मध्य प्रदेश के चाय विक्रेता की बेटी आँचल गंगवाल (24) के लिए यह किसी सपना सच होने जैसा था। जब उनका चयन भारतीय वायुसेना की उड़ान शाखा में हुआ। क्योंकि पहले पांच बार वे इस परीक्षा में विफल हो चुकीं थीं। इस वर्ष भी देशभर के छह लाख लोगों ने इस परीक्षा में भाग लिया था। जिनमें 22 लोगों का चयन हुआ जिनमें पांच लड़िकयाँ थीं और इन पांच लड़कियों में आँचल एक हैं। 

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मध्य प्रदेश के नीमच के रहनेवाले आँचल के पिता सुरेश गंगवाल बस स्टैंड पर चाय का ठेला लगाते हैं। बचपन में गरीबी के चलते आँचल और उनके भाई बहन को वे सुख-सुविधाएं नहीं मिल पायीं जो अन्य बच्चों को उपलब्ध होती हैं । और चाय के ठेले से इतनी कमाई नहीं होती थी कि उससे तीन बच्चों वाले परिवार का ठीक से पालन-पोषण हो सके।  

जब आँचल पांचवीं कक्षा में थी तब वह अपने पिता को टिफ़िन देने बस स्टैंड पर जाती थी। पिता को चाय बाँटते और बरतन धोते हुए देखना आँचल को अच्छा नहीं लगता था। इसी वातावरण में उनके पिता ने तीनों बच्चों को पढ़ाने की हर संभव कोशिश की। आँचल बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी इस वजह से उनके पिता ने उनका दाखिला प्राइवेट इंग्लिश स्कूल में करवा दिया। 

पिता को इतनी मेहनत करते देख आँचल सोचती थी कि वह अच्छी तरह से पढ़ाई करेगी और नौकरी करके घर के हालात सुधारेगी। इन्हीं सपनों के साथ आँचल कॉलेज तक पहुंच गयी। आँचल को बास्केट बॉल में रूचि थी और वे अपनी टीम की कॅप्टान भी रहीं। इसके अलावा वे दौड़ में भी हमेशा अव्वल आती थीं। खेलों में भी हिस्सा लेते हुए उन्होंने अपना बीएससी पूर्ण कर लिया। 

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जब आँचल 12वीं कक्षा में थीं उसी वर्ष उत्तराखंड की भयानक बाढ़ ने वहाँ का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। उस समय भारतीय वायुसेना के जवानों ने जिस बहादुरी से लोगों की जान बचायी उससे आँचल काफी प्रेरित हुईं और उन्होंने तभी से ठान लिया कि उन्हें वायुसेना में ही जाना है और लोगों की मदद करनी हैं। 

कॉलेज ख़त्म होने के बाद आँचल प्रतियोगी परीक्षाएं देने लगीं। और उन्होंने सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा पास कर ली। जिसके बाद वे प्रशिक्षण के लिए सागर चली गयीं। लेकिन उनका मन तो वायुसेना की नौकरी में लगा हुआ था। जिसकी पढ़ाई के लिए आँचल को समय नहीं मिल रहा था। इस बीच लेबर इंस्पेक्टर का परिणाम आ गया और आँचल ने ट्रेनिंग बीच में छोड़कर लेबर इंस्पेक्टर का पद ज्वाइन कर लिया। 

लेबर इंस्पेक्टर रहते हुए उन्हें वायुसेना की तैयारी के लिए भरपूर समय मिलने लगा। और इसके लिए आँचल ने पांच बार परीक्षा दी लेकिन हर बार असफल रहीं। इसकी परीक्षा वर्ष में दो बार होती है। जब वे पांचवी बार असफल हुईं तब उन्होंने उम्मीद छोड़ दी। लेकिन उनके पिता नहीं चाहते थे कि वे  इतनी जल्दी हार मान लें। वे आँचल के सपनों को पूर्ण होते हुए देखना चाहते थे। 

इसलिए उनके पिता ने आँचल को आखिरी बार परीक्षा देने के लिए मनाया। इधर परिवार के लिए आँचल को नौकरी करने की भी सख्त जरूत थी। लेकिन पिता के मनाने पर वे आखिरी प्रयास करने को तैयार हो गयीं और पूरी मेहनत में जुट गयीं। उन्होंने पिछली तैयारियों की खामियों को सुधारा और सभी पुराने पेपर हल कर दिए। 

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आखिरी प्रयास समझकर आँचल ने अपना जी-जान लगाकर तैयारी की और परीक्षा दे दी। और नतीजे का बेसब्री से इंतज़ार करने लगी 17 जून को जब परिणाम आया तो आँचल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे परीक्षा में सफल हो गयीं थीं और उनके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। उनके पिता ने आँचल को ढेर सारा आशीर्वाद दिया। क्योंकि उन्होंने ने ही आँचल को आखिरी बार परीक्षा देने के लिए मनाया था। 

जून में वायुसेना फाइटर विंग में आँचल का चयन हो गया। इसके बाद प्रशिक्षण के लिए आँचल हैदराबाद चली गयीं। आँचल अब उस पल का इंतज़ार कर रही हैं जब वे प्रशिक्षण पूर्ण करके वायुसेना की पोशाक में अपने घर जायेंगी। आँचल का यह प्रयास हर लड़की के लिए एक मिसाल हैं जिसने सफल होने तक प्रयास किया और अपने सपनों को नहीं छोड़ा। 

 

 

 

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