क्रांति हर वर्ष आती है, हर वर्ष कुछ न कुछ बदलता है लेकिन यह आपके जीवन में प्रभावी बदलाव तभी लातीे है जब आप इससे जुड़ने की कोशिश करते हैं या इसके द्वारा लाए गए परिवर्तन को स्वीकार करते हैं। ऐसी ही एक क्रांति आई थी वर्ष 1965 में, जब देश को प्रतिमा पुरी के नाम से पहली समाचार उद्घोषिका मिली थी। उस दिन से आज तक भारतीय टेलिविजन में न जाने कितनी ही महिला न्यूज उद्घोषिकाओं को अपना जीवन संवारने का मौका मिला।

आजादी के ठीक 12वें वर्ष में भारत में टीवी आया। यह तिथि थी 15 सितंबर 1959। इस एक छोटे से टिन या लकड़ी से बने डिब्बे ने न जाने कितने लोगों की जिंदगी बदल कर रख दी। जहाँ लोगों को समाचार और मनोरंजन के लिए एक नया साधन मिल गया वहीं भविष्य के एक बड़े उद्योग की नींव उस दिन रख दी गई थी।

उस समय एकमात्र चैनल हुआ करता था दूरदर्शन, जिसे ऑल इंडिया रेडियो के तहत शुरू किया गया था। बात वर्ष 1965 की है जब 15 अगस्त को दूरदर्शन का नियमित प्रसारण आकाशवाणी भवन के स्टूडियो सभागार से शुरू किया गया था। देश का पहला न्यूज बुलेटिन महज 5 मिनट का था और इसका वाचन किया था प्रतिमा पुरी ने।

उन्होंने शिमला में ऑल इंडिया से शुरूआत की थी और फिर बाद में उन्हें दिल्ली भेज दिया गया। जब घूंघट महिलाओं के लिए अनिवार्य था, प्रतिमा पुरी उस वक्त के छोटे पर्दे पर दिखने वाली पहली महिला थीं। दूरदर्शन में एक लंबे समय तक काम करने के बाद उन्होंने इस पद के इच्छुक लोगों को ट्रेनिंग देनी शुरू की।

उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महान हस्तियों के साक्षात्कार लिए जिनमें अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री रूस के युरी गगारिन जैसी हस्ती भी शामिल है।

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