भारत में बंदरों और लंगूरों का एक अलग ही महत्व है। हिन्दू समाज में उन्हें हनुमान की सेना मानकर उनकी पूजा की जाती है। हममें से कई लोग हैं जो इन बंदरों और लंगूरों को खाने-पीने की चीजें दे देते हैं, लेकिन ऐसे बहुत कम लोग हैं जो निरंतर उनके भोजन पानी की व्यवस्था करते हैं। पर अहमदबाद के स्वप्निल सोनी का इन लंगूरों  से ऐसा रिश्ता बन गया है कि वे कभी-कभार नहीं बल्कि, पिछले 10 सालों से हर सोमवार उन्हें भोजन मुहैया करवाते हैं। 

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स्वप्निल सोनी पिछले 10 सालों से हर सोमवार को 500 लंगूरों को रोटी खिलाते आए हैं, जिसके लिए वे 1700 रोटी बनाते हैं और अपने हाथों से इन लंगूरों को खिलाते हैं। 

बन्दर और लंगूर का स्वप्निल से अनोखा रिश्ता बन गया है और ये लंगूर स्वप्निल की गोद में बैठकर रोटियां खाते हैं।सारे बन्दर हर रोज निश्चित समय और निश्चित जगह पर स्वप्निल के आने का इंतज़ार करते हैं। 

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एक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि करीब 6 महीने पहले वे आर्थिक तंगी का शिकार हो गए थे, लेकिन फिर भी उन्होंने लंगूरों को रोटी खिलाना नहीं छोड़ा। 

रोटी के लिए पैसों का इंतज़ाम करने के लिए उन्होंने अपनी बेटी की पोलिसी तक तुड़वा दी थी। स्वप्निल का कहना है कि लंगूरों के संग उनका ऐसा रिश्ता बन गया है कि वह अब वे उन्हें अपने परिवार का ही एक हिस्सा मानते हैं। 

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बंदरों से स्वप्निल का लगाव देखते हुए आसपास के लोग उन्हें “मंकी मैन” या “बबून मैन” कहकर बुलाते हैं। 

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