14 साल पहले विशाल सिंह के पिता को गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता का इलाज करते समय विशाल को अनुभव हुआ कि  वहाँ कुछ मरीजों के परिजन बहुत भूखे थे। महंगे इलाज के कारण वे आर्थिक रूप से भी बुरी तरह टूट चुके थे। और इनके पास खाने के लिए पैसे भी नहीं बचे थे। उन्हें यह जानकर बहुत दुःख हुआ और विशाल ने तब से ठान लिया कि सक्षम होने पर वे इन जैसे गरीब लोगों को भूखे नहीं सोने देंगे। 

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उसके कुछ दिनों बाद विशाल के पिता की मृत्यु हो गयी। यह पिता की मौत थी जिसने विशाल को अपने जीवन में किये गये निर्णय पर अब शक़ होने लगा कि अब ऐसी स्थिति में उनके द्वारा लिया गया प्रण पूर्ण भी हो पायेगा या नहीं । पिता की मृत्यु के बाद विशाल लखनऊ आ गए जहाँ उनकी बहन की शादी हुई थी। यहीं उन्होंने ऐसे लोगों की तलाश की जो जरूरतमंद हों और खाना खिलाकर उनकी मदद की जा सके। 

शुरुआत में इन्होने एक चाय का स्टाल और मोमबत्तियां बनाना और बेचना शुरू कर दिया। लेकिन उससे कुछ खास आमदनी नहीं हुई।इसके बाद सीतापुर रोड पर इलेक्ट्रिकल सामानों की इकाई स्थापित की। इस व्यवसाय से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज़ों के सेज-संबंधियों के लिए खाना बनाने की व्यवस्था की। 

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लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में एक बड़ा बरगद का पेड़ हैं जिसके नीचे विशाल भूखे लोगों के लिए खाना तैयार करते हैं और प्रतिदिन 1-3 बजे के दौरान 250 गरीब मरीजों के परिजनों को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन खिलाया जाता हैं। विशाल के अनुसार अस्पताल केवल मरीजों को खाना खिलाते हैं लेकिन उनके परिजनों का इलाज के दौरान बहुत पैसा खर्च हो जाता है और खाने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं बचते। हालाँकि कभी-कभी पैसे होने पर भी परिजन उसे अपने खाने पर न खर्च कर जरूरी दवाइयों या अन्य जांच के लिए बचाकर रखते हैं। 

एक दशक से अधिक समय से विशाल लोगों को निशुल्क भोजन करा रहे हैं। उन्होंने लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल से शुरुवआत की और इसके बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी नि:शुल्‍क भोजनालय केंद्र खोलने की व्यवस्था की है।

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खास बात है कि विशाल इस कार्य में किसी व्यक्ति से आर्थिक सहयोग नहीं लेते हैं । बल्कि स्वेच्छा से राशन व अन्य सामान दान देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अगर कोई आर्थिक मदद करना चाहे तो फाउंडेशन के खाते में जमा कर सकते हैं। उनके कुछ साथी विशेष अवसरों पर भोजन की व्यवस्था में सहयोग करते हैं।

भोजन बनाने और खिलाने में पूर्ण तरह से पारदर्शिता बरती जाती हैं। हर सुबह अस्पतालों के कर्मचारी करीब 250 लोगों को भोजन का कूपन देते हैं जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जिसके बाद कूपन दिखाकर वे भोजन प्राप्त कर सकते हैं। विशाल ने अकेले किंग जॉर्ज अस्पताल में अभी तक 6 लाख लोगों को निःशुल्क भोजन कराया है। 

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विशाल सुनिश्चित करते हैं कि हर व्यक्ति के पास अच्छा भोजन हो और वे खाना खाकर संतुष्ट हो जाएं। वास्तव में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि  अस्पताल के बाहर परोसा जाने वाला भोजन स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। “पौष्टिक भोजन प्यार के साथ परोसा जाता हैं।” यह विशाल का आदर्श वाक्य है। 

इस नियमित भोजन में रोटी, पूरी, दाल, सब्जी, चावल, सलाद, पापड़, चटनी और एक मीठा शामिल होता है। विशाल भोजन के दौरान कुछ समय इन लोगों के साथ बिताते हैं और वे चाहते हैं कि लोग अपनी सारी परेशानी को भूलकर राहत महसूस करें। 

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