इंदौर, मध्य प्रदेश की 20 वर्षीय जूही झा अपने परिवार के साथ 10/10 के क्वाटर में रहती थी जो शौचालय के बाजू में ही था। उनके पिताजी सार्वजानिक शौचालय में काम करते थे।जूही ने जब अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया तब जूही का 5 लोगों का परिवार, 12 वर्षो तक इसी शौचालय के क्वाटर में रहता था। 

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सार्वजानिक शौचालय के पास रहना और वहां सांस ले पाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद जूही ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रीत किया और साथ ही हैप्पी वन्डरर्स नामक खो-खो टीम के साथ प्रशिक्षण लेना भी शुरू कर दिया। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत के दौरान जूही ने कहा, “मैं जब  6वीं कक्षा में थी तब पहली बार मैंने राष्ट्रीय सब-जूनियर खेलों में खेलना शुरू किया। उसके बाद मैंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।” मैंने नेशनल में 40 से अधिक राज्य का प्रतिनिधित्व किया।” जूही ने काफी कड़ी मेहनत की और खुद को इस खेल के प्रति समर्पित कर दिया जिसका लाभ उसे अब मिल रहा है। 

अपनी जिंदगी की स्थिति के बारे में बात करते हुए जूही झा ने दैनिक जागरण से कहा, “मैं यहाँ 12 वर्षों तक रही (सार्वजानिक शौचालय के क्वाटर) मेरे पिताजी महीने की 6000-7000 कमाते थे, जिससे हमारा घर चलता था। हालात काफी ख़राब थे लेकिन फिर भी मैंने कभी खेलना नहीं छोड़ा। लेकिन हालात तब और बिगड़े जब तीन साल पहले मेरे पिताजी को अपनी नौकरी गवानी पड़ी और उसके साथ ही हमारा घर भी चला गया।”

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उसके बाद जूही के घर की मुसीबतें बढ़नी शुरू हो गयीं। उनके परिवार के लिए एकमात्र चिंता थी घर चलाने के लिए आय का स्त्रोत ढूँढ़ना, क्योंकि जूही के पिता के पास कोई स्थायी नौकरी नहीं थी। तब उनकी माँ ने पास के टेलरिंग की दूकान में कपड़े सिलने का काम शुरू किया जिसकी वजह से घर का खर्च चलता था। 

जूही उन 10 लोगों में से हैं जिन्हें मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2018 के लिए विक्रम पुरस्कार के लिए चुना गया। उन्हें भोपाल में 4 अक्टूबर 2018 को खेल मंत्री यशोदरा राजे सिंधिया और पहलवान सुशील कुमार की तरफ से यह पुरस्कार प्राप्त हुआ। 

जूही फिलहाल बी कॉम के अंतिम वर्ष में हैं और वे आगे भी पढ़ना चाहती हैं। उनके परिवार को उम्मीद है कि इस तरह के प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने के बाद जूही को एक अच्छी सरकारी नौकरी मिल जाएगी। उनके कोच राजू ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, “वह एक प्रतिभाशाली लड़की है और इस तरह की परिस्थितियों को मात देकर विक्रम पुरस्कार विजेता लड़की को उन्होंने कभी नहीं देखा हैं।” 

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जिन कठिनाइयों को मात देकर जूही ने खुद को सवारा है, वह वास्तव में आश्चर्यजनक है। अपने खेल को आगे बढ़ाने के अलावा दृढ़ निश्चयी जूही परिवार की मदद करने की योजना भी बना रही है। 

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