जिंदगी की एक छोटी सी घटना कभी-कभी बहुत बड़ा सबक सिखा जाती है। कुछ घटनाएं ऐसी भी होती हैं जो समाज में बदलाव का भी एक कारण बन जाती हैं। मुंबई की रहने वाली इस लड़की की जिंदगी में भी एक ऐसी ही घटना घटी जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया और वे समाज में एक बदलाव की ओर अग्रसर हुईं।

बच्चों को पढ़ाती हैं गणित!

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे से बात करते हुए उन्होंने कहा, “बचपन से ही मैं गणित में अच्छी थी और आगे चलकर मैंने वंचित बच्चों को गणित पढ़ाने के लिए एक स्वयंसेवी संस्थान से हाथ मिलाया। लेकिन जल्द ही मेरे छात्रों की तादाद में कमी होने लगी। इस बारे में पूछने पर पता चला कि बच्चे गड्ढा भराई का काम करते हैं और यह उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। बच्चे जिस क्षेत्र में रहते हैं वहां काफी प्रदूषण होता है, जो वहां रहने वाले हर शख्स के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।”

कचरे से बनता है फर्निचर!

खबरों के मुताबिक इस वाक्या के बाद लड़की ने कुछ करने की ठानी और प्रदूषण कम करने के लिए रिसाइकिल को बढ़ावा देने के बारे में सोचा। इसके लिए उन्होंने टेट्रा पैक की पहल से संपर्क किया, जो प्लास्टिक के कचरे आदि को रिसाइकिल कर क्लासरूम फर्निचर बनाने का कम करती है। कचरों से बने इन फर्निचर्स को स्कूलों को दान किया जाता है।

कचरे में कटौती!

स्मार्ट सोच वाली इस लड़की की बदौलत न सिर्फ सोसाइटी का कचरा 200 किग्रा प्रतिदिन से घटकर 50 किग्रा प्रतिदिन हो गया बल्कि इस कचरे से बनने वाले फर्नीचर से बच्चों को स्कूल में सुविधाएं भी मिलने लगी।

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