यहां तक कि वह स्वयं एक होम्योपैथी (homeopathy) चिकित्सक भी बन गईं—लेकिन किसी से कुछ मदद नहीं मिल रही थी।

“2001 में, बैंगलोर में एक सुजोक चिकित्सा कक्षा के दौरान, सिंगापुर की एक महिला ने मेरे समूह को एक नये अभ्यास—फालुन दाफा नामक प्राचीन ध्यान प्रणाली का परिचय दिया,” उन्होने याद करते हुए कहा।

चित्रा ने इस सरल और शांत अभ्यास के साथ एक त्वरित संबंध महसूस किया, और उन्होने इस अभ्यास को अपनाने का फैसला किया।

Credit: Dai Bing/Epoch Times

तीव्र पीठ दर्द ने उन सभी वर्षों में चित्रा को एक साधारण अवस्था से वंचित कर दिया था लेकिन वह दिन उनके लिए एक नई शुरुआत ले कर आया। उन्होने साझा किया कि जब तक वह भाग्यशाली पल नहीं आया था तब तक उन्होंने सभी दर्द और दुःखों से बाहर निकालने के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन वह उस दिन ही था जब उन्होने महसूस किया कि “ध्यान जैसी सरल चीज़ ने, वास्तव में, उन्हें सभी पीड़ाओं से मुक्त कर दिया था।”

उन्होंने कहा, “मैं इतने लंबे समय से नृत्य करना चाहती थी लेकिन मेरे लिये चलना भी मुश्किल था। इसलिए जब मैंने फालुन दाफा के लयबद्ध और सौम्य गति के अभ्यासों का पालन किया, तब मुझे एक अवर्णनीय हल्कापन और राहत मिली।”

चित्रा कोलार, कर्नाटक में स्कूली बच्चों के साथ फालुन गोंग ध्यान कर रही हैं। (Photo Credit: Veeresh)

चित्रा ने कहा, “मैं बेहद तेज़-मिज़ाज और आराम की इच्छुक थी। धीरे-धीरे मैं यह समझने लगी कि मेरी पीड़ा का कारण मेरी खुदकी गलतियाँ हैं” चित्रा ने कहा। “मेरे अन्दर एक अव्यवहारिक खोज की तलब थी, मेरे जीवन के उद्देश्य के बारे में एक विस्मय था, और फालुन दाफा का अभ्यास करने के बाद मेरी यह खोज खत्म हुई।”

आज, 17 साल बीत चुके हैं और दो बड़े बच्चों की यह प्यारी माँ अभी भी फालुन दाफा के अपने रोज़ के अभ्यास को जारी रखे हैं। और न केवल यह, अत्यधिक स्वास्थ्य लाभों के माध्यम से गुजरने के बाद, उन्होंने “दूसरों के साथ ध्यान साझा करने की इच्छा” महसूस की। इसलिए, चित्रा देश भर में स्कूलों, संगठनों, आश्रमों और पुस्तक मेलों में मुफ्त में इस अभ्यास का परिचय कराने के लिए यात्रा करती रहती हैं।

Credit: Dai Bing/Epoch Times

चित्रा का मानना है कि उद्देश्य की भावना से जीने का मतलब यह नहीं है कि हर उस चीज के लिए अवमानना करना जो “सामान्य” लगती है।

उन्होने कहा, “यह इस बारे में है कि आप दिल से क्या कर रहे हैं। चाहे वह खाना पकाना हो या अपने परिवार की देखभाल करना।” “हर सिन्धी महिला से अच्छा खाना बनाने की अपेक्षा की जाती है। इससे पहले, मुझे घर पर दिन-प्रतिदिन काम करने में भी मुश्किल होती थी। अब मैं स्कूलों और संगठनों में अभ्यास का परिचय कराने के लिए देश भर में घूमती हूं और मैं अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का प्रबंधन भी करती हूं, पहले से बेहतर।”

उन्होने कहा कि उनके “बेहतर स्वास्थ्य ने उन्हें गहरे आंतरिक आनंद और शांति की एक उल्लेखनीय भावना से भर दिया है।”

अपने बेटे, बहु, बेटी और पति के साथ चित्रा। Credit: Chitra Devnani

“मैं बच्चों को यह अभ्यास सिखाने के लिए एक स्कूल से दुसरे स्कूल की यात्रा करती हूं। मुझे बहुत खुशी होती है जब वे मेरे पास वापस आते हैं और साझा करते हैं कि उन्होंने अब झूठ बोलना छोड़ दिया है।”

चित्रा का मानना है कि “हर व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अच्छा होता है और अपने जीवन में एक अच्छा इंसान बनना चाहता है।” उन्होने साझा किया कि वह “एक अच्छा और दयालु व्यक्ति बनने की सुंदरता और खुशी को फैलाने के लिए” उनके मिशन को जारी रखेंगी।

“नैतिकता और अच्छाई जीवन का सार है। आज हमारे विश्व को, सत्यता-करुणा-सहनशीलता की जरूरत है, पहले से कहीं ज्यादा,” उन्होने कहा।

नीचे दिए गए वीडियो में उनके अद्भुत जीवन की यात्रा देखें:


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संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार की ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए सार्वजनिक किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, अभ्यास संगीत, अन्य सामग्री और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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