आजकल कई छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आई.आई.टी. (Indian Institute of Technology) में प्रवेश लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल करना चाहते हैं क्योंकि IIT की डिग्री सफलता की गारंटी मानी जाती है। इसे प्राप्त कर लेने के बाद, कई बड़ी कंपनियों में लाखों रूपये सालाना पैकेज की नौकरी मिल जाती है। भारत में कुल 16 IIT संसथान हैं। IIT में एडमिशन के लिए एक बहुत कठिन प्रवेश परीक्षा ली जाती है। केवल सर्वोत्तम छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है। छात्रों को प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट से कोचिंग लेनी पड़ती है।

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बिहार की राजधानी पटना में एक अनोखा इंस्टिट्यूट है जो 30 गरीब प्रतिभावान छात्रों को फ्री कोचिंग की सुविधा के साथ-साथ रहने और खाने का भी इंतज़ाम करता है। इस संस्थान का नाम सुपर 30 है जिसकी स्थापन आनंद कुमार ने की थी। आनंद कुमार जी का जन्म पटना बिहार में हुआ था। उनके पिता भारतीय डाक विभाग में एक क्लर्क थे। उनके पिता अपने बच्चों के लिए महँगी प्राइवेट स्कूल की शिक्षा का इन्तजाम नहीं कर सकते थे इसलिए आनंद कुमार की प्रारंभिक शिक्षा एक हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में हुई जहाँ उन्हें गणित में गहन रूचि उत्पन्न हो गयी। अपने ग्रेजुएशन के दिनों में आनंद कुमार ने नम्बर थ्योरी पर शोध पत्र लिखा जो की मेथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मेथेमेटिकल गजट में छपा।

आनंद ने अपनी प्रतिभा के बल पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रवेश तो पा लिया लेकिन अपनी गरीबी और पिता की मृत्यु के चलते वे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी नहीं जा पाए। उन्होंने पटना और दिल्ली में इसके लिए स्पोंसर खोजे लेकिन उन्हें कोई भी मदद करने वाला नहीं मिला। तब आनंद ने तय किया कि वे दिन में गणित का अध्ययन करेंगे और शाम को अपनी माँ के साथ पापड़ बेचेंगे। उनकी माँ ने पापड़ बनाने का व्यवसाय शुरू कर दिया और आनंद उसमे उनका हाथ बंटाने लगे। साथ ही साथ उन्होंने बच्चों को पढ़ाना भी शुरू कर दिया।

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Credit: Yourstory

वर्ष 1992 में आनंद ने गणित पढ़ाना शुरू किया। उन्होंने पांच सोै रूपये प्रति माह पर एक कमरा किराये पर लिया और अपना रामानुज स्कूल ऑफ़ मेथेमेटिक्स शुरू किया। मात्र तीन सालों में ही उनके छात्रों की संख्या 2 से बढ़कर 500 तक पहुँच गयी। वर्ष 2000 में आनंद के जीवन में एक घटना घटी, उनके पास एक गरीब छात्र IIT की प्रवेश परीक्षा की कोचिंग के लिए आया। आनंद उसे पढ़ाने के लिए राज़ी हो गए लेकिन जब उन्होंने उस छात्र से पूछा कि तुम पटना में कहाँ रहोगे तो उसने बताया कि वह एक बड़े घर की सीढ़ियों के नीचे जैसे-तैसे समय बिता लेगा।

इस घटना ने आनंद को झकझोर दिया है। उन्होंने फैसला किया कि वे अब से 30 प्रतिभावान छात्रों को न केवल मुफ्त कोचिंग देंगे बल्कि उनके रहने और खाने का भी इंतज़ाम करेंगे। तब से लेकर आज तक आनंद हर वर्ष एक प्रतियोगिता परीक्षा लेकर 30 गरीब प्रतिभावान छात्रों को IIT प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाते हैं। सुपर 30 (Super 30) का परीक्षा परिणाम भी आश्चर्य जनक है। 30 में से लगभग 28 छात्र हर वर्ष चयनित हो जाते हैं ।

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Credit: Naidunia

जहाँ हर शहर में लालची लोगों द्वारा शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया गया है। ऐसे में आनंद कुमार जी की कहानी, रेगिस्तान में एक छायादार वृक्ष की तरह लगती है। डिस्कवरी चैनल ने आनंद कुमार पर एक डाक्यूमेंट्री भी बनाई है। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स में भी इनकी बायोग्राफी प्रकाशित हो चुकी है। आनंद कुमार को प्रो. यशवंतराव केलकर पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका हैं। आनंद कुमार को बिहार सरकार ने अब्दुल कलाम आज़ाद शिक्षा अवार्ड से भी सम्मानित किया है।

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