मेहनत करने वाला इंसान ज्यादा दिनों तक गरीब नहीं रह सकता। झारखंड की कुछ महिलाओं ने इस बात को साबित कर दिया है। इन्होंने हर्बल साबुन बनाकर न केवल अपनी किस्मत चमका ली बल्कि अपने परिवार की गरीबी भी दूर कर दी। झारखंड के जमदेशपुर जिले के हुडलुंग गाँव की मीनू रक्षित कुछ साल पहले तक एक एनजीओ में काम करती थीं। आज वो 20 महिलाओं को जोड़कर प्रगति महिला समूह नाम से स्वयं सहायता समूह चला रही हैं।

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Credit: jagran

जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर हुरलुंग गांव की महिलाएं अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वावलंबन के जरिए आर्थिक समृद्धि की राह पर चल पड़ी हैं। ये देश भर की उन ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं जो सरकारी योजनाओं की बाट जोहती रह जाती हैं। एक समय था जब ये महिलाएं आर्थिक तंगी से त्रस्त थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत जुटाई और गरीबी को पछाड़ दिया। घर पर ही प्राकृतिक सामग्री से हर्बल साबुन बनाकर इन्होंने न सिर्फ गरीबी को धो डाला बल्कि अच्छी खासी पूंजी जुटाकर अन्य महिलाओं को प्रेरणा दे रही हैं।

झारखंड में नीम, महुआ, तुलसी, लेमनग्रास, कुसुम जैसे पौधों की अच्छी पैदावार होती है। लेकिन इसका कोई सही ढंग से इस्तेमाल नहीं करता था। ऐसे में मीनू ने इनसे कुछ बनाने का सोचा। किन्तु अपना कुछ अकेले दम पर शुरु करना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने अपने साथ 19 ऐसी और बेरोजगार महिलाओं को जोड़ा और उन महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया।

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इस समूह की महिलाओं ने घर व दालान को ही कारखाना बना लिया ।  ये महिलाएं मशीन नहीं, हाथ से और देसी तकनीक से ही साबुन बनाने लगीं। साबुन में किसी तरह के रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है । अब वे रोज करीब 400 से 500 पीस साबुन का उत्पादन करती हैं।गत वर्ष अक्टूबर 15 को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर दिल्ली में इस समूह को सम्मानित किया गया। टीम लीडर मीनू ने महिला उद्यमिता सम्मान ग्रहण किया।

झारखंड राज्य की अब ये महिलाएं दूसरों के यहां मजदूरी करने नहीं जाती हैं बल्कि गांव में रहकर ही अपने खुद के व्यवसाय से महीने का पांच से दस हजार रुपए आसानी से निकाल लेती हैं।

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