इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत में शिक्षा का स्तर काफी निम्न है, जब उन बच्चों के बारे में बात आती है जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। देव कुमार वर्मा एक बार धनबाद के अपने गांव कातरस में चुनावी ड्यूटी निभा रहे थे, एक सरकारी स्कूल चुनाव बूथ था। वहां स्कूली बच्चों द्वार कुछ शब्द लिखे गए थे जिसमें मात्राओं की कई गलतियां थी और उन्हें तो इस बात पर हैरानी हुई कि छात्रों को इन्हें सही करने के लिए कहने के बजाए शिक्षकों ने इन्हें ऐसे ही स्वीकार कर लिया।

स्कूल में शिक्षा के दयनीय स्थिति को देखकर उन्होंने स्कूल में पाठशाला शुरु करने का निश्चय किया।

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देव और उनकी पत्नी ने शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कुछ साकार करने के निश्चय किया। देव ने अपने पैतृक घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरु किया जल्द ही वह पांच साल के बच्चों के लिए एक क्रियाशील विद्यालय – पाठशाला बन गया। शिक्षकों और अभिभावकों की तरफ से इसमें सहयोग भी मिला।

उनका पैतृक घर जल्द ही एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में तब्दील हो गया।

एक सामान्य स्कूल की तरह इस स्कूल में सभी सुविधाएं है, जैसे कि  प्लेग्राउंड, पानी का कनेक्शन, शौचालय इत्यादि।

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दी लोजिकल इंडियन से बात करते हुए, देव कुमार ने कहा कि, हमने सोचा कि यदि हम एक छात्र के लिए भी बदलाव ला सकते हैं तो हमारे लिए पर्याप्त होगा। जो साल 2014 एक छोटा सा ट्यूशन पॉइंट था वह साल 2015 में एक परिपूर्ण स्कूल बन गया।

अगले साल भागबस्ति में वह एक दूसरा स्कूल खोलने जा रहे हैं, जो कि कोयले की खदान के नजदीक पड़ता है। स्कूल को खासतौर पर कोयला चोरी करने वाले बच्चों के लिए बनाया गया है।

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