नवंबर 11 यानी “राष्ट्रीय शिक्षण दिवस” के अवसर पर बिहार सरकार “मानस बिहारी वर्मा” को सम्मानित करेगी। मानस एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं और उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस दिन मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद की जन्म तिथि होती है और इस दिन को देश भर में शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के सम्मान में मनाया जाता है।

कार्यक्रम का आयोजन बिहार की राजधानी पटना के एस.के.मेमोरियल हाल में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी उपस्थित रहेंगे। 

दी बेटर इंडिया के अनुसार, इस कार्यक्रम में 2,000 से अधिक छात्र और करीब 200 शिक्षकों के आने की भी उम्मीद है। मानस को सम्मानित करते हुए बिहार सरकार उन्हें ₹2.5 लाख का चेक, स्क्रॉल ऑफ चेक, शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान करेगी। 76 वर्षीय मानस को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व कार्य को देखते हुए दिया जाएगा।

 
 
 
 
 
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पद्म श्री मानस बिहारी वर्मा जी केर बहुत रास शुभकामना आ बधाई। दिनांक २० मार्च २०१८ क’ अपने भारतक राष्ट्रपति कोविंद जी’क हाथे पद्म श्री सऽ नवाज़ल गेलोउ। अपने आवय वला पीढ़ी लेल प्रेरणाक स्रोत छि। ____ २५ जनवरी क’ आदरणीय के नाम पद्म श्री लेल घोषणा कायल गेल छल। विज्ञान व इंजीनियरिंग केर क्षेत्र में हिनक योगदान सऽ अपने लोकनि निक सऽ परिचित होयब। डां• कलाम साहेब के साथ अपने ‘तेजस’ केर निर्माण में अहम भुमिका में छलोउ आ अखनो अहां सेवा-निवृत्त भऽ गाम सब में स्कुल सभक नेना सबके विज्ञान के प्रति उत्साहित क’ रहलोउ। ____ अहि #मिथिलापुत्र के सादर प्रणाम आ अपने अहिना स्वस्थ रहि सेह्ह कामना। आवय वला ०२ अप्रिल कऽ पद्म भूषण सऽ #मिथिलाक बेटी आदरणीय शारदा सिन्हा सेहो नवाजल जेतिह्। ____ #PadmaShree #padmaawardees #manasbihariverma #sonofmithila .. ➡️Follow @BeingMaithil (fb insta twitter ) ➡️USE #BeingMaithil n show ur Maithilpan मैथिलप्पन ___ #Mithila | #Maithili | #Maithil मिथिला | मैथिली | मैथिल — Many More to come… Stay tuned! _ #BeingMaithil #mithila #india #Bihar #Jharkhand #nepal #Madhesh #discoveringmithila #exploringmithila #BringBackTradition

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दी टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए वर्मा ने कहा, “इस उम्र में पुरस्कार मिलना उतना मायने नहीं रखता लेकिन मैं राज्य सरकार का शुक्रगुजज़ार हूं कि उन्होंने मेरे कार्य को पहचाना। आज, छात्रों को उनके शिक्षकों की तरफ से सही दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। प्रतिस्पर्धा की इस दुनिया में मात्र शिक्षा पर्याप्त नहीं है। छात्रों को अनुभव की भी आवश्यकता है और शिक्षकों को उन्हें उनके लक्ष्य-प्राप्ति में मदद करनी चाहिए।”

गौरतलब है कि मानस अपनी मोबाइल साइंस लैब (MSL) परियोजना के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2010 में बिहार ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना के तहत विज्ञान की शिक्षा मुहैया कराने में मानस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके तहत भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान से संबंधित लैब उपकरणों से भरे तीन वैन बिहार ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में जाकर छात्रों को इसकी शिक्षा देती है।

एमएसएल कार्यक्रम मानस की स्वयं सेवी संस्था विकसित भारत फाउण्डेशन द्वारा चलाया जाता है। इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु आधारित एक स्वयं सेवी संस्थान अगस्तय इंटरनेशन फाउण्डेशन का भी सहयोग प्राप्त है।
 
बता दें कि मानस, इससे पूर्व रक्षा वैज्ञानिक के तौर पर देश की सेवा कर चुके हैं और सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में अनोखी मिसाल पेश की। मानस को “विज्ञान पुरुष” के नाम से भी जाना जाता है।

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