आठ साल पहले एक ट्रेन दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा देने वाली रोशन शेख के लिए जिंदगी इतनी आसान नहीं थी लेकिन उन्होंने अपने हौसले के आगे मुश्किलों को पस्त कर दिया। 23 वर्षीय रोशन अब अपनी पढ़ाई पूरी करके पैथॉलजी की डॉक्टर बन गईं हैं। मुंबई के किंग एडवर्ड हॉस्पिटल में अब रोशन मरीजों का इलाज करेंगी। 

Image result for roshan sheikh train accident doctor
Credit: Mid-Day

रोशन बताती हैं कि वह उस समय 16 साल की थीं जब एक दिन कॉलेज से वापस आते समय जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन पर वह ट्रैक पर गिर गईं और पैरों पर ट्रेन चढ़ जाने से उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए। रोशन कहती हैं, “कई लोग जब मुझे कहते थे कि मैं अब कुछ कर नहीं पाऊंगी तो मुझे बुरा नहीं लगता था बल्कि खुद को साबित करने की मेरी ज़िद और मज़बूत हो जाती थी।”

Image result for roshan sheikh train accident doctor
Credit: Mid-Day

रोशन को उनके माता-पिता और परिवार के बाकी लोगों के साथ-साथ डॉक्टरों ने भी हिम्मत दी और अपना सपना पूरा करने के लिए प्रेरित किया। 2011 में रोशन ने दिव्यांग कोटे में राज्य के कॉमन एंट्रेस टेस्ट (Common Entrance Test) में तीसरा रैंक हासिल किया। इसके बावजूद एडमिशन की काउंसलिंग में उन्हें कहा गया कि वह एमबीबीएस कोर्स का दबाव झेल नहीं पाएंगी। उन्हें कहा गया कि वह क्लास और ऑपरेशन थिएटर के बीच दौड़-भाग नहीं कर पाएंगी क्योंकि उन्हें इसमें बार-बार सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ेंगी।

Image result for roshan sheikh train accident doctor
Credit: The Indian Express

एडमिशन के लिए दिव्यांगता के निर्धारित स्तर न्यूनतम 40 प्रतिशत और अधिकतम 70 प्रतिशत के हिसाब से भी रोशन डिस्क्वॉलिफाई हो गईं क्योंकि उनकी दिव्यांगता 88.33 प्रतिशत थी। इसके बावजूद रोशन ने हार नहीं मानी और हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने उनके एडमिशन को सुनिश्चित कराया और आज वह डॉक्टर बन गईं हैं।

Share

वीडियो