लगभग आठ महीने पहले तमिलनाडु, चेन्नई के पजावंतागल पुलिस स्टेशन के पुलिस कर्मियों ने एक महिला को प्रवेश द्वार पर रोते हुए देखा। परेशान, असहाय 66 वर्षीया अनुशया को कही जाना नहीं था। शायद उन्हें पुलिस कर्मियों पर उम्मीद थी कि वे उसकी मदद कर सकते हैं और इसलिए वे वहाँ आयीं थीं। 

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पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर ने जब महिला को देखा तो उन्हें आश्वस्त करते हुए अंदर बुलाया। उन्हें लगा शायद यह महिला शिकायत दर्ज़ करना चाहती हैं। लेकिन वह रो रही थीं, जब वह शांत हुईं तो उन्होंने बताया कि उसका नाम अनुशया है और उसके पति का कुछ सालों पहले निधन हो गया है। उसका बेटा जो एक शराबी है, उसने अनुशया को घर से बाहर निकाल दिया है। 

वह पूरी तरह से असहाय थीं और अपने बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करवाना चाहती थीं। यह जानते हुए कि उनका बेटा उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं दे सकता, पुलिसकर्मियों ने अनुशया की मदद करने का फैसला किया। इसलिए पुलिसकर्मियों ने अनुषा को पुलिस स्टेशन के साफ-सफाई कर्मचारी के रूप में काम पर रखने का फैसला किया। 

इसके एवज में अनुशया को सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का भोजन पुलिसकर्मियो की तरफ से प्रदान किया जाने लगा। अनुशया यह  काम करने को तैयार हो गयी। अब अनुशया हर दिन सुबह 7 बजे आती हैं और पुलिस स्टेशन को साफ़ करती हैं और साथ ही एक रंगोली भी बनाती हैं। अधिकारियो के टेबुल पर पड़ीं पानी की खाली बोतलें भी भरती हैं और वहाँ के पौधो को पानी भी देती हैं।

अनुशया के घर जाने से पहले पुलिसकर्मी उनके के लिए खाने का प्रबंध करते हैं। 27 नवंबर को अनुशया अपने सामान्य समय पर स्टेशन पहुंचीं। उसके हाथ में चॉकलेट का पैकेट था और उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को चॉकलेट बाँटी। 

जब इंस्पेक्टर जी.वेंकटेशन ने अनुशया को पूछा, “यह चॉकलेट किसलिए “? तो अनुशया ने बताया कि आज उसका जन्मदिन है। जिसके बाद इंस्पेक्टर वेंकटेशन ने अनुशया को आश्चर्चकित करने के लिए जल्दी से जन्मदिन का केक मंगाया और सारे पुलिसकर्मी इकट्ठा होकर अनुशया को जन्मदिन की शुभकामनाये दी। 

Anushya cuts the cake
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जब अनुशया ने पुलिस स्टेशन में केक काटा तो उसकी आँखों में आंसू थे। क्योंकि अधिकारियों ने उनका 67वां जन्मदिन मनाया था। अनुशया ने कहा, “मैंने कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाया और मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि पुलिसवालों ने मेरे जन्मदिन की योजना बनायीं है।”

वास्तव में चेन्नई पुलिस ने अपनी निःस्वार्थ भावना से यह दिखाया कि एक असहाय माँ का जन्मदिन मनाने जैसी छोटी-सी ख़ुशी भी किसी का जीवन बदलने में मददगार सिद्ध होती है। 

 

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