किस्मत के सामने  घुटने टेकने के बजाए, यदि उससे लड़ा जाए तो जिंदगी में बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। ऐसी ही कहानी 52 वर्षीय रेणुका आराध्या की है, जिन्होंने गरीबी और मजबूरी के आगे हार नहीं मानी और आज उन्होंने करोड़ों रुपए का साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

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Credit: Patrika

रेणुका बेंगुलुरु के अनेकल तालुक के गोपसांद्रा गांव के रहने वाले हैं। उनका बचपन बेहद गरीबी में गुज़रा था। उनके पिता एक मंदिर में पुजारी थे और उनका कोई तय वेतन नहीं था। ऐसे में पिता और बेटा दोनों गांव में घूम-घूमकर रागी और ज्वार मांगा करते थे। इसके बाद वे उन्हें बेच दिया करते थे। उससे जो मिलता था, उसी से उनके घर का गुज़ारा चलता था। घर की माली हालत ठीक नहीं होने के चलते छोटी-सी उम्र में ही उनके पिता ने उन्हें लोगों के घरों में झाडू-पोछा करने के काम पर लगा दिया था। रुपये-पैसे कमाने के चक्कर में वे ऐडलैब्स में स्वीपर भी रहे और अलग-अलग जगहों पर मजदूरी भी की थी।

इसके बाद रेणुका एक बुजुर्ग चर्मरोगी के लिए काम करने लगे ताकि दो वक्त के खाने का जुगाड़ हो सके। इसके अलावा पुजारी घराने के होने के चलते उन्हें मंदिर में भी अपनी सेवा देनी पड़ती थी। इस बीच रेणुका के ऊपर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उनके पिता का देहांत हो गया। घर की सारी जिम्मेदारी उनके कन्धों पर आ गई। ऐसे में जगह-जगह काम करने के चलते वो पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे। ऐसे में वे दसवीं में फेल हो गए थे।

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Credit: Kuch Naya

रेणुका जब 20 साल के हुए तो उन्होंने शादी कर ली। उनका मानना था कि शादी उन्हें और भी जिम्मेदार बना देगी। इस बीच वे सिक्योरिटी गार्ड से लेकर मजदूरी तक करते रहे। उनकी पत्नी भी किसी फर्म में सहायक का काम करती थीं जो बाद के दिनों में दर्जी बन गईं। वे इस बीच कई ट्रैवल कंपनियों में काम करते और छोड़ते रहे। वे ड्राइवर का काम करते थे और उन्होंने ड्राइवर का काम करते-करते इस बात को समझ लिया था कि ट्रैवल एजेंसी में काफी फायदा हो सकता है।

टैक्सी और ड्राइविंग के कारोबार में लंबे समय तक काम करने की वजह से वे इतना तो समझ गए थे कि यहां भाषा का क्या महत्व हो सकता है। खाली समय में साथी ड्राइवरों के साथ गप्पें मारने के बजाय वे अंग्रेजी अखबार और पत्रिकाएं पढ़ा करते थे। विदेशी सैलानियों से अंग्रेजी में बातचीत करने की कोशिश किया करते थे। आज वे अपनी कंपनी में दूसरे ड्राइवरों को बाजार के हिसाब से तैयार कर रहे हैं। वे अपने-आप को नई तकनीकियों के हिसाब से भी अपडेट रखते हैं और उन्हें हर नए गैजेट के बारे में जानकारी होती है।

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Credit: Kuch Naya

वे आज 500 टैक्सी वाली कंपनी के मालिक हैं और उनका कारोबार करोड़ों में है। ओला और उबर जैसी कंपनियां भी उनके धंधे को चौपट नहीं कर सकी हैं क्योंकि उनके पास नियमित ग्राहक हैं। अगले तीन सालों में वे अपने साम्राज्य को 100 करोड़ तक पहुंचाना चाहते हैं और आईपीओ (IPO) खोलना चाहते हैं।

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Credit: YourStory

आज वे तीन शुरुआती कंपनियों के निदेशक हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला ड्राइवरों को प्रोत्साहित किया है। उनकी कंपनी ने कारवार में प्रवासियों के लिए एक अखिल महिला कॉल सेंटर भी बनाया है। प्रवासी कैब्स का कारोबार आज अच्छी तरह से चल रहा हैं और इसकी सफलता के पीछे का आदमी प्रेरणा से कम नहीं है। आखिरकार आप एक ऐसे व्यक्ति के बारे में कितनी बार सुनते हैं जो कभी एक सुरक्षा गार्ड था लेकिन आज 20 लाख रुपये से अधिक कीमत की कार चलाता है। रेणुका की कहानी से यह साबित होता है कि मेहनत और संघर्ष के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

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