कुछ लोग इस बात को बेहतर समझते हैं कि उनकी ज़िंदगी में किस चीज़ की अहमियत कितनी है। कर्नाटक की ए वाई काव्या (AY Kavya) भी उन्हीं लोगों में से हैं। काव्य की शादी और परीक्षा एक ही दिन होने वाली थी। इन हालातों में सामान्यतः लोग परीक्षा छोड़ देते हैं या शादी की तारीख आगे बढ़ा देते हैं लेकिन काव्या ने ऐसा कुछ नहीं किया।

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Credit: LiveCities

कर्नाटक के केआर पेटे शहर में स्थित कल्पतरु डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली काव्या बी.कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। इससे पहले बी.कॉम की सभी परीक्षाओं में काव्या ने 90 प्रतिशत से ज़्यादा अंक अर्जित किए थे। ऐसी होनहार छात्रा के लिए परीक्षा छोड़ना कोई विकल्प ही नहीं था लेकिन परीक्षा की तारीख घोषित होने से पहले ही उसकी शादी की तारीख तय हो गई थी। काव्य अपनी शादी के कार्यक्रम को भी नहीं टालना चाहती थी। ऐसा भी नहीं था कि परीक्षा दिन में थी और शादी रात में। शादी का मुहूर्त सुबह 11 बजे का था और परीक्षा का समय सुबह 9.15 से 12.30 तक का था। काव्या रात में भी शादी से जुड़े कई कार्यक्रमों का हिस्सा बनी थीं और इसके बाद सुबह करीब 11 बजे तक परीक्षा भी दी।

काव्य ने जब परीक्षा हॉल में दुल्हन की वेशभूषा में प्रवेश किया तो सब उन्हें देखते ही रह गए। उन्होंने अपना बिज़नेस  टैक्स (Business Tax) की उत्तर-पुस्तिका 10.48 AM तक ख़त्म कर के परीक्षा निरक्षक को सौंप दिया और अपनी शादी के लिए चली गई। काव्य के होने वाले पति लोहित भी उनके फ़ैसले से खुश थे। उनके सगे-संबंधियों और दोस्तों ने भी काव्या के इस कदम की खूब सराहना की।

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काव्या का यह निर्णय उन छात्राओं के लिए प्रेरणा होगा जो ऐसी स्थितियों में परीक्षा छोड़ कर साल भर की मेहनत को बेकार कर देते हैं। बेहतर समाज और बेहतर जीवन के लिए यह बहुत ज़रूरी है की शिक्षा के महत्त्व को समझा जाए और काव्या इस बात का बेहतरीन उदाहरण पेश करती हैं।

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