आईआईटी खड़गपुर में आयोजित किए गए हस्त पुरस्कार के दौरान इस बार एक ऐसी टीम को विजेता घोषित किया गया जो चावल(धान) के भूसे से फर्नीचर और कलम बनाने के प्रोजेक्ट के साथ प्रस्तुत थे। हर वर्ष आयोजित की जाने वाली प्रतियोगिता में मेजबानी संस्थान की टीम “मेटल” ने बाजी मारी।

The Telegraph के अनुसार, इस प्रतियोगिता में शिक्षा, पर्यावरण, ऊर्जा, पानी की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों से जुड़ी समस्याओं पर काम करना होता है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली प्रत्येक टीम को छह जजों की टीम के समक्ष अपना प्रोजेक्ट पेश करना होता है। रिसर्च का विषय क्या होना चाहिए उसका चुनाव पूर्व अमेरिकी प्रधानमंत्री बिल क्लिंटन करते हैं।

दो दिवसीय इस प्रतियोगिता में इस बार कुल 50 टीमों ने भाग लिया था। इस प्रतियोगिता की विजेता टीम को सोशल इंटरप्राइजेज की शुरूआत के लिए 10 लाख रूपए भी प्रदान किये जाते हैं। इस बार की पुरस्कार विजेता टीम आईआईटी खड़गपुर ने अपने प्रोजेक्ट में बताया कि कैसे प्लास्टिक की जगह चावल की भूसी का इस्तेमाल कर हम फर्नीचर और कलम बना सकते हैं। इस टीम का नाम “मेटल” है।

जजों की टीम ने इस टीम को विजेता घोषित करने से पहले छह टीमों के अलग-अलग प्रोजेक्टों का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि टीम मेटल का  प्रोजेक्ट हजारों लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करेगा।

टीम से सदस्य हर्षित गर्ग ने कहा, “भारत में एक बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन किया जाता है। यदि चावल की भूसी का इस्तेमाल कर कलम, फर्नीचर, पिच बोर्ड और बरतन जैसे सामान बनाए जाएं तो इससे प्लास्टिक की खपत में भारी कमी आएगी।

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