जिंदगी है तो मुश्किलें भी हैं लेकिन उन मुश्किल हालातों में भी जो हौंसला कायम रखे आखिर में जीत उसी की होती है। उत्तराखंड में कई ऐसे नौजवान हुए हैं जो अपनी प्रतिभा और बहादुरी से लोगों के लिए मिसाल बने हैं। इसी हौंसले और बहादुरी की मिसाल हैं उत्तरकाशी से सटे घाटी के भंकोली गांव की ममता रावत। जून 16, 2013 की काली रात को आई विनाशकारी आपदा ने हजारों जिंदगियों को तबाह कर दिया था। उस रात हजारों घर बर्बाद हो गए थे और ना जाने कितने बच्चे बेघर हो गए थे। ऐसी मुश्किल घड़ी में ममता का हौसला काम आया। ममता रावत अपनी बहादुरी और काम के बल पर महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बन गई हैं। 

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भंकोली गांव में रामचंद्र सिंह रावत व भूमा देवी के घर जून 8, 1991 को जन्मी ममता के दो भाई और एक बहन हैं। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली ममता की प्राथमिक शिक्षा भंकोली गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुई है। वे महज 11 साल की थीं तब उनके पिता का देहांत हो गया। परिवार की स्थिति और भी खराब हो गई। इसके साथ ही ममता की मां भूमा देवी भी बीमार हो गईं। मां की बीमारी के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। कठिन हालातों के बीच जिंदगी के संघर्ष से गुजर रही ममता का नाम जब श्री भुवनेश्वरी आश्रम के अधिकारियों ने सुना तो उन्होंने वर्ष 2006 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से बेसिक कोर्स कराया। इसके बाद ममता ने ठान लिया कि वे जीवन में अब कुछ ऐसा करेंगी, जो दूसरों के लिए मिसाल बने।

अपनी परेशानियों के बावजूद ममता ने हार नहीं मानी और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से कोर्स करने के बाद ममता ने ट्रैकिंग गाइड के तौर पर कार्य शुरू किया।

वे जून 2013 में दिल्ली और मुंबई के 50 बच्चों को दयारा ट्रैकिंग पर ले गई थीं, लेकिन लौटते समय रास्ते और पुल के बाढ़ में बह जाने से वे पूरे दल के साथ बीच में फंस गई थीं। उस समय बिना अपनी जान की परवाह किए ममता ने सभी बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला।

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ममता ने साल 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान अलग-अलग जगहों पर फंसे सैंकड़ों पर्यटकों और यात्रियों को सुरक्षित निकाला था। उनके इस जज़्बे को स्टार प्लस के एक धारावाहिक “आज की रात है जिन्दगी” में बाॅलीवुड के “शहंशाह” और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी सलाम कर चुके हैं। मशहूर फिल्म निर्माता आशुतोष गोवारीकर द्वारा बनाए गए धारावाहिक “एवरेस्ट” में भी ममता ने काम किया था।

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ममता के कारनामें यहीं नहीं रूके। फिलहाल “यूथ फाउंडेशन एवं ग्रीन पीपल” से जुड़ कर ममता युवाओं को नई दिशा देने के साथ ही महिला सशक्तीकरण की मुहिम में जुटी हैं। उत्तरकाशी के रैथल गांव में पर्यटन, कृषि-बागवानी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रही ममता स्थानीय युवतियों और महिलाओं के सहयोग से इसे अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने पास के गांव की लड़कियों को अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया और आज उनके इस नेक काम में कई महिलाएं उनका साथ दे रही हैं।

 

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