हर तस्वीर की एक कहानी होती है और हर कहानी की हमारे दिमाग में एक तस्वीर। यह कहानी ऐसे व्यक्ति की है जो अपनी तस्वीरों को बयां नहीं करते बल्कि इनकी तस्वीरें इतनी काबिल हैं कि वो खुद को बयां कर देती हैं। 

क्या हम सोच सकते है कि गरीबी के कारण 11 वर्ष की उम्र में घर से भागने वाला लड़का, जो दिल्ली जाकर रेलवे स्टेशन पर कचरा बीनने लगा वह एक अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फोटोग्राफर बन सकता है? आप बहुत से ऐसे बच्चों और लोगों को ऐसे काम करते हुए देखते हैं जिनको देखकर लोग ऐसा मान लेते हैं कि इन बच्चों का आगे कोई भविष्य नहीं होगा। लेकिन उन्हीं बच्चों में कुछ ऐसे नन्हें सितारे भी होते हैं जिन्हें एक दिन पूरी दुनिया जगमगाता हुआ देखती है।

कुछ ऐसी ही कहानी है मशहूर फोटोग्राफर विक्की रॉय की। विक्की बचपन में कचरा बीनते थे लेकिन आज उन्हें पूरी दुनिया जानती है।

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Credit: Punjab Kesari

विक्की का जन्म पश्च‍िम बंगाल के पुरुलिया में हुआ था। घर में गरीबी और मारपीट का माहौल था, इसलिए विक्की घर से भाग गए थे। लेकिन भागने से पहले उन्होंने अपने चाचा के 900 चुराए और रेल टिकट लेकर दिल्ली पहुंच गए। दिल्ली आने पर वह कूड़ा बीनने वाले बच्चों के साथ मिलकर अपना गुजारा करने लगे। फिर उन्हें एक रेस्टोरेंट में काम मिल गया।

वहीं एक ग्राहक ने विक्की का “सलाम बालक ट्रस्ट” से संपर्क कराया। फिर एक दिन साल 2004 में डिक्सी बेंजामिन (Dixie Benjamin) सलाम बालक ट्रस्ट (Salaam Balaak Trust) आए। विक्की के सामने जब डिक्सी ने असिस्टेंट बनने का ऑफर रखा, तो विक्की की खुशी का ठिकाना न रहा। विक्की को डिक्सी ने एक कैमरा भी खरीद कर दिया। इसके बाद तो विक्की के पांव जमीन पर नहीं थे।

वो दिन था और आज का दिन है, विक्की ने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा। साल 2007 में विक्की ने सोलो शो किया। साल 2009 में उन्हें अमेरिका के “मेबाक फाउंडेशन” (Maybach Foundation) के एक मेंटरशिप प्रोग्राम (Mentorship Programme) के लिए चुन लिया गया। यहां वह 6 महीने तक न्यूयॉर्क (New York) के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (World Trade Centre) के पुनर्निमाण के कामों की फोटोग्राफी करते रहे।

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Credit: Guruhind

वहां उन्होंने जो काम किया वह बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों का हिस्सा बना। लंदन के व्हाइटचैपल गैलरी (Whitechapel Gallery) और स्विटज़रलैंड (Switzerland) के फोटो संग्रहालय जैसी मशहूर जगहों पर भी उनकी फोटोग्राफी ने खूब तारीफें बटोरीं।

विक्की अब देश और दुनिया के नामचीन फोटोग्राफर्स में शुमार हो चुके हैं। उनकी पहली किताब साल 2013 में जारी की गई, जिसका शीर्षक था “होम, स्ट्रीट, होम” (Home. Street. Home), जिसे लोगों ने खासा पसंद किया। विक्की अब अपनी ही तरह आर्थ‍िक रूप से कमजोर छात्रों की मदद करते हैं और उन्हें फोटोग्राफी सिखाने का काम भी करते हैं।

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Credit: Hindustan Times

ज़मीन से जुड़े, अपने कल के एहसास को ज़िंदा रखे हुए, आंखों में ना रुकने वाले वो सपने, हालातों को अपने सामने झुका कर, परिश्रम नाम की उस चाबी से उन्होने अपनी किस्मत के दरवाज़े खोले और आज 27 साल के विक्की रॉय विश्वप्रसिद्ध फोटोग्राफर का खिताब अपने नाम कर चुके हैं।

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