कर्नाटक पद्मश्री सुलागिट्टी नरसम्मा, एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने लगभग 15000 बच्चों का सुरक्षित प्रसव करवाया और उन्हें इस दुनिया में सुरक्षित प्रवेश करवाया, कल उन्होंने इस दुनिया में अंतिम सांस ली। वे कुल 98 वर्ष की थीं और उन्हें समाज सेवा के क्षेत्र में वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से नवाजा।

 

The Economic Times के अनुसार, कर्नाटक के तुमकुर जिले में जन्मीं सुलागिट्टी नरसम्मा जी को वहाँ के लोग “जननी अम्मा” के नाम से बुलाते हैं। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने करीब 15000 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया। उन्होंने कभी भी इस कार्य के लिए पैसे नहीं लिए।

वे प्रसव को पूरे पारंपरिक तरीके से करती थीं। उनके काम को सराहते हुए तमुकुर विश्वविद्यालय ने वर्ष 2014 में उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया था और पिछले ही वर्ष इस क्षेत्र में उनके इस सराहनीय योगदान के लिए वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

जननी अम्मा के फेफड़े में जानलेवा बीमारी होने के कारण वे अस्पताल में भर्ती थीं। 3-4 दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं दिखा और आखिरकार 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। हजारों बच्चों को इस दुनिया में सुरक्षित लाने वाली जननी अम्मा अब हमारे बीच नहीं रहीं।

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