राजधानी दिल्ली सहित देश के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है, जिसकी वजह से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। प्रदूषण के कारकों को कम करने के लिए सरकार के साथ-साथ आमजन भी प्रयासरत है। इसी क्रम में पंजाब के एक किसान गुरूबचन सिंह ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है।

दूरदर्शन न्यूज़ के अनुसार, किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली को भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण के बढ़ते कारकों में से एक माना जा रहा। इसे रोकने के लिए सरकार तो काम कर ही रही है, गुरूबचन सिंह भी प्रदूषण की इस लड़ाई में अपने स्तर पर सरकार की मदद कर रहे हैं।

तरनतारन के गांव गुठदेना सिंह वारा के रहने वाले किसान गुरूबचन सिंह ने वर्ष 2000 से अपने खेतों में पराली जलाना बंद कर दिया है और अब वे अन्य किसानों को भी ऐसा नहीं करने के लिए जागरुक करते हैं। पिछले कुछ सालों से गुरूबचन सिंह ने इसके खिलाफ एक अभियान छेड़ रखा है। यहां तक कि अपने बेटे की शादी में उन्होंने यह शर्त रखी थी कि लड़की के घर वाले पराली न जलाएं और अब यही वादा गुरूबचन अपने बेटी के ससुराल वालों से भी चाहते हैं।

इसके अलावा गुरूबचन सिंह ने फसल के अवशेषों का सदुपयोग करने का भी एक खास तरीका अपनाया है, जिसकी मदद से खेत की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है। इसके लिए वे हैप्पी सीडर मशीन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे फसल के अवशेषों को खेत में ही इस्तेमाल कर लिया जाता है और उन्हें खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

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