आज भी जब “गुरू-शिष्य” शब्द का उच्चारण किया जाता है तो मस्तिष्क में रामायण काल के “गुरू-शिष्य” की वो आदर्श छवि उभर आती है। वास्तव में वक्त भले ही बदल जाए लेकिन एक शिक्षक का शिष्य के जीवन में जो स्थान है वह सदैव स्थापित रहेगा। आज हम आपको चेन्नई की एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं जब शिक्षक के तबादले पर बच्चों ने दी उन्हें अश्रूपूर्ण विदाई।

हमेशा मदद को तैयार रहते थे
Credit: One India

वन इंडिया की एक खबर के अनुसार, घटना है तमिलनाडु के चेन्नई की, जहाँ भगवान नामक एक अंग्रेजी शिक्षक का तबादला एक स्कूल से दूसरे स्कूल में हुआ। तबादले की बात स्कूल में जंगल की आग की तरह फैल गई। यह खबर सुनते ही बच्चों को लगा कि जैसे उनसे उनका सबसे अनमोल खजाना छीन लिया गया हो और उन्होंने इस बात का विरोध किया।

आलम यह था कि इस बात का विरोध न सिर्फ विद्यार्थियों ने बल्कि उनके माता-पिता ने भी किया, लेकिन सरकारी चिट्ठी के आगे किसी की एक ना चली। भगवान सिर्फ चार सालों से इस स्कूल में पढ़ा रहे थे। बच्चा-बच्चा उन्हें अपना बड़ा भाई मानता था। जब विरोध करने के बाद भी तबादला नहीं टला तो फिर आया वह दिन जब भगवान ने उस स्कूल और अपने प्यारे बच्चों को अलविदा कहा।

Teacher
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समस्त बच्चों की आँखें आँसू से डबडबा रही थीं और वे प्रार्थना कर रहे थे कि अंतिम समय में भी कोई चमत्कार हो जाए और उनका प्रिय शिक्षक उनके साथ ही रहें, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। भगवान जब स्कूल से जाने लगे तो बच्चे उन्हें पकड़कर रोने लगे। दृश्य इतना भावनात्मक था कि आस-पास खड़े लोगों की आखों में भी आंसू आ गए।

एक छात्र से जब भगवान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि, “भगवान सर के आने से पहले हम में से काफी बच्चों को अंग्रेजी नहीं आती थी। उन्होंने हमारी हौसलाफजाई की, स्पेशल क्लासेस दी और इसके बाद भी जब हम उनसे फोन कर कुछ पूछते तो वे हमें तुरंत बताते थे।”

बच्चों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल
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बच्चों के माता-पिता ने भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से उनके तबादले को रोकने की बात की, लेकिन अधिकारियों का कहना था कि यह एक प्रक्रिया है जिसे उन्हें मानना ही पड़ता है।

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